चुनाव आयोग ने फिर दोहराया निर्देश: कोई योग्य मतदाता छूटे नहीं, कोई अयोग्य जुड़े नहीं
चुनाव आयोग लगातार इस बात पर ज़ोर दे रहा है कि बिहार की अंतिम मतदाता सूची में कोई भी योग्य मतदाता छूटने ना पाए और कोई भी अयोग्य मतदाता अनधिकृत रूप से सूची में शामिल न हो। इसके लिए आयोग ने 1 अगस्त को राज्य की प्रारूप मतदाता सूची जारी की थी, जिससे जुड़ी किसी भी त्रुटि को सुधारने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि अब तक किसी भी राजनीतिक दल ने एक भी दावा या आपत्ति दर्ज नहीं कराई है।
राजनीतिक दलों की चुप्पी पर उठे सवाल
बिहार में सक्रिय राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय 13 राजनीतिक दलों ने कुल 1,60,813 बीएलए (BLA) नामित किए हैं, लेकिन 1 अगस्त से 6 अगस्त के बीच इनकी ओर से कोई भी दावा या आपत्ति प्राप्त नहीं हुई। इसमें बीजेपी, आरजेडी, जेडीयू, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी सहित तमाम बड़े दल शामिल हैं।
चुनाव आयोग द्वारा जारी एसआईआर रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी के 53,338 बीएलए, राष्ट्रीय जनता दल के 47,506 और जदयू के 36,550 बीएलए होने के बावजूद कोई प्रतिक्रिया दर्ज नहीं हुई है।
सीधे मतदाताओं से मिली 3,659 आपत्तियां, लेकिन निस्तारण शून्य
राजनीतिक दलों की निष्क्रियता के बीच आम नागरिकों की जागरूकता थोड़ी राहत की बात है। प्रारूप सूची को लेकर 3,659 मतदाताओं ने सीधे दावे और आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
इसके अलावा, 18 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले नागरिकों से 19,186 फॉर्म 6 और घोषणापत्र प्राप्त हुए हैं, जो कि नए मतदाता बनने के लिए आवश्यक होते हैं।
हालांकि, अभी तक इन सभी दावों और आपत्तियों पर कोई निस्तारण नहीं हुआ है, क्योंकि नियमानुसार यह कार्य संबंधित ERO या AERO द्वारा 7 दिन की समयसीमा समाप्त होने के बाद ही किया जाएगा।
चुनाव आयोग ने दिया स्पष्ट संदेश: बिना स्पीकिंग ऑर्डर नहीं हटेगा नाम
चुनाव आयोग ने सभी निर्वाचन रजिस्ट्रार अधिकारियों को यह निर्देश दिया है कि किसी भी नाम को बिना समुचित जांच और निष्पक्ष सुनवाई के सूची से नहीं हटाया जा सकता।
यदि कोई नाम हटाना आवश्यक भी हो, तो पहले संबंधित व्यक्ति को अवसर देना होगा और फिर एक स्पष्ट स्पीकिंग ऑर्डर (Speaking Order) के जरिए ही यह कार्रवाई संभव होगी।
जहां एक ओर आयोग मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए तत्पर है, वहीं राजनीतिक दलों की निष्क्रियता कई सवाल खड़े कर रही है। ऐसे में मतदाता जागरूकता और सहभागिता से ही लोकतंत्र की इस बुनियाद को मजबूत किया जा सकता है।











