राजामौली ने मेक्सिको में खड़ा कर दिया ‘डुप्लीकेट’ वाराणसी, ईंट-ईंट जोड़कर रची नई दुनिया!

राजामौली ने मेक्सिको में खड़ा कर दिया 'डुप्लीकेट' वाराणसी, ईंट-ईंट जोड़कर रची नई दुनिया!

Bollywood: जनाब, अगर आप सोच रहे हैं कि एस.एस. राजामौली सिर्फ फिल्में बनाते हैं, तो अपनी जानकारी दुरुस्त कर लीजिए। वो पूरा का पूरा भूगोल बदलने की ताकत रखते हैं! हाल ही में मेक्सिको के ‘कॉमिक कॉन 2026’ में उनके बेटे और प्रोड्यूसर एस.एस. कार्तिकेय ने जो बम फोड़ा है, उसकी गूंज सात समंदर पार तक सुनाई दे रही है। खबर ये है कि राजामौली ने अपनी अगली फिल्म वाराणसी के लिए सिर्फ सेट नहीं लगाया, बल्कि काशी के घाटों को ईंट-ईंट जोड़कर दोबारा पैदा कर दिया है!

अब आप कहेंगे, “भाई, असली वाराणसी में क्या कमी थी?” तो ठहरिए, मामला जरा फिल्मी और थोड़ा ‘राजामौली स्टाइल’ वाला है।

मेक्सिको में ‘देसी स्वैग’: जब कार्तिकेय ने खोल दी पोल!

मेक्सिको के खचाखच भरे हॉल में जब कार्तिकेय स्टेज पर आए, तो सबको लगा कि कोई नया ट्रेलर आएगा। लेकिन उन्होंने तो इंजीनियरिंग का अजूबा सुना दिया। उन्होंने साफ कह दिया कि फिल्म की शुरुआत, मिडिल और क्लाइमेक्स—सब कुछ वाराणसी के घाटों पर ही है।

कार्तिकेय ने मजेदार अंदाज में बताया, “हमारे डायरेक्टर साहब (राजामौली) के दिमाग में कुछ ऐसे खतरनाक सीन थे कि अगर हम असली घाट पर शूटिंग करने जाते, तो शायद बनारस की आधी जनता को शिफ्ट करना पड़ता! इसलिए हमने सोचा—अगर हम बनारस नहीं जा सकते, तो बनारस को अपने पास ले आते हैं।”

इंजीनियरिंग नहीं, ये तो ‘आध्यात्मिक पागलपन’ है!

  • इंच-इंच का हिसाब: प्रोडक्शन डिजाइनरों को बाकायदा वाराणसी भेजा गया। उन्होंने वहां के घाटों की एक-एक सीढ़ी और पत्थरों की नक्काशी को ऐसे नापा जैसे कोई जासूस सबूत इकट्ठा कर रहा हो।
  • CGI को कहा ‘टा-टा’: आजकल की फिल्में कंप्यूटर (VFX) पर बनती हैं, लेकिन राजामौली को ‘असली’ चाहिए था। उन्होंने ईंट, पत्थर और मिट्टी मंगवाकर हुबहू वही घाट खड़े कर दिए, ताकि जब महेश बाबू वहां दौड़ें, तो धूल भी असली उड़े!

रुद्र, मंदाकिनी और कुंभा: ये त्रिकोण हिला देगा बॉक्स ऑफिस

फिल्म में महेश बाबू ‘रुद्र’ बनकर क्या कहर ढाने वाले हैं, इसकी झलक उनके लुक से ही मिल गई है। ऊपर से प्रियंका चोपड़ा का ‘मंदाकिनी’ अवतार और पृथ्वीराज सुकुमारन का ‘कुंभा’ वाला खूंखार लुक—ऐसा लग रहा है कि राजामौली इस बार ऑस्कर नहीं, सीधा दर्शकों का दिल जीतने की फिराक में हैं।

यूरोप के ट्रेलर फेस्टिवल में जब इसका प्रीव्यू दिखा था, तो विदेशी भी सीटियां बजा रहे थे। अब मेक्सिको की इस खबर ने आग में घी का काम किया है।

तो अब आगे क्या? (The Real Impact)

आम आदमी के लिए ये खबर सिर्फ एक फिल्म की अपडेट नहीं है। ये इस बात का सबूत है कि भारतीय सिनेमा अब ‘जुगाड़’ पर नहीं, ‘जुनून’ पर चल रहा है। 7 अप्रैल 2027 को जब ये फिल्म पर्दे पर आएगी, तो मुकाबला किसी दूसरी बॉलीवुड फिल्म से नहीं, बल्कि हॉलीवुड की ‘एवेंजर्स’ लेवल की भव्यता से होगा।

प्रशासन और टूरिज्म विभाग भी खुश है, क्योंकि फिल्म रिलीज होने के बाद वाराणसी में जो सैलानियों का रेला आएगा, उसे संभालने के लिए अभी से तैयारी करनी पड़ेगी!

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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