नई दिल्ली/मुंबई | वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध की आहट ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। बुधवार, 4 मार्च को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 69 पैसे की भारी गिरावट के साथ 92.18 के अपने अब तक के सबसे निचले (All-time Low) स्तर पर जा गिरा। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों ने न केवल कच्चे तेल की कीमतों में आग लगा दी है, बल्कि भारतीय मुद्रा बाजार में भी हड़कंप मचा दिया है।
होली की छुट्टी के बाद जब आज बाजार खुला, तो निवेशकों के चेहरे पर रंग की जगह चिंता की लकीरें दिखीं। कच्चा तेल (Crude Oil) अंतरराष्ट्रीय बाजार में 82 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर को पार कर चुका है, जिसका सीधा असर भारतीय रुपये की सेहत पर दिख रहा है।
युद्ध का असर: 85% तेल आयात पर टिकी भारत की धड़कनें
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। जब भी मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) में तनाव बढ़ता है, डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होने लगता है। सोमवार को रुपया 91.49 पर बंद हुआ था, लेकिन दो दिनों के वैश्विक दबाव और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने इसे रिकॉर्ड गिरावट की ओर धकेल दिया।
क्यों टूट रहा है रुपया? 3 मुख्य कारण
- ईरान-इजरायल युद्ध: युद्ध की स्थिति ने सप्लाई चेन को प्रभावित करने का डर पैदा कर दिया है।
- विदेशी निवेशकों का पलायन: सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय शेयर बाजार से 3,295.64 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर अपना पैसा निकाला। जब निवेशक डॉलर लेकर बाहर जाते हैं, तो रुपये की वैल्यू कम हो जाती है।
- छुट्टियों का बैकलॉग: मंगलवार को होली के कारण बाजार बंद थे, जिससे दो दिनों की वैश्विक निगेटिव खबरों का असर आज एक साथ बाजार पर पड़ा।
आम आदमी की जेब पर क्या होगा असर?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि रुपये की इस ऐतिहासिक गिरावट का असर सीधा आपकी रसोई और खर्चों पर पड़ने वाला है:
- महंगा होगा पेट्रोल-डीजल: आयात बिल बढ़ने से तेल कंपनियां कीमतों में बढ़ोतरी कर सकती हैं, जिससे माल ढुलाई महंगी होगी।
- इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के दाम: मोबाइल, लैपटॉप और विदेशी कलपुर्जे महंगे हो जाएंगे क्योंकि कंपनियों को आयात के लिए अब ज्यादा डॉलर चुकाने होंगे।
- महंगाई का चक्र: ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने से फल, सब्जियां और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतें बढ़ना तय है।
नोट: मुंबई के फॉरेक्स डीलर्स के बीच आज सुबह से ही अफरा-तफरी का माहौल है। जानकारों का कहना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें $90 की ओर बढ़ती हैं, तो रुपया जल्द ही 93-94 के स्तर को भी छू सकता है।
सरकार और RBI का अगला कदम
बाजार की नजर अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) पर है। विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये को और ज्यादा गिरने से रोकने के लिए RBI अपने विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Reserve) से डॉलर बाजार में उतार सकता है। यदि वैश्विक तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में ब्याज दरों में भी फेरबदल की संभावना बन सकती है।











