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झारखंड सहायक आचार्य भर्ती: सुप्रीम कोर्ट से संशोधित रिजल्ट रद्द, 2000 की नौकरी पर संकट?

Ranchi | झारखंड के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में सेवा दे रहे 11 हजार से अधिक शिक्षकों की धड़कनें तेज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 26,001 पदों वाली झारखंड सहायक आचार्य भर्ती के संशोधित रिजल्ट को पूरी तरह रद्द कर दिया है।

जस्टिस उज्जवल भुइयां और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को चार सप्ताह में नई मेरिट लिस्ट जारी करने का कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिव से समय सीमा के भीतर अनुपालन रिपोर्ट भी तलब की है।

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इस बड़े अदालती फैसले के बाद वर्तमान में स्कूलों में पढ़ा रहे करीब 2,000 सहायक आचार्यों की नौकरी पर सीधे तौर पर तलवार लटकती दिख रही है।

रांची से ग्राउंड रिपोर्ट: गलियारों में सन्नाटा, स्कूलों में असमंजस

फैसले की खबर रांची पहुंचते ही शिक्षा विभाग और आयोग के दफ्तरों में हलचल मच गई। पिछले साल नियुक्ति पत्र पाकर कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को पढ़ा रहे शिक्षकों में बेचैनी साफ महसूस की जा रही है।

तुलसी महतो और अनिल कुमार यादव द्वारा दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया कि स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर तैयार किया गया परिणाम न्यायसंगत नहीं था। अदालत के अनुसार, यह पूर्व में तय ‘परिमल कुमार’ फैसले के मानकों का उल्लंघन था।

विवाद की मुख्य जड़: आरक्षण का खेल और अनारक्षित श्रेणी में समायोजन

पूरी कानूनी लड़ाई आरक्षित श्रेणी के अभ्यर्थियों को अनारक्षित (General) कोटे में शिफ्ट करने के नियम से जुड़ी है:

  • विभाग का तर्क: शिक्षा विभाग का निर्देश था कि जिस आरक्षित अभ्यर्थी ने JTET में छूट लेकर 60% से कम अंक हासिल किए हैं, उसे अनारक्षित सीट पर समायोजित नहीं किया जा सकता।
  • याचिकाकर्ताओं की दलील: पूर्व न्यायिक नजीरों के मुताबिक मेरिट में ऊपर आने वाले अभ्यर्थियों के समायोजन के नियमों की अनदेखी कर संशोधित सूची बनाई गई।
  • अदालत का रुख: दोनों पक्षों को सुनने के बाद पीठ ने पाया कि JSSC का संशोधित परिणाम कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण था, जिसके कारण इसे निरस्त किया गया।

26,001 पदों का गणित: 16 हजार पद अब भी खाली

श्रेणी / वर्गकुल पदविवरण
कक्षा 1 से 5 (इंटरमीडिएट प्रशिक्षित)11,000 पदपारा शिक्षक: 5,469 | गैर-पारा: 5,531
कक्षा 6 से 8 (स्नातक प्रशिक्षित)15,001 पदभाषा: 4,991 | सामाजिक विज्ञान: 5,002 | विज्ञान व गणित: 5,008
पारा एवं गैर-पारा कोटा विभाजनकुल 26,001पारा कोटा: 12,868 | गैर-पारा कोटा: 13,133

अगस्त 2025 में पहली बार परिणाम आने पर मात्र 9,348 अभ्यर्थियों का चयन हुआ था और 16,000 से अधिक पद खाली रह गए थे। इसके बाद संशोधनों का दौर चला, जिसने अब इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी भंवर में उलझा दिया है।

सिर्फ रिजल्ट नहीं, नॉर्मलाइजेशन और हाईकोर्ट के पेंच भी बरकरार

सहायक आचार्य भर्ती का विवाद सिर्फ इस एक आदेश से शांत नहीं होने वाला:

  • नॉर्मलाइजेशन पर 28 अक्टूबर को सुनवाई: परीक्षा में अपनाए गए नॉर्मलाइजेशन फॉर्मूले के खिलाफ दायर अलग अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 28 अक्टूबर 2026 को होगी।
  • हाईकोर्ट में 43 सीटें सुरक्षित: झारखंड हाईकोर्ट ने भी 17 सितंबर की सुनवाई में एक मामले में 43 सीटें सुरक्षित रखते हुए अगली तारीख 30 अक्टूबर 2026 मुकर्रर की है।
  • सीटेट का पुराना विवाद: पूर्व में हाईकोर्ट के निर्देश पर भरे गए 53,604 आवेदनों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद पहले ही निरस्त किया जा चुका है।

2023 से 2026: विज्ञापन से लेकर फैसला आने तक का सफर

  • 19 जुलाई 2023: 26,001 पदों के लिए बहुप्रतीक्षित विज्ञापन जारी हुआ।
  • वर्ष 2024: राज्यभर में विभिन्न चरणों में लिखित परीक्षाएं संपन्न हुईं।
  • अगस्त-सितंबर 2025: पहला रिजल्ट जारी हुआ, फिर विभागीय निर्देश पर संशोधित परिणाम निकला।
  • 6 नवंबर 2025: राज्य सरकार ने 7,330 चयनितों को भव्य समारोह में नियुक्ति पत्र बांटे।
  • फरवरी-मई 2026: सामाजिक विज्ञान के 1,018 पदों और अतिरिक्त जिला आवंटन की सूचियां जारी हुईं।
  • 17 सितंबर 2026: सुप्रीम कोर्ट ने संशोधित परिणाम को अमान्य ठहराते हुए रद्द कर दिया।

स्कूलों में पठन-पाठन पर क्या होगा असर?

चार सप्ताह में जब नई मेरिट लिस्ट जारी होगी, तो व्यापक उलटफेर तय माना जा रहा है। मेरिट बदलने से कई कार्यरत शिक्षकों का जिला और स्कूल बदलेगा, वहीं करीब 2,000 शिक्षक चयन सूची से पूरी तरह बाहर हो सकते हैं। इससे सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की कमी के कारण शैक्षणिक व्यवस्था चरमराने की पूरी आशंका है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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