रांची के सदर अस्पताल से यह सीधी ग्राउंड रिपोर्ट है। राज्य के युवाओं और हेमंत सोरेन सरकार के बीच चल रही खींचतान अब एक बेहद नाजुक मोड़ पर पहुंच चुकी है। अपनी जायज मांगों को लेकर पिछले 9 दिनों से अमरण अनशन पर बैठे छात्रों की सेहत लगातार गिर रही है, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
तनावपूर्ण स्थिति के बीच कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने बुधवार को सदर अस्पताल पहुंचकर इलाजरत छात्रों से मुलाकात की। मंत्री ने खुद वार्ड में जाकर हर एक आंदोलनकारी छात्र से बात की और उनके गिरते स्वास्थ्य पर गहरी चिंता जताई। इस घटनाक्रम के बाद झारखंड के सियासी और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
छात्र आंदोलन और सरकार के बीच बनी इस तल्खी को दूर करने के लिए मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार छात्रों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवाद ही सबसे बड़ा हथियार है और सरकार का रुख टकराव का नहीं, बल्कि बातचीत का है।
अस्पताल के वार्ड से सीधी रिपोर्ट: मंत्री ने जाना हाल, छात्रों ने खोला बड़ा राज
अस्पताल के आईसीयू और इमरजेंसी वार्ड के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात है। वार्ड के अंदर का नजारा बेहद भावुक और तनावपूर्ण है—एक तरफ ड्रिप और मॉनिटर से घिरे कमजोर छात्र हैं, तो दूसरी तरफ उनकी मांगों पर हल निकालने का दबाव।

मुलाकात के दौरान अनशनकारी छात्रों ने मंत्री के सामने एक बड़ा खुलासा किया। छात्रों ने बताया कि सरकार के साथ पूर्व में हुई बातचीत के लिए जो ‘डेलीगेशन’ (प्रतिनिधिमंडल) भेजा गया था, उसमें खुद जमीन पर अनशन कर रहे छात्रों को शामिल ही नहीं किया गया था! इसी वजह से आंदोलनकारियों और सरकार के बीच एक बड़ा ‘कम्युनिकेशन गैप’ बन गया, जिससे हल निकलने की बजाय गतिरोध और बढ़ गया।
“टकराव नहीं, संवाद से निकलेगा रास्ता”— मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
छात्रों की समस्याएं और अंदरूनी सच्चाई जानने के बाद मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने स्पष्ट किया कि छात्रों द्वारा साझा किए गए सभी तथ्यों से सीधे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को अवगत कराया जाएगा।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने ग्राउंड पर मीडिया से बात करते हुए कहा:
“युवा और छात्र इस राज्य की असली ताकत हैं। हमारी सरकार किसी भी समस्या को टकराव से नहीं, बल्कि संवेदना और सकारात्मक बातचीत से हल करने में विश्वास रखती है। छात्रों की अधिकांश मांगों पर सरकार पहले ही सहमति जता चुकी है। जो शेष मुद्दे बचे हैं, उन पर भी रास्ता निकाला जाएगा। सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हैं।”
राज्य पर स्थानीय प्रभाव: प्रशासन और झारखंड के युवाओं की टिकी नजरें
इस आंदोलन का सीधा असर अब पूरे झारखंड के प्रशासनिक और शैक्षणिक माहौल पर दिखने लगा है। राजधानी रांची समेत विभिन्न जिलों के छात्र संगठनों में आक्रोश गहरा रहा है। आम जनता में भी नौ दिनों से भूखे-प्यासे बैठे इन युवाओं को लेकर गहरी सहानुभूति देखी जा रही है।
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, अगर समय रहते कोई ठोस लिखित आश्वासन नहीं दिया गया, तो छात्र आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है। मंत्री की इस पहल को सरकार के “डैमेज कंट्रोल” और समाधान की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की के इस दौरे के बाद अब गेंद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के पाले में है। अस्पताल में सामने आए नए तथ्यों के आधार पर जल्द ही सरकार की ओर से एक उच्चस्तरीय वार्ता का न्योता आ सकता है। देखना यह होगा कि क्या सरकार अनशन पर बैठे असली छात्रों को वार्ता की मेज पर लाकर इस 9 दिन पुराने गतिरोध को खत्म कर पाती है या आंदोलन नया मोड़ लेगा।











