Ranchi | रांची में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 307 करोड़ रुपये के बड़े मल्टी लेवल मार्केटिंग (एमएलएम) घोटाले का पर्दाफाश करते हुए एम/एस मैक्सिजोन टच प्रा. लि. के निदेशक चंद्र भूषण सिंह और उनकी पत्नी प्रियंका सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत की गई इस कार्रवाई के बाद दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।
प्रवर्तन निदेशालय, रांची जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत यह कार्रवाई की। ईडी के अनुसार, चंद्र भूषण सिंह और प्रियंका सिंह पर सार्वजनिक धन के दुरुपयोग और बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी का आरोप है।
जांच में सामने आया है कि मैक्सिजोन टच प्रा. लि. के माध्यम से एक सुनियोजित और धोखाधड़ीपूर्ण एमएलएम योजना चलाई गई। इस योजना में आम लोगों को हर महीने असामान्य रूप से ऊंचे रिटर्न और आकर्षक रेफरल बोनस का लालच दिया गया।
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि इस योजना के जरिए 21 से अधिक बैंक खातों में लगभग 307 करोड़ रुपये की अवैध राशि जमा कराई गई। यह पूरी रकम अपराध से अर्जित धन (Proceeds of Crime) मानी गई है।
घोटाले की पृष्ठभूमि और कार्यप्रणाली
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए पेशेवर नेटवर्क और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया। धीरे-धीरे हजारों लोगों को इस एमएलएम नेटवर्क से जोड़ा गया।
ईडी का कहना है कि योजना पूरी तरह से पोंजी स्कीम की तर्ज पर संचालित थी। पुराने निवेशकों को नए निवेशकों के पैसे से भुगतान किया जाता रहा। जैसे ही निवेश का प्रवाह धीमा पड़ा, आरोपी धन लेकर फरार हो गए।
पिछले तीन वर्षों से आरोपी झारखंड, राजस्थान और असम सहित विभिन्न राज्यों की पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचते रहे।
अवैध धन को सफेद करने का तरीका
ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने अवैध रूप से अर्जित धन को सफेद करने के लिए बेनामी लेनदेन का सहारा लिया। कई रियल एस्टेट संपत्तियां दूसरों के नाम पर खरीदी गईं।
इन संपत्तियों को बाद में नकद में बेचकर धन को वैध दिखाने की कोशिश की गई। इसके अलावा आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया।
जांच एजेंसी के अनुसार, चंद्र भूषण सिंह ने “दीपक सिंह” जैसे छद्म नामों का उपयोग किया और लगातार ठिकाने बदलते रहे।
देशभर में हुई तलाशी कार्रवाई
ईडी ने इस मामले में झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक में दर्ज कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की थी।
जांच के क्रम में 16 सितंबर 2025 और 3 दिसंबर 2025 को दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, वैशाली (बिहार), मेरठ, रांची और देहरादून में एक साथ तलाशी अभियान चलाया गया।
तलाशी कार्रवाई PMLA की धारा 17 के तहत की गई, जिसमें कई अहम सबूत बरामद हुए।
तलाशी में क्या-क्या बरामद हुआ
ईडी को तलाशी के दौरान नकली पहचान पत्र, हस्तलिखित नोट्स और डायरियां मिलीं। इन दस्तावेजों में बड़े पैमाने पर वित्तीय और नकद लेनदेन का विवरण दर्ज था।
इसके अलावा लगभग 10 लाख रुपये से अधिक की नकदी, सहयोगियों की सूची, विभिन्न संस्थाओं की खाता पुस्तिकाएं और कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए।
ईडी ने लैपटॉप, मोबाइल फोन, 15 हजार अमेरिकी डॉलर मूल्य की क्रिप्टो करेंसी और कई रियल एस्टेट संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज भी कब्जे में लिए हैं।
प्रशासन और जांच एजेंसी की प्रतिक्रिया
ईडी अधिकारियों के अनुसार, यह मामला संगठित वित्तीय अपराध का गंभीर उदाहरण है। एजेंसी ने साफ किया है कि आम जनता की गाढ़ी कमाई से जुड़े ऐसे मामलों में किसी भी स्तर पर सख्ती बरती जाएगी।
ईडी ने बताया कि आरोपियों को विशेष PMLA न्यायालय, रांची के आदेश पर पांच दिनों की ईडी हिरासत में भेजा गया है। पूछताछ के दौरान नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
आम जनता पर असर
इस घोटाले का सबसे बड़ा असर उन हजारों निवेशकों पर पड़ा है, जिन्होंने बेहतर भविष्य के सपने के साथ इस योजना में अपनी पूंजी लगाई थी।
कई निवेशकों की जीवनभर की जमा पूंजी इस योजना में फंस गई। मामले के उजागर होने के बाद निवेशकों में रोष और चिंता दोनों देखने को मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों से आम लोगों का वित्तीय संस्थानों और निवेश योजनाओं पर भरोसा कमजोर होता है।
ईडी ने संकेत दिए हैं कि इस मामले में आगे और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। एजेंसी नेटवर्क से जुड़े एजेंटों, प्रमोटरों और लाभार्थियों की भूमिका की जांच कर रही है।
इसके साथ ही अवैध रूप से अर्जित संपत्तियों को कुर्क करने की प्रक्रिया भी तेज की जाएगी। निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है।
307 करोड़ रुपये का यह एमएलएम घोटाला एक बार फिर यह चेतावनी देता है कि अत्यधिक रिटर्न का वादा करने वाली योजनाओं से सतर्क रहना जरूरी है। ईडी की कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि वित्तीय अपराधों में शामिल लोगों के खिलाफ कानून सख्ती से लागू होगा।









