हटिया विधायक नवीन जायसवाल के भवनों के नक्शे पर रांची नगर निगम ने साधी चुप्पी, RTI में जानकारी देने से किया इनकार

हटिया विधायक नवीन जायसवाल के भवनों के नक्शे पर रांची नगर निगम ने साधी चुप्पी, RTI में जानकारी देने से किया इनकार

रांची: झारखंड की राजधानी में रसूखदारों के निर्माण और नगर निगम की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। ताजा मामला हटिया विधानसभा क्षेत्र के कद्दावर विधायक नवीन जायसवाल और उनकी पत्नी रीना जायसवाल से जुड़ी संपत्तियों का है। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में रांची नगर निगम ने सूचना देने से पल्ला झाड़ लिया है।

क्या है पूरा मामला?

एक आरटीआई आवेदक (हिमांशु कुमार) ने रांची नगर निगम से विधायक नवीन जायसवाल और रीना जायसवाल द्वारा अरगोड़ा अंचल के पुंदाग मौजा (खाता संख्या- 230, प्लॉट संख्या- 908A एवं 908B) में बनाए गए भवनों के स्वीकृत नक्शे (Building Plan), जोत विवरण, और निगम द्वारा जारी आदेशों की प्रमाणित प्रति मांगी थी। इसी तरह की जानकारी बूटी मोड़ स्थित ‘चैलिस रियल एस्टेट LLP’ के प्रोजेक्ट्स को लेकर भी मांगी गई थी।

निगम का ‘अजीब’ तर्क: “विधायक से NOC लाओ, तब नक्शा दिखाएंगे”

आमतौर पर सरकारी विभागों को पारदर्शिता बरतनी चाहिए, लेकिन रांची नगर निगम के सहायक नगर निवेशक ने जो जवाब दिया है, वह चौंकाने वाला है। निगम ने आरटीआई के जवाब में लिखा कि:

“भवन प्लान संख्या उपलब्ध कराने पर RTI अधिनियम के Third Party Information नियम के तहत आवेदक (विधायक/कंपनी) से अनापत्ति (NOC) प्राप्त होने पर ही सूचना दी जा सकती है।”

कानूनी सवाल: क्या रसूखदारों के नक्शे सार्वजनिक नहीं होने चाहिए?

जानकारों का मानना है कि एक बार जब कोई सरकारी विभाग किसी निजी भवन का नक्शा पास करता है, तो वह एक ‘सार्वजनिक रिकॉर्ड’ बन जाता है। कानूनन, यह जिम्मेदारी नगर निगम की थी कि वह संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर उनकी राय मांगता, लेकिन निगम ने गेंद आवेदक के पाले में डाल दी कि वह खुद विधायक से एनओसी लेकर आए।

बड़ा सवाल:

  1. क्या रांची नगर निगम रसूखदार जनप्रतिनिधियों के प्रभाव में नियमों की व्याख्या अपने तरीके से कर रहा है?
  2. अगर निर्माण नियमानुसार हुआ है, तो नक्शा और कागजात सार्वजनिक करने में विभाग को क्या आपत्ति है?
  3. क्या ‘थर्ड पार्टी’ का हवाला देकर निगम भ्रष्टाचार या अनियमितताओं को ढंकने की कोशिश कर रहा है?

इस मामले में आवेदक अब प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास जाने की तैयारी में है। अगर वहां से भी राहत नहीं मिली, तो मामला राज्य सूचना आयोग तक पहुंच सकता है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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