भारत के ‘चिकन नेक’ पर मंडराया संकट? तारिक रहमान की वापसी से क्यों उड़ी दिल्ली की नींद, क्या कट जाएगा पूर्वोत्तर का रास्ता?

Subhash Shekhar
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New Delhi | बांग्लादेश में 17 साल बाद सत्ता का तख्तापलट और तारिक रहमान की प्रचंड वापसी ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भूचाल ला दिया है। 12 फरवरी 2026 के चुनाव नतीजों के बाद अब सबसे बड़ा सवाल भारत की सुरक्षा को लेकर उठ रहा है। क्या पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी स्थित 22 किलोमीटर चौड़ा ‘चिकन नेक’ (Siliguri Corridor) अब असुरक्षित है? जिस तरह से बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें सिर उठा रही हैं, उसने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को ‘हाई अलर्ट’ पर डाल दिया है।

क्यों डरा रहा है इतिहास? तारिक रहमान और भारत का पुराना टकराव

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान का प्रधानमंत्री की कुर्सी तक पहुँचना भारत के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है। साल 2001 से 2006 के बीच जब खालिदा जिया की सरकार थी, तब तारिक रहमान को सत्ता का असली केंद्र माना जाता था। उस दौरान भारत के उत्तर-पूर्व में सक्रिय उग्रवादी गुटों (जैसे ULFA) को बांग्लादेश की धरती पर पनाह मिलने के कई सबूत मिले थे। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वही इतिहास दोहराया गया, तो भारत के लिए सिलीगुड़ी कॉरिडोर को सुरक्षित रखना एक बड़ी सरगर्मी बन जाएगा।

चिकन नेक: भारत की वो ‘कमजोर नस’ जिस पर टिकी है दुनिया की नजर

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकन नेक’ कहा जाता है, भारत के मुख्य भूभाग को सात उत्तर-पूर्वी राज्यों (Seven Sisters) से जोड़ता है। यह हिस्सा इतना संकरा है कि किसी भी युद्ध या अस्थिरता की स्थिति में दुश्मन इसे काटकर भारत के एक बड़े हिस्से को अलग-थलग कर सकता है। ताजा अपडेट के अनुसार, बांग्लादेश के रंगपुर और दिनाजपुर जैसे सीमावर्ती इलाकों में ‘जमात-ए-इस्लामी’ जैसे संगठनों की सक्रियता बढ़ी है, जो सीधे तौर पर इस कॉरिडोर पर दबाव बनाने की रणनीति बना रहे हैं।

भारत का मास्टरप्लान: टनल से लेकर स्मार्ट फेंसिंग तक ‘अभय कवच’

दिल्ली में बैठी सरकार इस खतरे से अनजान नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, भारतीय सेना और रेलवे ने ‘चिकन नेक’ के विकल्प के तौर पर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है:

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  • अंडरग्राउंड रेलवे टनल: बागडोगरा के पास एक विशाल भूमिगत रेल नेटवर्क तैयार किया जा रहा है ताकि हमले की स्थिति में भी रसद और सेना की आवाजाही न रुके।
  • स्मार्ट फेंसिंग: बांग्लादेश सीमा पर लेजर-बेस्ड फेंसिंग लगाई जा रही है जिससे परिंदा भी पर न मार सके।
  • सप्त शक्ति कमांड: सिलीगुड़ी के पास भारतीय सेना की तैनाती को दोगुना कर दिया गया है।

आम आदमी पर क्या होगा असर?

अगर बांग्लादेश के साथ संबंध तनावपूर्ण होते हैं, तो इसका सीधा असर पश्चिम बंगाल, मेघालय, असम और त्रिपुरा के सीमावर्ती व्यापार पर पड़ेगा। महंगाई बढ़ सकती है और घुसपैठ की आशंका के चलते सुरक्षा चेकिंग कड़ी होने से आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा की है, क्योंकि अस्थिर बांग्लादेश का मतलब है भारत की सीमाओं पर अशांति।

दोस्ती या सतर्कता?

भारत ने तारिक रहमान को जीत की बधाई देकर कूटनीतिक शिष्टाचार तो दिखाया है, लेकिन सेना की मुस्तैदी कम नहीं की है। आने वाले कुछ महीने तय करेंगे कि तारिक रहमान अपने पुराने ‘भारत-विरोधी’ अक्स को छोड़ते हैं या फिर दक्षिण एशिया एक नए संघर्ष की ओर बढ़ रहा है। भारत के लिए अब हर कदम फूंक-फूंक कर रखने का समय है।

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सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।
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