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जयराम महतो के खिलाफ उतरेंगे पुलिस के 70 हजार जवान

Ranchi | झारखंड में डुमरी विधायक जयराम महतो और पुलिस महकमे के बीच छिड़ा विवाद अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। थाना प्रभारी से अभद्रता और विवादित बयानों को लेकर झारखंड पुलिस एसोसिएशन और पुलिस मेंस एसोसिएशन ने सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है।

एसोसिएशन ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि कानून के सम्मान और पुलिसकर्मियों के स्वाभिमान की है। राज्य के 70 हजार पुलिसकर्मी अब विधायक के खिलाफ सड़क पर उतरने और आंदोलन करने की तैयारी में हैं।

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अगर विधायक ने सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगी, तो पूरे प्रदेश में पुलिस परिवार व्यापक आंदोलन शुरू करेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या हेमंत सरकार में यह तकरार कानून-व्यवस्था के लिए बड़ा संकट बनने जा रही है?

“कूट देंगे, काट देंगे वाली भाषा नहीं चलेगी” — एसोसिएशन का सीधा पलटवार

प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने विधायक जयराम महतो के बयानों पर कड़ा ऐतराज जताया। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा कि सार्वजनिक मंचों से “कूट देंगे, काट देंगे, छांट देंगे” जैसी धमकियां देना एक जन प्रतिनिधि को कतई शोभा नहीं देता।

एसोसिएशन ने याद दिलाया कि संगठन का इतिहास देश के स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ा है और यह तब से अस्तित्व में है जब विधायक जी का जन्म भी नहीं हुआ था। संगठन के संस्थापकों ने अंग्रेजों से लोहा लिया था और गृह मंत्री तक के पदों को सुशोभित किया है।

70 हजार पुलिसकर्मी एकजुट, महापुरुषों के नाम पर नफरत फैलाने का आरोप

एसोसिएशन ने विधायक पर राज्य को बांटने और समाज में विद्वेष फैलाने का गंभीर आरोप लगाया। पुलिस नेताओं ने कहा:

  • क्षेत्रीय और नस्लीय भेदभाव: लाल-हरा, बाहरी-भीतरी और रंग-भेद की राजनीति कर राज्य के सौहार्द को बिगाड़ा जा रहा है।
  • महापुरुषों का अपमान: शहीद निर्मल महतो, बिनोद बिहारी महतो, शिबू सोरेन, बिरसा मुंडा और तिलका मांझी जैसे जननायक पूरे झारखंड के आदर्श हैं, उन्हें किसी एक दायरे में नहीं बांधा जा सकता।
  • जवानों की शहादत: झारखंड को नक्सलमुक्त कराने में राज्य के सैकड़ों पुलिस अफसरों और जवानों ने अपने प्राणों की आहुति दी है। झुमरा पहाड़ या किसी अन्य इलाके के नाम पर पुलिस बल को धमकाया नहीं जा सकता।

“इस प्रदेश में 70 हजार पुलिसकर्मी सेवारत हैं। उन सभी के परिवार, रिश्तेदार और बच्चे इसी झारखंड की मिट्टी में रहते हैं। वर्दी पहनने वाले के भी मां-बाप और परिवार होते हैं। गाली-गलौज और अभद्रता को कभी जायज नहीं ठहराया जा सकता।” — झारखंड पुलिस एसोसिएशन

संविधान वर्सेस जयराम महतो: ‘आर्टिकल 21’ पर भी घेरा

एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि पूरा विवाद एक पीड़ित परिवार द्वारा दर्ज कराई गई धोखाधड़ी और फर्जी हस्ताक्षर की शिकायत से शुरू हुआ था। उस मामले का आरोपी विधायक का करीबी बताया जा रहा है, जिसके बचाव में पुलिस पर दबाव बनाया गया और गाली-गलौज की गई।

एसोसिएशन के प्रवक्ताओं ने विधायक द्वारा दिए गए संविधान के हवाले पर पलटवार करते हुए कहा कि संविधान का आर्टिकल 21 सिर्फ निजता ही नहीं, बल्कि हर नागरिक और ऑन-ड्यूटी पुलिसकर्मी को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार भी देता है। सोशल मीडिया पर समर्थकों द्वारा थानों को मिटाने की धमकियां दिलवाना सीधे तौर पर कानून को चुनौती देना है।

What Next: अब क्या होगा आगे?

पुलिस एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि वे बैकफुट पर नहीं हटेंगे। मामले में एफआईआर और न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ एसोसिएशन ने चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। यदि जयराम महतो ने मर्यादा का पालन करते हुए बिना शर्त माफी नहीं मांगी, तो राज्यव्यापी कार्य बहिष्कार और प्रदर्शन देखने को मिल सकता है, जिससे शासन-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था का बड़ा संकट खड़ा होना तय माना जा रहा है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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