Chennai | चेन्नई में 2013 के आईपीएल सट्टेबाजी विवाद से जुड़ा 100 करोड़ रुपये का मानहानि केस एक बार फिर गरमा गया है। मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व भारतीय कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी जी. संपत कुमार की तीन नई याचिकाओं पर 9 अक्टूबर तक जवाब दाखिल करने का सख्त निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति के. गोविंदराजन थिलाकवाड़ी की एकल पीठ में गुरुवार को हुई सुनवाई के बाद कानूनी हलकों और खेल जगत में हलचल तेज हो गई है। पूर्व आईपीएस अधिकारी ने अपनी याचिकाओं में धोनी के बयान दर्ज करने की प्रक्रिया को लेकर ऐसी शर्तें रखी हैं, जिसने इस पूरे मामले को बेहद संवेदनशील मोड़ पर ला खड़ा किया है।
अदालत ने दोनों पक्षों की प्राथमिक दलीलें सुनने के बाद धोनी की लीगल टीम को अपना आधिकारिक पक्ष रखने के लिए समय सीमा तय कर दी है और मामले की अगली सुनवाई 9 अक्टूबर तक के लिए टाल दी है।
होटल नहीं, कोर्ट में हो गवाही: संपत कुमार की 3 बड़ी शर्तें
चेन्नई से आ रही ग्राउंड रिपोर्ट के मुताबिक, रिटायर्ड आईपीएस जी. संपत कुमार ने कोर्ट में तीन अहम हस्तक्षेप याचिकाएं दाखिल कर गवाही की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। संपत कुमार का कहना है कि धोनी एक बेहद लोकप्रिय और प्रभावशाली शख्सियत हैं, ऐसे में जांच और बयान दर्ज करने का तरीका आम नागरिकों जैसा ही पारदर्शी होना चाहिए।
- होटल में बयान दर्ज करने पर रोक: याचिका में साफ मांग की गई है कि धोनी की गवाही किसी निजी स्थान या लक्जरी स्टार होटल में कतई न कराई जाए। पूरी प्रक्रिया केवल अदालत परिसर या किसी अधिकृत सरकारी इमारत में ही आयोजित हो।
- न्यायिक अधिकारी की निगरानी: कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर जयश्री की मौजूदगी में जब धोनी का बयान दर्ज हो, तब वहां एक सेवारत न्यायिक अधिकारी (Judicial Officer) की सीधी निगरानी अनिवार्य की जाए।
- पूरी सुनवाई की वीडियो रिकॉर्डिंग: गवाहों के बयान और जिरह की पूरी प्रक्रिया की अनिवार्य वीडियोग्राफी कराई जाए, ताकि भविष्य में बयानों से छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश न रहे। साथ ही इस रिकॉर्डिंग की प्रमाणित प्रतियां याचिकाकर्ता और कोर्ट कमिश्नर को सौंपी जाएं।
2013 सट्टेबाजी विवाद से 100 करोड़ के मानहानि तक: क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी विवाद करीब 13 साल पुराना है। 2013 के आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी कांड की जांच के दौरान तमिलनाडु कैडर के तत्कालीन आईपीएस अधिकारी संपत कुमार ने एक निजी टीवी चैनल की डिबेट में आरोप लगाया था कि चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के कप्तान धोनी इस मामले में लिप्त थे।
इन आरोपों से आहत होकर एमएस धोनी ने 2014 में मद्रास हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। धोनी ने संपत कुमार और संबंधित मीडिया हाउस के खिलाफ अपनी साख और प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाते हुए 100 करोड़ रुपये के हर्जाने का दीवानी मानहानि मुकदमा दायर किया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने केस से जुड़े तमाम ऑडियो-वीडियो सीडी दस्तावेजों को लिखित रूप में दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसी कड़ी में कोर्ट ने पूर्व में धोनी को दस्तावेजों के आधिकारिक अनुवाद और टाइपिंग शुल्क के मद में 10 लाख रुपये जमा कराने का भी आदेश दिया था।
कानूनी जानकारों का रुख: अब आगे क्या होगा?
मद्रास हाईकोर्ट बार के वरिष्ठ वकीलों के अनुसार, संपत कुमार की इन नई मांगों ने मामले को कानूनी पेच में उलझा दिया है। अब सारा दारोमदार 9 अक्टूबर को धोनी की लीगल टीम द्वारा दाखिल किए जाने वाले जवाब पर टिका है।
यदि अदालत संपत कुमार की मांग स्वीकार कर लेती है, तो यह पहला मौका होगा जब देश के किसी पूर्व दिग्गज कप्तान को किसी सिविल केस में सीधे कोर्ट परिसर या सरकारी भवन में न्यायिक अधिकारी और वीडियो कैमरों के सामने बैठकर गवाही देनी होगी।











