New Delhi: सारंडा वनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को कड़ा और स्पष्ट आदेश जारी किया है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य को निर्देश दिया है कि सारंडा के विशाल वनक्षेत्र को वन्यजीव अभयारण्य और संरक्षण रिजर्व घोषित किया जाए, साथ ही अभयारण्य की सीमा से एक किलोमीटर के दायरे में किसी भी तरह की खनन गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दी समयसीमा, तीन महीने में अधिसूचना जारी करने का आदेश
कोर्ट ने मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ (CJI B R Gavai) और जस्टिस विनोद चंद्रन की पीठ के माध्यम से आदेश दिया कि राज्य सरकार को 126 कंपार्टमेंट्स वाले क्षेत्र (1968 की अधिसूचना के आधार पर) को वन्यजीव अभयारण्य घोषित करना होगा। हालांकि इनमे से 6 कंपार्टमेंट्स को प्रबंधन योजना (MPSM) के तहत छूट दी गई है।
पीठ ने कहा कि यह कदम संविधान के अनुच्छेद 48A और 51A(g) के तहत पर्यावरण संरक्षण के दायित्व के अनुरूप है, और वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की रिपोर्ट भी इसी की पुष्टि करती है।
आदिवासियों और वनवासियों को मिलेगी पूरी सुरक्षा
कोर्ट ने राज्य को यह भी निर्देश दिया कि वह व्यापक स्तर पर यह स्पष्ट करे कि इस निर्णय से आदिवासी समुदाय के व्यक्तिगत और सामुदायिक अधिकारों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
साथ ही, वनाधिकार अधिनियम (Forest Rights Act) के तहत उनके सभी अधिकार यथावत सुरक्षित रहेंगे।
पीठ ने कहा कि सरकार को इस संदेश को बड़े पैमाने पर प्रकाशित करना चाहिए ताकि क्षेत्र के निवासियों में किसी भी तरह की भ्रम या चिंता की स्थिति न बने।
खनन पर कड़ी पाबंदी, 2023 गोवा फाउंडेशन केस का हवाला
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 के गोवा फाउंडेशन मामले के अपने ही पुराने आदेश को दोहराते हुए कहा कि राष्ट्रीय उद्यानों, वन्यजीव अभयारण्यों और उनकी सीमा से 1 किमी के भीतर खनन बिल्कुल अनुमति योग्य नहीं है।
इस फैसले का मकसद सारंडा जैसे पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील और जैव-विविधता से समृद्ध वन क्षेत्रों को दीर्घकालिक संरक्षण प्रदान करना है।
राज्य सरकार की बदलती स्थिति पर नाराज़ हुआ कोर्ट
सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड सरकार की “बार-बार बदलती स्थिति” पर कड़ा रुख अपनाया। पीठ ने कहा कि शुरू में सरकार ने स्वीकार किया था कि 31,468.25 हेक्टेयर क्षेत्र सरंडा गेम सेंचुरी था और वहां खनन नहीं हो रहा था, सिवाय 4.31 हेक्टेयर के।
बाद में सरकार ने अचानक दावा किया कि वह 57,519.41 हेक्टेयर को अभयारण्य घोषित करने पर विचार कर रही है। फिर एक और बदलाव करते हुए इसे 24,941.64 हेक्टेयर तक सीमित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे कोर्ट ने अनुचित और जिम्मेदारी से बचने की कोशिश बताया।
संरक्षण के लिए यह कदम बेहद महत्वपूर्ण
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नेशनल वाइल्डलाइफ एक्शन प्लान (2017–2031) स्पष्ट रूप से संरक्षित क्षेत्रों को बढ़ाने और इनके सीमांकन के महत्व पर जोर देता है।
यह योजना संकटग्रस्त प्रजातियों के इन-सीटू संरक्षण, आवास की रक्षा और तत्काल संरक्षण उपायों की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
सारंडा वन, जिसे एशिया का सबसे बड़ा साल वन माना जाता है, अब अभयारण्य बनने की ओर एक निर्णायक कदम बढ़ा चुका है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से न केवल पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी, बल्कि आदिवासियों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।
अब जिम्मेदारी झारखंड सरकार की है कि वह कोर्ट के निर्देशानुसार समयसीमा के भीतर अधिसूचना जारी करे और सरंडा को संरक्षित करने का कार्य तेजी से आगे बढ़ाए।










