Palamu | झारखंड के पलामू जिले में करमा पूजा की खुशियां अचानक मातम में बदल गईं। चैनपुर थाना क्षेत्र के बोकया गांव में मंगलवार सुबह कोयल नदी में करमा डाली विसर्जन के दौरान पांच लोग गहरे पानी में समा गए।
ग्रामीणों ने आनन-फानन में सभी को पानी से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन डॉक्टरों ने सभी को मृत घोषित कर दिया। इस हृदयविदारक घटना के बाद पूरे इलाके में कोहराम मचा हुआ है।
प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच चुकी है। त्योहार के दिन एक साथ पांच चिताएं उठने की खबर से हर आंख नम है।
सुबह का उल्लास चीखों में बदला: कोयल नदी में क्या हुआ?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा सुबह के वक्त हुआ जब ग्रामीण पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ करमा पूजा की डाली विसर्जित करने कोयल नदी के तट पर पहुंचे थे। पूजा-अर्चना के बाद जैसे ही विसर्जन की प्रक्रिया शुरू हुई, संतुलन बिगड़ने से एक व्यक्ति गहरे पानी की ओर चला गया।
उसे बचाने की कोशिश में बाकी चार लोग भी एक-एक कर नदी के तेज बहाव और गहरे भंवर की चपेट में आ गए।
चीख-पुकार सुनकर पास के खेतों और घाट पर मौजूद अन्य ग्रामीणों ने तुरंत नदी में छलांग लगाई। भारी मशक्कत के बाद पांचों को बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनके फेफड़ों में पानी भर चुका था।
अस्पताल पहुंचते-पहुंचते थम गईं सांसें
ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए सभी को नजदीकी अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद पुष्टि की कि पानी में दम घुटने के कारण रास्ते में ही सभी की मौत हो चुकी थी।
मौत की आधिकारिक पुष्टि होते ही अस्पताल परिसर में परिजनों की चीत्कारों से सन्नाटा टूट गया। स्थानीय थाने की पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
लापरवाही या सुरक्षा इंतजामों की कमी?
त्योहारों के दौरान नदियों और जलाशयों पर सुरक्षा हमेशा से एक संवेदनशील विषय रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करमा विसर्जन के दौरान घाटों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए थे। कोयल नदी के कई हिस्सों में रेत के अवैध खनन या प्राकृतिक कारणों से अचानक गहरे गड्ढे बन जाते हैं, जिनका अंदाजा पानी में उतरने वालों को नहीं लग पाता।
स्थानीय प्रशासन ने अब विसर्जन स्थलों पर विशेष सतर्कता बरतने और लोगों को गहरे पानी में न जाने की हिदायत दी है।
आगे क्या: मुआवजे की मांग और जांच प्रक्रिया
हादसे के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है और कई घरों के चूल्हे ठंडे पड़ गए हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आपदा प्रबंधन विभाग से उचित मुआवजे की मांग की है।
प्रशासनिक स्तर पर अब बाकी विसर्जन स्थलों पर गोताखोरों और पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जा रही है, ताकि आगे ऐसी किसी अनहोनी को रोका जा सके।










