रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही सीआईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट दाखिल की है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, इनमें आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के चार लोग शामिल हैं।
मामला ओएमआर उत्तर-पत्रकों में कथित हेराफेरी और रुपये लेकर अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण कराने के आरोपों से जुड़ा है।
चार्जशीट में किनके नाम हैं?
उपलब्ध सामग्री के अनुसार, चार्जशीट में इन पांच आरोपियों के नाम हैं:
- जेपीएससी की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता।
- मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड के मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी।
- एजेंसी के निदेशक रामवीर सिंह।
- एजेंसी से जुड़े कर्मी उस्मान।
- एजेंसी से जुड़े कर्मी एबाद।
इन पर आपराधिक साजिश के तहत परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता और ओएमआर शीट में हेराफेरी करने का आरोप है।
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डिजिटल उपकरण और दस्तावेज जब्त करने का उल्लेख
उपलब्ध विवरण में सीआईडी की जांच के हवाले से कहा गया है कि जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी के दौरान डिजिटल उपकरण, पेन ड्राइव, हार्ड डिस्क और दस्तावेज जब्त किए गए थे। कुछ दस्तावेजों की फोरेंसिक जांच कराए जाने का भी उल्लेख है।
सामग्री के अनुसार, चार्जशीट के साथ दस्तावेजी और डिजिटल साक्ष्य तथा आरोपियों के बयान अदालत में प्रस्तुत किए गए हैं। जांच में कुछ अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट में हेराफेरी मिलने का दावा किया गया है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में संबंधित अभ्यर्थियों के नाम और परीक्षा का स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया है।
रुपये लेकर अयोग्य अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण कराने की बात भी जांच के आरोपों का हिस्सा है। इन आरोपों पर अदालत का कोई निष्कर्ष उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं है।
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जुलाई में दर्ज हुआ था मामला
दिए गए घटनाक्रम के अनुसार, सीआईडी ने 21 जुलाई 2026 को जेपीएससी कार्यालय में छापेमारी की थी। इसके अगले दिन 22 जुलाई को सीआईडी थाने में कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया गया था।
सामग्री में भारतीय न्याय संहिता और झारखंड प्रतियोगिता परीक्षा संबंधी अधिनियम, 2023 के तहत मामला दर्ज होने का उल्लेख है। पांचों आरोपियों को 22 जुलाई को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की जानकारी भी दी गई है।
चार्जशीट दाखिल करने की सटीक तारीख, अदालत का नाम और अगली सुनवाई का विवरण उपलब्ध नहीं है। आरोपियों या उनके अधिवक्ताओं का पक्ष भी दी गई सामग्री में शामिल नहीं है।












