New Delhi | राष्ट्रीय राजधानी में एक बार फिर घनी धुंध और वायु प्रदूषण ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। Central Pollution Control Board (CPCB) के अनुसार दिल्ली का AQI 423 दर्ज किया गया है, जिसे ‘गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। प्रदूषण के इस स्तर ने स्वास्थ्य, यातायात और दैनिक जीवन पर सीधा असर डाला है।
दिल्ली के अधिकांश इलाकों में सुबह से ही घनी धुंध छाई रही। दृश्यता में भारी गिरावट के कारण सड़कों पर वाहन रेंगते नजर आए। कई स्थानों पर विजिबिलिटी 100 मीटर से भी कम दर्ज की गई।
प्रदूषण के चलते आंखों में जलन, सांस लेने में दिक्कत और गले में खराश की शिकायतें बढ़ीं। डॉक्टरों ने बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ने के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं।
- सर्दियों में तापमान गिरने से वायुमंडलीय स्थिरता बढ़ जाती है, जिससे प्रदूषक कण नीचे ही फंस जाते हैं।
- वाहनों से निकलने वाला धुआं और निर्माण गतिविधियां स्थिति को और खराब करती हैं।
- पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने से उठने वाला धुआं भी हवा की गुणवत्ता पर असर डालता है।
कम हवा की रफ्तार और नमी के कारण प्रदूषक कण वातावरण में लंबे समय तक टिके रहते हैं।
प्रदूषण की गंभीर स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है। पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि AQI 400 से ऊपर पहुंचना स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है।
विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि लोग अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और मास्क का उपयोग करें। स्कूलों में बच्चों को खुले में गतिविधियों से बचाने की हिदायत दी गई है।
दिल्ली की जहरीली हवा ने आम लोगों का जीवन प्रभावित किया है।
- दफ्तर जाने वालों को लंबा सफर तय करना पड़ा।
- बुजुर्गों और अस्थमा रोगियों को अस्पतालों का रुख करना पड़ा।
- सुबह की सैर करने वालों ने घर के अंदर रहना ही बेहतर समझा।
लोगों में बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता और नाराजगी दोनों देखी जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक हवा की गति कम रहने की संभावना है। यदि हल्की बारिश या तेज हवाएं चलती हैं, तो प्रदूषण स्तर में कुछ राहत मिल सकती है।
प्रशासन प्रदूषण नियंत्रण उपायों पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
दिल्ली में AQI 423 के साथ वायु प्रदूषण ने गंभीर रूप ले लिया है। जब तक मौसम में बदलाव नहीं आता और प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होता, तब तक राजधानी की हवा लोगों के लिए खतरा बनी रहेगी।










