जेल की सलाखों के पीछे अचानक क्यों पहुंचे जज? खाना चखते ही डालसा सचिव ने जेल अधीक्षक को लगाई फटकार, जानें पूरा मामला

जेल की सलाखों के पीछे अचानक क्यों पहुंचे जज? खाना चखते ही डालसा सचिव ने जेल अधीक्षक को लगाई फटकार, जानें पूरा मामला

Ranchi | क्या जेल में बंद कैदियों को मिलने वाला खाना इंसानों के रहने लायक है? क्या उन्हें वक्त पर इंसाफ और इलाज मिल पा रहा है? इन सुलगते सवालों के बीच रविवार को रांची की होटवार जेल में उस वक्त हड़कंप मच गया जब न्यायिक पदाधिकारियों की टीम अचानक निरीक्षण करने पहुंच गई। डालसा सचिव ने न सिर्फ बंदियों की फाइलें खंगालीं, बल्कि खुद कैदियों का खाना चखकर व्यवस्था की पोल खोल दी।

झालसा के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद के निर्देश पर बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा, होटवार में जेल अदालत-सह-विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस दौरान 17 बंदियों के केस अदालत के सामने रखे गए, जिनमें से 5 को तत्काल राहत मिली। लेकिन खबर सिर्फ रिहाई की नहीं है, बल्कि जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे उन गंभीर सवालों की है जिन्होंने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है।

जब खुद चखा कैदियों का खाना: स्वाद बिगड़ा तो मिली सख्त हिदायत

निरीक्षण के दौरान सबसे चौंकाने वाला पल तब आया जब डालसा सचिव राकेश रौशन और अन्य न्यायिक अधिकारियों ने कैदियों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच की। रस्म अदायगी के बजाय सचिव ने खुद खाना खाकर देखा।

भोजन चखते ही डालसा सचिव ने पाया कि खाने की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं थी। स्वाद और पोषण में कमी देखकर उन्होंने मौके पर ही जेल सुपरिंटेंडेंट कुमार चंद्रशेखर को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने दो टूक कहा कि बंदियों के भोजन और साफ-सफाई में किसी भी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। त्रुटियों को तत्काल सुधारने का लिखित निर्देश भी जारी किया गया है।

जेल अदालत: 5 बंदियों के लिए ‘संडे’ बना ‘फ्रीडम डे’

जेल अदालत में लंबे समय से लंबित छोटे मामलों पर सुनवाई की गई।

  • तत्काल रिहाई: 2 बंदी आज ही जेल की सलाखों से बाहर आ गए।
  • शर्तिया रिहाई: 3 अन्य बंदियों को अर्थदंड (Fine) जमा करने के बाद रिहा करने का आदेश दिया गया।
  • स्वास्थ्य जांच: विधिक जागरूकता के साथ-साथ जेल में मेडिकल कैंप भी लगाया गया, जहां बंदियों के स्वास्थ्य की बारीकी से जांच की गई।

“कैदी भी इंसान हैं”: इलाज और शिकायतों पर सीधा संवाद

डालसा सचिव ने केवल फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं किए, बल्कि बैरकों में जाकर बंदियों की शिकायतों को व्यक्तिगत रूप से सुना। कई बंदियों ने इलाज में देरी और कानूनी सहायता न मिलने की बात कही। सचिव ने जेल के डॉक्टरों और प्रशासन से सीधे बात कर इन समस्याओं के त्वरित निवारण का आदेश दिया।

होटवार जेल में आयोजित इस शिविर का मुख्य उद्देश्य उन बंदियों को न्याय दिलाना था जो छोटे अपराधों में कानूनी जानकारी या पैसे के अभाव में लंबे समय से बंद हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट अर्चना कुमारी, मनीष कुमार, मयंक मलियाज और रेलवे न्यायिक दण्डाधिकारी विजय कुमार ने भी कैदियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया।

"कैदी भी इंसान हैं": इलाज और शिकायतों पर सीधा संवाद

प्रशासन का अगला कदम?

डालसा की इस रेडनुमा कार्रवाई के बाद जेल प्रशासन बैकफुट पर है। अब देखना यह होगा कि सचिव के निर्देश के बाद क्या कैदियों की थाली में सुधार आता है और क्या जेल के डॉक्टर नियमित रूप से बंदियों की जांच करते हैं। डालसा ने साफ कर दिया है कि वे आने वाले दिनों में औचक निरीक्षण जारी रखेंगे।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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