झारखंड: बिना सरना धर्म कोड के होगी जातीय जनगणना

झारखंड: बिना सरना धर्म कोड के होगी जातीय जनगणना

Ranchi: झारखंड में पहली बार जातीय जनगणना होने जा रही है, लेकिन इसमें सरना धर्म कोड को शामिल नहीं किया जाएगा। राज्य सरकार के आग्रह के बावजूद केंद्र सरकार ने इसे मंजूरी नहीं दी है। इससे राज्य की आदिवासी आबादी में असंतोष का माहौल है, क्योंकि लंबे समय से सरना कोड की मांग की जा रही थी।

डिजिटल माध्यम से पहली बार जनगणना

इस बार जनगणना पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराई जाएगी। पहली बार सभी राज्यों में मोबाइल ऐप के जरिए आंकड़े जुटाए जाएंगे। जनगणना पोर्टल बन चुका है और प्रत्येक गिनती डिजिटल पद्धति से होगी। यह प्रक्रिया मार्च 2026 तक पूरी करने का लक्ष्य है।

सरना कोड पर केंद्र और राज्य आमने-सामने

राज्य सरकार ने विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र को भेजा था कि झारखंड में सरना धर्म कोड लागू किया जाए। कांग्रेस, झामुमो और अन्य दल इस मांग पर एकजुट थे। बावजूद इसके, केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया कि मौजूदा जनगणना में कोई नया कोड नहीं जोड़ा जाएगा। इससे सरना धर्म मानने वालों में निराशा है।

झारखंड की अनुमानित आबादी

अभी झारखंड की अनुमानित आबादी 4.06 करोड़ है। वर्ष 2011 की जनगणना में यह 3.29 करोड़ थी। अनुमान है कि 2027 में नई जनगणना रिपोर्ट जारी की जाएगी, जिसमें ताज़ा जनसंख्या का खुलासा होगा।

बड़े शहरों में सर्वाधिक जनसंख्या

राज्य के प्रमुख शहर रांची, धनबाद और जमशेदपुर सबसे ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र बने हुए हैं। रांची में करीब 14 लाख, धनबाद में 13 लाख और जमशेदपुर में 7 लाख से अधिक लोग रहते हैं। गिरिडीह, देवघर और हजारीबाग जैसे जिलों में भी तेजी से जनसंख्या बढ़ी है।

जनगणना की प्रक्रिया और चरण

जनगणना प्रक्रिया मार्च 2026 तक पूरी होगी। 2025 के अंत तक टेस्टिंग और प्रशिक्षण कार्य चलेंगे। पहले चरण में मकानों की गिनती होगी और इसके बाद जनसंख्या की विस्तृत गिनती शुरू होगी। सभी सूचनाएं डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज होंगी।

सरना धर्म कोड की मांग बनी रहेगी

हालांकि इस बार सरना धर्म कोड शामिल नहीं किया जा रहा है, लेकिन राज्य सरकार और जनजातीय संगठन भविष्य में इस मांग को लेकर संघर्ष जारी रख सकते हैं। जनगणना रिपोर्ट में धर्मवार आंकड़े आने के बाद यह मुद्दा और तेज हो सकता है।

झारखंड में होने वाली यह डिजिटल जातीय जनगणना ऐतिहासिक मानी जा रही है। लेकिन सरना धर्म कोड को न मानने का निर्णय राज्य की राजनीति और सामाजिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित करेगा।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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