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Jharkhand News
यह खबर कहाँ की हैझारखंड

करम पूजा 2026: रांची में शराबबंदी और अखाड़ों की सुरक्षा पर मांग

Ranchi | झारखंड की राजधानी रांची में प्रकृति पर्व करम पूजा महोत्सव की तैयारियों के बीच सरना समाज ने प्रशासनिक महकमे के सामने अपनी मांगों की लंबी फेहरिस्त रख दी है।

केंद्रीय सरना समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री से मुलाकात की और सीधे तौर पर पर्व के दौरान शहर में शराबबंदी से लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित करने की बात कही।

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इस बैठक के बाद प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, क्योंकि समिति ने न केवल नागरिक सुविधाओं बल्कि परंपरा के संरक्षण से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर भी दो-टूक रुख अपनाया है।

उपायुक्त से मिला प्रतिनिधिमंडल, पर्व को लेकर रखीं 10 सूत्री मांगें

केंद्रीय सरना समिति के केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त को सौंपे ज्ञापन में त्योहार को शांतिपूर्ण और भव्य तरीके से संपन्न कराने के लिए जमीनी स्तर पर ठोस व्यवस्था करने की मांग की।

प्रतिनिधिमंडल ने शहर और ग्रामीण इलाकों के तमाम अखरा (अखाड़ों) की स्थिति का हवाला देते हुए बुनियादी ढांचे को तुरंत दुरुस्त करने की बात कही:

  • अखरा में बुनियादी सुविधाएं: प्रत्येक अखाड़े में मिट्टी, मुरूम और स्टोन डस्ट गिराया जाए ताकि बारिश के मौसम में कीचड़ की समस्या न हो। साथ ही पीने का पानी, निर्बाध बिजली, मोबाइल टॉयलेट और मुकम्मल साफ-सफाई की व्यवस्था हो।
  • सुरक्षा व ट्रैफिक डायवर्जन: पूजा के दौरान सभी अखाड़ों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं और भीड़भाड़ वाले मुख्य मार्गों पर बड़े कमर्शियल वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहे।
  • शराबबंदी की सख्त मांग: पूजा के पावन दिन शहर और ग्रामीण इलाकों में शराब की बिक्री पर पूर्ण पाबंदी लगाने की मांग उठाई गई।
  • पारंपरिक सामग्री व परिधान वितरण: पूजा अनुष्ठान के लिए प्रत्येक अखाड़े में अरवा चावल, चना, गुड़ और मिट्टी तेल के साथ ढोल, नगाड़ा और मांदर की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा समाज के लोगों के लिए पारंपरिक लाल पाड़ साड़ी और धोती-गंजी के वितरण की बात रखी गई।
  • शहर का सौंदर्यीकरण: करम महोत्सव के अवसर पर रांची के प्रमुख चौक-चौराहों और मुख्य मार्गों पर आकर्षक विद्युत सज्जा की जाए।

“संस्कृति और रूढ़िवादी परंपरा से कोई समझौता नहीं”

बैठक के बाद पत्रकारों से मुखातिब होते हुए केंद्रीय अध्यक्ष फूलचंद तिर्की ने साफ कहा कि करम पूजा आदिवासियों की पहचान, प्रकृति प्रेम और रूढ़िवादी परंपराओं का जीवंत प्रतीक है।

“करम पूजा महोत्सव हमारी आस्था और संस्कृति की रीढ़ है। यह प्रकृति का पर्व है, जिसे आदिवासी समाज सदियों से अपनी रूढ़िवादी परंपराओं के तहत मनाता आया है। चर्च में करम डाल गाड़ने जैसी गतिविधियों से आदिवासियों की धार्मिक भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचती है। प्रशासन ऐसी गतिविधियों पर तुरंत रोक लगाए ताकि हमारी मूल परंपराएं अक्षुण्ण रहें।”

— फूलचंद तिर्की, केंद्रीय अध्यक्ष, केंद्रीय सरना समिति

इस दौरान प्रतिनिधिमंडल में मुख्य रूप से समिति के संरक्षक भुवनेश्वर लोहरा, महासचिव संजय तिर्की, वरीय उपाध्यक्ष प्रमोद एक्का, विनय उरांव, सोहन कच्छप और पंचम तिर्की सहित कई प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।

प्रशासन का रुख: क्या सभी मांगें होंगी पूरी?

उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना। उपायुक्त ने आश्वस्त किया कि जिला प्रशासन त्योहार को शांतिपूर्ण, सौहार्दपूर्ण और भव्य वातावरण में संपन्न कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

उन्होंने आश्वस्त किया कि नगर निगम, बिजली विभाग और स्थानीय पुलिस-प्रशासन को अखाड़ों में साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने के जरूरी निर्देश जारी किए जाएंगे।

अब देखना यह होगा कि पर्व के दिन ट्रैफिक डायवर्जन, शराबबंदी और संवेदनशील बिंदुओं पर पुलिस बल की तैनाती को लेकर जिला प्रशासन किस तरह की गाइडलाइंस जारी करता है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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