झारखंड में ‘कुदरत का ट्रेलर’: कहीं ओले तो कहीं 60 की रफ्तार से ‘उड़ता पंजाब’ वाली आंधी, घर में रहने में ही भलाई है!

झारखंड में 'कुदरत का ट्रेलर': कहीं ओले तो कहीं 60 की रफ्तार से 'उड़ता पंजाब' वाली आंधी, घर में रहने में ही भलाई है!

Jharkhand Weather Update: झारखंड वालों, संभल जाइए! मौसम विभाग ने साफ कर दिया है कि अगले कुछ दिन राज्य में ‘बादल-बिजली और बवाल’ का कॉम्बिनेशन दिखने वाला है। 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं आपके घर के बाहर रखे गमले ही नहीं, बल्कि चैन भी उड़ा सकती हैं। रांची से लेकर साहिबगंज तक ‘ऑरेंज अलर्ट’ का सायरन बज चुका है।

अगर आप सोच रहे थे कि मई की गर्मी में कुल्फी का मज़ा लेंगे, तो कुदरत ने आपके लिए ‘फ्री’ में ओलों (Hailstorm) का इंतज़ाम कर दिया है। रांची और बोकारो में तो इसकी शुरुआत भी हो गई है। मौसम विभाग (IMD) की मानें तो एक ‘टर्फ लाइन’ पंजाब से नगालैंड तक दौड़ रही है और इस बीच झारखंड इसका सबसे बड़ा स्टॉप बन गया है।

सावधान: 60 की रफ्तार और आसमानी ‘पत्थर’

मौसम केंद्र रांची ने जो नक्शा जारी किया है, वह पीला और नारंगी (Orange Alert) हो चुका है। इसका मतलब है कि अब सिर्फ ‘बादल’ नहीं आएंगे, बल्कि उनके साथ तूफानी हवाएं भी होंगी।

  • 4 और 5 मई का डेंजर ज़ोन: देवघर, दुमका, जामताड़ा और रांची जैसे इलाकों में 50 से 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी।
  • हवा नहीं, ये तो आफत है: इतनी रफ्तार में कमजोर पेड़ और बिजली के पोल ‘टाटा-बाय बाय’ कह सकते हैं।
  • ओलावृष्टि का अलर्ट: विभाग ने उत्तर-पूर्वी और मध्य झारखंड में ओले गिरने की चेतावनी दी है।

पारा लुढ़का, पर टेंशन बढ़ी

गर्मी से राहत तो मिली है, लेकिन यह राहत अपने साथ बिजली गिरने (Lightning) का डर भी लाई है।

  • तापमान का खेल: जहां डाल्टनगंज 38.6°C पर तप रहा है, वहीं लातेहार 17.7°C के साथ ‘छोटा शिमला’ बना हुआ है।
  • अगले 4 दिन: पारा 2 से 3 डिग्री और गिरेगा, यानी मौसम तो सुहाना होगा पर आंधी-तूफान का ‘साइड इफेक्ट’ साथ रहेगा।

रांची का हाल: छाता लेकर ही निकलें

राजधानी रांची में तो अगले 7 दिनों तक बादलों का डेरा रहेगा। पिछले 24 घंटों में चकुलिया में 33.6 मिमी बारिश हो चुकी है, जो बता रही है कि मानसून से पहले ही ‘मिनी मानसून’ आ गया है।

नेक सलाह: हीरो न बनें, घर में रहें!

जब बाहर हवा 60 की स्पीड से चल रही हो और बिजली कड़क रही हो, तो बालकनी में खड़े होकर रील बनाना भारी पड़ सकता है।

  1. बिजली चमके तो अंदर भागें: वज्रपात झारखंड में जानलेवा साबित होता है।
  2. पेड़ से दूरी: पुराने पेड़ों के नीचे गाड़ी पार्क न करें और न ही खुद खड़े हों।
  3. किसानों को टिप: कटी हुई फसल को ढक लें, वरना ओले आपकी मेहनत पर पानी फेर सकते हैं।

झारखंड में फिलहाल ‘आसमानी सिनेमा’ चल रहा है। प्रशासन सतर्क है, आप भी सावधान रहें। अगर बहुत ज़रूरी न हो, तो इस तूफानी मौसम का आनंद घर की खिड़की से ही लें!

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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