रांची में हाई अलर्ट! नगर निगम चुनाव नामांकन से पहले धारा-163 लागू, क्या आपकी गाड़ी और रैली पर भी लगेगी रोक?

रांची में हाई अलर्ट! नगर निगम चुनाव नामांकन से पहले धारा-163 लागू, क्या आपकी गाड़ी और रैली पर भी लगेगी रोक?

रांची : झारखंड की राजधानी रांची में नगरपालिका चुनाव 2026 की आहट के साथ ही प्रशासन ने कमर कस ली है। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री और एसएसपी राकेश रंजन के सख्त निर्देश के बाद सदर अनुमंडल पदाधिकारी ने पूरे समाहरणालय परिसर को ‘नो-गो ज़ोन’ में तब्दील कर दिया है। 29 जनवरी की सुबह से 7 फरवरी की रात तक रांची के ब्लॉक-ए और ब्लॉक-बी के 100 मीटर के दायरे में कड़े प्रतिबंध लागू कर दिए गए हैं। अगर आप भी इस दौरान नामांकन या किसी राजनीतिक गतिविधि की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए—नियमों का उल्लंघन सीधे हवालात की सैर करा सकता है।

नामांकन का बिगुल: 5 लोग, 3 गाड़ियां और प्रशासन की पैनी नज़र

नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही रांची प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी तरह की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं करेगा। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा-163 के तहत लागू इस निषेधाज्ञा का मुख्य उद्देश्य निर्वाचन प्रक्रिया को पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। निर्वाचन कार्यालय के 100 मीटर के दायरे में अब शक्ति प्रदर्शन मुमकिन नहीं होगा।

इन 5 बड़ी पाबंदियों ने बढ़ाई राजनीतिक दलों की धड़कनें

अनुमंडल दण्डाधिकारी कुमार रजत द्वारा जारी आदेश में ये 5 बिंदु सबसे महत्वपूर्ण हैं:

  1. भीड़ पर लगाम: निर्वाची पदाधिकारी के दफ्तर में प्रत्याशी के साथ सिर्फ 5 लोग ही दाखिल हो पाएंगे। समर्थकों का हुजूम अब गेट के बाहर ही रहेगा।
  2. वाहनों की सीमा: काफिले लेकर चलने वाले नेताओं को बड़ा झटका लगा है; केवल 3 वाहनों को ही 100 मीटर के दायरे में आने की अनुमति है।
  3. हथियार और लाठी-डंडा बैन: किसी भी प्रकार के लाइसेंसी शस्त्र, बम, बारूद या पारंपरिक हथियार (तीर-धनुष, भाला) लेकर चलने पर पूर्ण प्रतिबंध है।
  4. नो लाउडस्पीकर: बिना अनुमति के आप लाउडस्पीकर का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। प्रचार का शोर अब कागजी अनुमति के बिना नहीं गूंजेगा।
  5. धरना-प्रदर्शन वर्जित: समाहरणालय के आसपास धरना, प्रदर्शन या जुलूस निकालने पर रोक लगा दी गई है।

ग्राउंड जीरो की स्थिति: रांची समाहरणालय में सुरक्षा घेरा

29 जनवरी सुबह 6 बजे से ही पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है। उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री और एसएसपी राकेश रंजन का संयुक्त आदेश स्पष्ट करता है कि यह व्यवस्था केवल नामांकन के लिए नहीं, बल्कि आदर्श आचार संहिता (MCC) के कड़ाई से पालन के लिए है। प्रशासन को अंदेशा है कि चुनाव के दौरान लोक परिशांति भंग हो सकती है, जिसे देखते हुए यह ‘प्रिवेंटिव एक्शन’ लिया गया है।

आम आदमी और अभ्यर्थियों पर क्या होगा असर?

अगर आप रांची के कचहरी चौक या समाहरणालय के आसपास से गुजरते हैं, तो आपको भारी चेकिंग का सामना करना पड़ सकता है। अभ्यर्थियों के लिए चुनौती यह है कि वे कैसे अपने समर्थकों के जोश को इन कानूनी बंदिशों के बीच बनाए रखते हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि यह आदेश ड्यूटी पर तैनात अधिकारियों और पुलिसकर्मियों पर लागू नहीं होगा, लेकिन आम जनता और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रहेगी।

7 फरवरी की रात 10 बजे तक यह निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी। इसके बाद निर्वाचन प्रतीक (Symbol) आवंटन की प्रक्रिया शुरू होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सख्ती आने वाले मतदान के चरणों के लिए एक कड़ा संदेश है। क्या राजनीतिक दल इन नियमों का पालन करेंगे या पहले ही दिन से टकराव की स्थिति पैदा होगी? यह देखना दिलचस्प होगा।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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