Advertisement
Education

Exclusive: बिना ट्यूशन और सोशल मीडिया के साथ कैसे बनीं प्रण्‍या प्रिया झारखंड टॉपर? 99.6% वाली पूरी ‘Success Script’

Ranchi | जब इरादे मजबूत हों, तो संसाधन कभी बाधा नहीं बनते। सीबीएसई 10वीं की बोर्ड परीक्षा में 99.6% अंक हासिल कर झारखंड की प्रण्‍या प्रिया ने इस बात को साबित कर दिया है। ‘लोकल खबर’ की टीम ने जब प्रज्ञा और उनके परिवार से खास बातचीत की, तो सफलता के ऐसे सूत्र सामने आए जो आज के हर छात्र और अभिभावक के लिए जानना जरूरी है।

क्विक हाईलाइट्स: प्रण्‍या प्रिया की मार्कशीट और स्ट्रेटजी

विषय (Subject)प्राप्तांक (Marks)सफलता का मुख्य मंत्र
संस्कृत100/100स्कूल नोट्स और रिवीजन
साइंस100/100कॉन्सेप्ट की स्पष्टता
AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस)100/100ऑनलाइन लर्निंग व रुचि
मैथ्स92निरंतर अभ्यास
कोचिंग/ट्यूशनशून्य (0)सेल्फ स्टडी पर भरोसा

1. सेल्फ स्टडी का जादू: “मैंने कोई ट्यूशन नहीं लिया”

अक्सर माना जाता है कि टॉपर बनने के लिए महंगी कोचिंग जरूरी है, लेकिन प्रण्‍या ने इसे गलत साबित कर दिया। हमारे साक्षात्कार में प्रण्‍या ने बताया, “मैंने स्कूल के बाद केवल 3-4 घंटे घर पर रिवाइज किया। मेरी तैयारी पूरी तरह से स्कूल टीचर्स के नोट्स और खुद के रिवीजन पर आधारित थी।”

Advertisement

एक्सपर्ट टिप: प्रण्‍या की सफलता दिखाती है कि Deep Topical Authority के लिए बाहर भागने के बजाय उपलब्ध संसाधनों (स्कूल और ऑनलाइन) का गहरा मंथन जरूरी है।

2. मोबाइल और इंटरनेट: दुश्मन नहीं, दोस्त

जहाँ आज के पेरेंट्स बच्चों को मोबाइल से दूर रखते हैं, वहीं प्रण्‍या के पास अपना सेपरेट मोबाइल है। उनकी माँ ने एक बहुत गहरी बात कही: “अगर पेरेंट्स खुद दिन-रात फोन में रहेंगे, तो बच्चों को कैसे रोकेंगे? हमने अपनी बेटी पर विश्वास किया।”

  • कैसे किया इस्तेमाल? कठिन विषयों को समझने के लिए YouTube का सहारा लिया।
  • एंटरटेनमेंट: पढ़ाई के बीच ब्रेक के लिए चेस (Chess), बैडमिंटन और म्यूजिक का उपयोग किया।

3. ‘मजे लेकर पढ़ाई’ न कि ‘टॉप करने का दबाव’

प्रण्‍या से जब हमने 12वीं की तैयारी के बारे में पूछा, तो उन्होंने बहुत ही मैच्योर जवाब दिया— “अगर हम शुरू से ही टॉप करने का प्रेशर लेंगे, तो पढ़ाई बोझ बन जाएगी। मैं बस मजे लेकर पढ़ना चाहती हूँ।” प्रण्‍या भविष्य में अपने पिता की तरह एक सफल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना चाहती हैं।

“मेरे भाई का रोल सबसे अहम रहा क्योंकि वह हाल ही में इसी सिस्टम से निकला है, उसने मुझे हर मोड़ पर गाइड किया।” – प्रण्‍या प्रिया (झारखंड टॉपर)

प्रण्‍या प्रिया की कहानी यह बताती है कि अनुशासन और परिवार का साथ हो, तो बिना किसी भारी-भरकम ट्यूशन के भी इतिहास रचा जा सकता है। लोकल खबर की पूरी टीम प्रण्‍या को उनके उज्जवल भविष्य की शुभकामनाएं देती है।

आपकी क्या राय है? क्या आपको भी लगता है कि मोबाइल का सही इस्तेमाल पढ़ाई में मददगार हो सकता है? कमेंट में हमें जरूर बताएं!

Related Stories & Ads

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment