Republic Day 2025: दिल्ली के कार्यक्रम में शामिल होगी झारखंड की झांकी

Republic Day Jharkhand Jhanki 2025

Republic Day 2025: दिल्ली में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस के राष्ट्रीय कार्यक्रम में झारखंड की झांकी का चयन किया गया है। यह कार्यक्रम भारतीय संस्कृति, धरोहर और विकास को प्रदर्शित करने के लिए एक शानदार मंच होता है, और इस बार झारखंड की झांकी लगातार तीसरी बार कर्तव्य पथ पर चलेगी। इस झांकी में झारखंड की विरासत, संस्कृति, और राज्य के विकास को दर्शाया जाएगा। झारखंड की झांकी में विभिन्न पहलुओं जैसे पारंपरिक नृत्य, नारीशक्ति के बढ़ते कदम, और राज्य के ऐतिहासिक योगदान को प्रमुखता से दिखाया जाएगा।

इस लेख में हम गणतंत्र दिवस 2025 के इस ऐतिहासिक अवसर पर दिल्ली में होने वाली झारखंड की झांकी के बारे में विस्तार से जानेंगे और कैसे यह राज्य की संस्कृति, परंपरा और विकास को पूरे देश के सामने प्रस्तुत करेगी।

गणतंत्र दिवस 2025 के कार्यक्रम में झारखंड की झांकी का महत्व

गणतंत्र दिवस परेड भारत का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय उत्सव होता है। इस दिन, कर्तव्य पथ (पूर्व में राजपथ) पर देश की विविधता और एकता का प्रतीक बनकर विभिन्न राज्यों की झांकियां प्रदर्शित होती हैं। यह अवसर भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को समर्पित होता है और विभिन्न राज्य अपनी-अपनी विशेषताओं, संस्कृति और उपलब्धियों को दर्शाते हैं।

झारखंड की झांकी, जो लगातार तीसरी बार इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम में शामिल हो रही है, न केवल राज्य के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर को प्रस्तुत करेगी, बल्कि यह राज्य की विकास यात्रा, और नारीशक्ति के बढ़ते कदमों को भी प्रदर्शित करेगी। झारखंड की इस झांकी में स्वर्गीय श्री रतन टाटा को श्रद्धांजलि दी जाएगी, जो राज्य के औद्योगिक और सामाजिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान व्यक्ति थे।

झारखंड की झांकी में क्या खास होगा?

1. स्वर्गीय रतन टाटा को श्रद्धांजलि

गणतंत्र दिवस 2025 की झांकी में एक महत्वपूर्ण पहलू होगा—स्वर्गीय रतन टाटा को श्रद्धांजलि। रतन टाटा ने झारखंड के औद्योगिक विकास में अहम भूमिका निभाई थी, और खासकर टाटा स्टील जैसे संस्थान के माध्यम से राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती दी। इस श्रद्धांजलि के माध्यम से झारखंड के लोग रतन टाटा की महानता को सम्मानित करेंगे।

2. झारखंड की पारंपरिक नृत्य कला

झारखंड की झांकी में राज्य की पारंपरिक नृत्य कला को भी प्रमुखता दी जाएगी। राज्य में विभिन्न जनजातीय समुदायों की नृत्य विधाएं हैं, जैसे कि करमा, सांप लाटा, और झारखंडी लोक नृत्य, जो स्थानीय जीवन और संस्कृति का प्रतीक हैं। इन नृत्यों के माध्यम से झारखंड के आदिवासी संस्कृति और उनकी समृद्ध धरोहर को दर्शाया जाएगा।

3. नारीशक्ति के बढ़ते कदम

झारखंड की झांकी में नारीशक्ति का भी खास स्थान रहेगा। राज्य में नारी को सम्मान देने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं। झारखंड में महिला सशक्तिकरण की दिशा में कई पहलें की गई हैं, जैसे कि महिला शिक्षा में सुधार, महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर, और महिलाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए सरकारी योजनाएं। इन पहलुओं को झांकी के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे पूरे देश को झारखंड में महिलाओं की स्थिति और उनके योगदान के बारे में जागरूकता मिलेगी।

4. झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर

झारखंड की ऐतिहासिक धरोहर भी इस झांकी का अहम हिस्सा होगी। राज्य में प्राचीन मंदिरों, किलों और ऐतिहासिक स्थलों की भरमार है, जैसे दुमका, हजारीबाग, और रांची। इन स्थलों को दर्शाते हुए झारखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

झारखंड की झांकी का चयन प्रक्रिया में सफलता

झांकी का चयन कैसे हुआ?

झारखंड की झांकी को दिल्ली में होने वाले गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में शामिल करने के लिए एक विस्तृत चयन प्रक्रिया से गुजरना पड़ा। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से झांकियों के प्रारूप मांगे थे। इसके बाद एक विशेष समिति ने इन प्रारूपों का मूल्यांकन किया और केवल 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की झांकियों का चयन किया गया। झारखंड की झांकी को इस चयन प्रक्रिया में विशेष रूप से सराहा गया, और इसे 2025 में कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित करने के लिए चुना गया।

झांकी तैयार करने का समय सीमा और रिहर्सल

गणतंत्र दिवस परेड के लिए झांकी को तैयार करने की समय सीमा 19 जनवरी 2025 तक निर्धारित की गई है। इसके बाद, 23 जनवरी 2025 को सभी चयनित राज्यों की झांकियों का रिहर्सल किया जाएगा, जिसमें परिधान, सजावट, और प्रदर्शन के सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। यह रिहर्सल यह सुनिश्चित करेगा कि परेड के दिन झांकी का प्रदर्शन सटीक और शानदार हो।

झारखंड की संस्कृति और धरोहर को प्रदर्शित करना

झारखंड की संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। राज्य के आदिवासी समाज ने अपनी सांस्कृतिक धरोहर को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखा है। झारखंड में प्रमुख रूप से आदिवासी कला, लोक संगीत, नृत्य कला, और हस्तशिल्प की समृद्ध परंपराएं हैं। इन पहलुओं को झांकी में प्रदर्शित किया जाएगा, ताकि पूरी दुनिया को झारखंड की अद्भुत संस्कृति का अनुभव हो सके।

राष्ट्रीय कार्यक्रम में झारखंड की झांकी का महत्व

गणतंत्र दिवस परेड पर झारखंड की झांकी का प्रदर्शन राज्य के लिए गर्व की बात है। यह न केवल राज्य की विरासत और संस्कृति का सम्मान है, बल्कि यह झारखंड के विकास और नारीशक्ति के प्रतीक के रूप में भी देखा जाएगा। झारखंड की झांकी राष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश भेजेगी कि राज्य ने अपने सांस्कृतिक और सामाजिक योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

गणतंत्र दिवस 2025 के अवसर पर दिल्ली में होने वाले राष्ट्रीय कार्यक्रम में झारखंड की झांकी का प्रदर्शन भारतीय संस्कृति, धरोहर और विकास के प्रतीक के रूप में देखा जाएगा। इस झांकी में झारखंड की पारंपरिक कला, नारीशक्ति के बढ़ते कदम, और ऐतिहासिक धरोहर को प्रदर्शित किया जाएगा। यह अवसर न केवल झारखंड के लिए गर्व का है, बल्कि पूरे देश को इस राज्य के अद्वितीय योगदान को समझने का भी एक शानदार मौका है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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