New Delhi: लोकसभा ने हेल्थ एंड नेशनल सिक्योरिटी सेस बिल, 2025 को मंजूरी दे दी है, जिसके बाद पान-मसाला, सिगरेट और अन्य डिमेरिट उत्पादों की कीमतें बढ़ने तय मानी जा रही हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐसे उत्पादों पर बढ़ा कर समाज के हित में है और इससे जुटी राशि राष्ट्र की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुरक्षा को मजबूत बनाने में उपयोग होगी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सरकार ऐसे उत्पादों को कभी भी सस्ता नहीं देखना चाहती, जिनका सार्वजनिक स्वास्थ्य और सामाजिक ताने-बाने पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कोई भी सदस्य यह नहीं चाहेगा कि पान मसाले जैसे डिमेरिट गुड्स पर कर कम किया जाए, क्योंकि इससे राजस्व घटेगा और सामाजिक नुकसान बढ़ेगा।
डिमेरिट गुड्स पर अतिरिक्त सेस की जरूरत क्यों बढ़ी?
बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि राष्ट्र की सुरक्षा जरूरतें लगातार बढ़ रही हैं। आधुनिक सैन्य ढांचे में प्रिसिशन वेपन्स, स्पेस टेक्नोलॉजी, साइबर ऑपरेशंस और अत्याधुनिक रक्षा प्रणालियाँ शामिल हैं, जिनके लिए भारी वित्तीय संसाधन आवश्यक हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि अतीत में रक्षा मंत्रालय को गोला-बारूद की कमी का सामना करना पड़ा था, जिसे दोहराने से सरकार बचना चाहती है।
उन्होंने कहा कि डिमेरिट उत्पादों पर सेस बढ़ने से दोहरे लाभ मिलेंगे—पहला, इन उत्पादों के खपत पर रोकथाम का प्रभाव पड़ेगा, दूसरा, राजस्व जुटेगा जिसे रक्षा और स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने में लगाया जाएगा।
पुराने सेस और उनके पारदर्शी उपयोग का उदाहरण
सीतारमण ने बताया कि देश में कई प्रकार के सेस पहले से लागू हैं और उनका उपयोग पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, 1974 का क्रूड ऑयल सेस सीधे ऑयल इंडस्ट्री डेवलपमेंट फंड में जाता है। 2001 का नेशनल कैलेमिटी कंटिंजेंसी ड्यूटी आपदा राहत कार्यों में खर्च होता है, जबकि रोड एंड इंफ्रास्ट्रक्चर सेस का उपयोग राष्ट्रीय सड़कों और बुनियादी ढांचे के विस्तार में किया जाता है।
वित्त मंत्री ने आगे बताया कि हेल्थ एंड एजुकेशन सेस से राज्यों को वसूली से अधिक राशि वितरित की जाती है। वर्ष 2014–15 से 2025–26 तक कुल ₹6.49 लाख करोड़ सेस के रूप में एकत्र किए गए, जिनमें से ₹6.07 लाख करोड़ राज्यों में वितरित हुए।
तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी में बढ़ोतरी
विंटर सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों ने तंबाकू और उससे जुड़े उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने वाला बिल भी पास किया है। वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि यह कोई नया सेस नहीं है, बल्कि एक्साइज ड्यूटी है, जो डिविज़िबल पूल का हिस्सा होगा। राज्यों को इसका 41% हिस्सा मिलेगा, जिससे उन्हें भी आर्थिक लाभ पहुंचेगा।
सरकार का कहना है कि यह एक्साइज ड्यूटी उस पुराने ढांचे को बहाल करती है, जो जीएसटी लागू होने से पहले अस्तित्व में था। इसका उद्देश्य राजस्व संग्रह को संतुलित रखना और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को कम करना है।










