ब्रेकिंग न्यूज़
लोड हो रहा है... ताज़ा खबरों के लिए बने रहें...
Advertisement
Jharkhand News

HEC बाईपास अतिक्रमण: हाईकोर्ट ने रोकी बुलडोजर कार्रवाई, मिला अल्टीमेटम

​रांची के बहुचर्चित HEC बाईपास इलाके में चल रहे जिला प्रशासन के ‘बुलडोजर एक्शन’ पर झारखंड हाईकोर्ट ने तत्काल प्रभाव से ब्रेक लगा दिया है। कोर्ट के इस फैसले से इलाके के सैकड़ों परिवारों और दुकानदारों ने फौरी तौर पर बड़ी राहत की सांस ली है।

​शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस आनंदा सेन की अदालत ने रांची के उपायुक्त (DC) और एसएसपी (SSP) को निर्देश दिया कि इलाके में चल रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान को तुरंत रोक दिया जाए। आगामी त्योहारों के मद्देनजर अदालत ने यह संवेदनशील कदम उठाया है।

Advertisement

​हालांकि, हाईकोर्ट का यह आदेश स्थायी राहत नहीं है। कोर्ट ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कब्जाधारियों को 31 दिसंबर तक सरकारी जमीन खुद खाली करने की सख्त मोहलत दी है। यानी तय तारीख के बाद प्रशासन फिर से कड़ा रुख अपना सकता है।

​त्योहारों के मद्देनजर मिला अभयदान, प्रशासन को सख्त निर्देश

​HEC बाईपास रोड पर पिछले कुछ दिनों से बुलडोजर गरजाए जाने की तैयारी से पूरे इलाके में हड़कंप और तनाव का माहौल था। स्थानीय लोग अपने आशियाने और रोजी-रोटी उजड़ने के डर से भारी विरोध जता रहे थे। इसी बीच शुक्रवार को यह मामला झारखंड हाईकोर्ट की चौखट पर पहुंचा।

​जस्टिस आनंदा सेन की एकल पीठ ने पूरे घटनाक्रम की गंभीरता और आने वाले त्योहारों को देखते हुए प्रशासनिक अमले को फौरन अभियान थामने का फरमान सुनाया। अदालत ने माना कि ऐन त्योहार के मौके पर लोगों को बेघर या विस्थापित करना मानवीय आधार पर ठीक नहीं है।

​31 दिसंबर की डेडलाइन: ‘खुद हटा लें कब्जा, वरना…’

​राहत के साथ-साथ अदालत ने सख्त हिदायत भी दर्ज की है। कोर्ट ने अतिक्रमणकारियों को साफ कर दिया कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा बनाए रखने की छूट किसी को नहीं दी जा सकती।

  • अंतिम समय सीमा: सभी कब्जाधारियों को 31 दिसंबर तक स्वेच्छा से जमीन खाली करनी होगी।
  • शर्तिया मोहलत: अगर तय समय के भीतर अतिक्रमण खुद नहीं हटाया गया, तो नए साल में प्रशासन पूरी ताकत के साथ कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा।

​बिना फीस लड़ी गरीबों की लड़ाई, कोर्ट में क्या बोले वकील?

​इस पूरे मामले में एक मानवीय पहलू भी सामने आया, जिसकी चर्चा कचहरी परिसर से लेकर HEC की गलियों तक हो रही है। प्रार्थियों की ओर से अदालत में पक्ष रख रहे जाने-माने अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अधिवक्ता अखौरी अविनाश कुमार ने मजबूती से दलीलें पेश कीं।

​अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा ने इस संवेदनशील मामले के लिए प्रभावित परिवारों से कोई भी कानूनी फीस (वकालतनामा शुल्क) नहीं ली। कोर्ट में उन्होंने दलील दी कि प्रशासनिक कार्रवाई से त्योहारों के समय सैकड़ों परिवारों के सामने गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो जाएगा, जिसके बाद अदालत ने 31 दिसंबर तक की मोहलत मंजूर कर ली।

अब आगे क्या करेगा रांची प्रशासन?

​हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद जिला प्रशासन ने अपनी गाड़ियां और पुलिस बल पीछे हटा लिया है, लेकिन प्रशासनिक महकमा अब 31 दिसंबर की समय सीमा पर नजर बनाए हुए है।

​तय तारीख बीतने के बाद प्रशासन इलाके की डिजिटल मैपिंग और ड्रोन सर्वे करा सकता है। यदि स्थानीय लोग स्वेच्छा से जमीन खाली नहीं करते हैं, तो 1 जनवरी से एक बार फिर HEC बाईपास पर बुलडोजर की तेज गड़गड़ाहट देखने को मिल सकती है। गेंद अब पूरी तरह से स्थानीय कब्जाधारियों के पाले में है।

Related Stories & Ads

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now