रांची । झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने शनिवार देर रात स्नातक प्रशिक्षित सहायक आचार्य (कक्षा 6 से 8) की नियुक्ति परीक्षा में गणित और विज्ञान विषय का संशोधित परिणाम घोषित कर दिया। इसमें कुल 1,454 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है।
पहले जारी परिणाम में 1,683 अभ्यर्थियों को सफलता मिली थी, लेकिन संशोधन के बाद यह संख्या घटकर 229 कम हो गई। आयोग ने यह बदलाव सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के निर्देश पर किया है।
गैर पारा और पारा शिक्षक श्रेणी से चयनित
संशोधित परिणाम में गैर पारा शिक्षक श्रेणी से 1,176 और पारा शिक्षक श्रेणी से 278 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए हैं। इन सफल अभ्यर्थियों को 2 सितंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। इसके लिए राज्य सरकार ने विशेष कार्यक्रम की तैयारी की है।
केवल उन्हीं उम्मीदवारों की काउंसिलिंग होगी, जिनका नाम संशोधित परिणाम में आया है। जिन अभ्यर्थियों की पहले ही काउंसिलिंग हो चुकी थी, उन्हें दोबारा प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा।
1,454 पद रहे रिक्त
गणित और विज्ञान विषय के लिए कुल 5,002 पद निर्धारित थे। लेकिन संशोधित परिणाम में केवल 1,454 पदों पर ही चयन हो सका। यानी अब भी बड़ी संख्या में सीटें रिक्त रह गई हैं। यह स्थिति भविष्य में और नियुक्तियों की संभावना को जन्म देती है।
दोहरे आरक्षण का विवाद बना कारण
पूर्व में जारी परिणाम में उन अभ्यर्थियों को भी आरक्षण का लाभ दे दिया गया था, जिन्होंने जे-टीईटी (JTET) परीक्षा में कटऑफ मार्क्स के आधार पर आरक्षण प्राप्त किया था। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि एक ही नियुक्ति में दो बार आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता।
दरअसल, जे-टीईटी परीक्षा में सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60% और आरक्षित वर्ग के लिए 52% अंक आवश्यक थे। इस नियम की गलत व्याख्या के कारण पूर्व का परिणाम विवादों में आ गया था।
चरणबद्ध ढंग से जारी होंगे परिणाम
आयोग ने साफ किया है कि सहायक आचार्य की भर्ती प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से पूरी होगी। गणित और विज्ञान के बाद अब भाषा और सामाजिक विज्ञान विषयों का परिणाम घोषित किया जाएगा। इसके बाद इंटर प्रशिक्षित सहायक आचार्य का परिणाम सामने आएगा।
पिछली बार भी आयोग ने यही रणनीति अपनाई थी, जिससे चयन प्रक्रिया सुगम तरीके से आगे बढ़ी थी।
परिणाम में संशोधन की संभावना
JSSC ने यह भी स्पष्ट किया है कि झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित मामलों के आधार पर परिणाम में भविष्य में संशोधन संभव है। ऐसे में सफल अभ्यर्थियों के जिले या कोटि में बदलाव हो सकता है।
इसके अलावा, जिन अभ्यर्थियों का परिणाम अभी न्यायालय के निर्णय पर लंबित है, उनके चयन पर भी असर पड़ सकता है। अपील याचिकाओं के निपटारे के बाद उनके परिणाम को अंतिम रूप दिया जाएगा।
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग का यह कदम न केवल पारदर्शिता की ओर बढ़ता कदम है, बल्कि यह भर्ती प्रक्रिया को कानूनी दायरों में सुनिश्चित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण है। हालांकि, बड़ी संख्या में रिक्त रह गए पद अब सरकार और आयोग के लिए नई चुनौती साबित होंगे।











