Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची में डिजिटल क्रांति के साथ जनगणना 2027 की नींव रख दी गई है। उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी के नेतृत्व में जनगणना के प्रथम चरण यानी मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO) के लिए फील्ड ट्रेनर्स का दूसरा बैच पूरी तरह तैयार हो चुका है। 16 अप्रैल 2026 को संपन्न हुए इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण के बाद अब यह साफ हो गया है कि इस बार की जनगणना पहले जैसी नहीं होगी; यह पूरी तरह हाई-टेक, पेपरलेस और पारदर्शी होने जा रही है।
रांची समाहरणालय के बी ब्लॉक में आयोजित इस महत्वपूर्ण सत्र में चान्हो, रातु, ओरमांझी और नामकुम जैसे प्रमुख क्षेत्रों के 35 मास्टर ट्रेनर्स को डिजिटल डेटा संग्रह के गुर सिखाए गए। अब ये ट्रेनर्स धरातल पर उतरकर प्रगणकों (Enumerators) की फौज तैयार करेंगे, जो सीधे आपके दरवाजे पर दस्तक देकर 33 महत्वपूर्ण सवालों के जरिए देश के विकास का नया खाका खींचेंगे।
डिजिटल जनगणना: कागज-कलम का दौर खत्म, ‘CMMS ऐप’ से होगा काम
इस बार की जनगणना में सबसे बड़ा बदलाव इसकी कार्यप्रणाली में है। अब प्रगणक बड़े-बड़े रजिस्टर लेकर नहीं घूमेंगे, बल्कि उनके हाथ में HLO Mobile Application होगा।
- सटीकता का दावा: जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स रविशंकर मिश्रा और संजीव कुमार ने बताया कि CMMS पोर्टल और मोबाइल ऐप के इस्तेमाल से डेटा में हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो जाएगी।
- 33 सवालों का जाल: फील्ड ट्रेनर्स को उन सभी 33 सवालों का गहन प्रशिक्षण दिया गया है, जो मकानों की स्थिति, उपलब्ध सुविधाओं और संसाधनों से जुड़े हैं।
- समयबद्ध प्रक्रिया: डिजिटल माध्यम होने के कारण डेटा रियल-टाइम में सर्वर पर अपडेट होगा, जिससे रिपोर्ट तैयार करने में सालों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
इन इलाकों में शुरू होने वाली है हलचल (द्वितीय बैच का फोकस)
प्रशिक्षण का दूसरा बैच विशेष रूप से रांची के ग्रामीण और अर्द्ध-शहरी क्षेत्रों को कवर कर रहा है। अगर आप नीचे दिए गए क्षेत्रों में रहते हैं, तो जल्द ही आपके इलाके में प्रगणकों का प्रशिक्षण और फिर सर्वे शुरू होने वाला है:
- नगर पंचायत बुण्डू
- चान्हो और रातु
- खलारी और ओरमांझी
- नामकुम, ईटकी और अनगड़ा
प्रशासनिक मुस्तैदी: टॉप अधिकारियों ने खुद संभाली कमान
जनगणना 2027 को लेकर सरकार की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रशिक्षण के दौरान जिले के आला अधिकारी खुद मौजूद रहे। अपर समाहर्ता श्री रामनारायण सिंह और नोडल पदाधिकारी श्री सुदर्शन मुर्मू ने स्पष्ट किया कि आंकड़ों की शुद्धता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री शेषनाथ बैठा ने जोर दिया कि यह डेटा सिर्फ संख्या नहीं है, बल्कि झारखंड के अगले 10 साल के विकास, राशन कार्ड, स्कूल और अस्पतालों की योजना बनाने का आधार है।

आम आदमी पर क्या होगा असर? क्यों जरूरी है यह डेटा?
अक्सर लोग जनगणना को केवल गिनती समझते हैं, लेकिन 2027 की यह कवायद आपके जीवन को सीधे प्रभावित करेगी।
- नीति निर्धारण: आपके क्षेत्र में कितनी बिजली, पानी और पक्के मकानों की जरूरत है, इसका फैसला इन्हीं 33 सवालों से होगा।
- विश्वसनीय आंकड़े: केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं (जैसे पीएम आवास या नल-जल योजना) का लाभ सही लाभार्थियों तक पहुंचाने के लिए यह डेटा ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ माना जाएगा।
अब प्रगणकों की बारी
ट्रेनर्स का प्रशिक्षण संपन्न होने के बाद, अगला चरण सबसे चुनौतीपूर्ण है। अब ये 35 ट्रेनर्स अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में हजारों प्रगणकों और सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षित करेंगे। रांची प्रशासन का लक्ष्य है कि तय समय सीमा के भीतर ‘मकान सूचीकरण’ के कार्य को बिना किसी तकनीकी बाधा के पूरा कर लिया जाए।
डिजिटल जनगणना की यह शुरुआत रांची को डेटा प्रबंधन के मामले में अग्रणी बनाएगी। क्या आप उन 33 सवालों के लिए तैयार हैं जो आपके और आपके क्षेत्र के भविष्य की नई कहानी लिखेंगे? प्रशासन की अपील है कि जब प्रगणक आपके घर आएं, तो सटीक और सही जानकारी दें।
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