नई दिल्ली | देश के औद्योगिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब अडानी टोटल गैस लिमिटेड (ATGL) ने गैस की कीमतों में रातों-रात तीन गुना बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया। मिडिल ईस्ट में सुलगती युद्ध की आग और सप्लाई चेन टूटने की वजह से कंपनी ने ₹40 प्रति मानक घन मीटर (SCM) वाली गैस की कीमत सीधे ₹119 पहुंचा दी है। इस फैसले का सीधा असर न केवल फैक्ट्रियों के उत्पादन पर पड़ेगा, बल्कि आने वाले दिनों में आपकी रसोई से लेकर बाजार के सामानों तक महंगाई की एक नई लहर देखने को मिल सकती है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में तनाव: क्यों थमी गैस की रफ्तार?
इस ऐतिहासिक मूल्य वृद्धि के पीछे कोई स्थानीय कारण नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और युद्ध के हालात हैं। सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव ने समुद्री रास्तों को ‘डेथ जोन’ में बदल दिया है।
विश्व के कुल कच्चे तेल का 20% और भारी मात्रा में LNG इसी रास्ते से गुजरती है। ड्रोन और मिसाइल हमलों के खौफ ने कतर के LNG प्लांट्स पर ताला लगवा दिया है। चूंकि भारत अपनी 50-60% गैस जरूरतें इसी मार्ग से पूरी करता है, इसलिए सप्लाई लाइन कटने का सीधा असर अडानी टोटल गैस की इनपुट कॉस्ट पर पड़ा है।
औद्योगिक इकाइयों में त्राहि-त्राहि: बंद होने की कगार पर छोटी फैक्ट्रियां?
गैस की कीमतें ₹40 से बढ़कर ₹119 होने का मतलब है कि उत्पादन लागत में 200% की वृद्धि।
- वैकल्पिक ईंधन का संकट: गैस न मिलने पर कंपनियां फर्नेस ऑयल या नेफ्था की ओर भाग रही हैं, लेकिन उनकी कीमतें भी आसमान छू रही हैं।
- सप्लाई में कटौती: ‘पेट्रोनेट एलएनजी’ और ‘गेल’ जैसी दिग्गज कंपनियों ने भी हाथ खड़े करना शुरू कर दिए हैं।
- ग्राउंड जीरो की हकीकत: पश्चिमी भारत के इंडस्ट्रियल हब (गुजरात और महाराष्ट्र) में कई छोटी इकाइयों ने काम रोक दिया है क्योंकि इस कीमत पर उत्पादन करना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।
कच्चा तेल $84 के पार: क्या पेट्रोल-डीजल भी होंगे महंगे?
केवल गैस ही नहीं, बल्कि वैश्विक तनाव ने ब्रेंट क्रूड को भी आग लगा दी है। जनवरी-फरवरी 2026 में जो तेल $66-67 प्रति बैरल पर स्थिर था, वह अब $84 प्रति बैरल को पार कर चुका है।
“मौजूदा भू-राजनीतिक स्थितियां हमारे नियंत्रण से बाहर हैं। सप्लाई रूट बाधित होने के कारण हमें महंगे वैकल्पिक स्रोतों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिसका बोझ कीमतों पर डालना हमारी मजबूरी है।” – अडानी टोटल गैस (आधिकारिक रुख)
आम आदमी के लिए चेतावनी
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव अगले 15 दिनों में कम नहीं हुआ, तो यह महंगाई केवल इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहेगी। बिजली की दरें, सीएनजी (CNG) की कीमतें और माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम 10-15% तक बढ़ सकते हैं। सरकार अब इमरजेंसी स्ट्रैटेजिक रिजर्व और अन्य देशों से सीधे करार करने की संभावनाएं तलाश रही है।











