पंडित रामदेव पांडेय के अनुसार, 18 अक्टूबर को महाअष्टमी व्रत और रात में महानिशा पूजन है। 19 अक्टूबर की सुबह संधि पूजन होगा। पंडालों में पुष्पांजलि के लिए संबंधित समिति का समयपत्रक देखें।
रांची। राजधानी रांची में दुर्गोत्सव के बीच महाअष्टमी और संधि पूजन के समय को लेकर श्रद्धालुओं में उत्सुकता है। पंडित रामदेव पांडेय के अनुसार, रविवार, 18 अक्टूबर को महाअष्टमी है और सोमवार, 19 अक्टूबर को सुबह 6:53 बजे संधि पूजन होगा। दैनिक जागरण की रांची संबंधी रिपोर्ट में भी उनके हवाले से यही कार्यक्रम प्रकाशित किया गया है।
महाअष्टमी व्रत आज, रात में महानिशा पूजन
पंडित रामदेव पांडेय के बताए कार्यक्रम के अनुसार, 18 अक्टूबर को महाअष्टमी व्रत और रात में महानिशा पूजन निर्धारित है। अगले दिन सुबह संधि पूजन होगा। उनकी दी गई समय-सारणी में 19 अक्टूबर को घरों में हवन तथा 20 अक्टूबर को पंडालों में हवन और नवरात्र के पारण का उल्लेख है।
श्रद्धालुओं के लिए यह समझना जरूरी है कि पुष्पांजलि का समय और संधि पूजन का समय अलग-अलग हो सकता है। संधि पूजा अष्टमी और नवमी के संधिकाल का अनुष्ठान है। इसलिए सुबह 6:53 बजे के उल्लेख को सभी पंडालों की पुष्पांजलि का समय नहीं माना जाना चाहिए।
पुष्पांजलि के लिए समिति की घोषणा देखें
दुर्गाबाड़ी, देशप्रिय क्लब, यूनियन क्लब और अन्य प्रमुख पूजा स्थलों की पुष्पांजलि के निश्चित समय की उपलब्ध स्रोतों से पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में श्रद्धालु संबंधित पूजा समिति के कार्यक्रम पत्रक, सूचना बोर्ड या अधिकृत घोषणा के अनुसार पहुंचें।
रांची रेलवे दुर्गा पूजा समिति की वेबसाइट पर 19 अक्टूबर को महाअष्टमी और संधि पूजा दर्ज है। हालांकि, अनुष्ठानों का अंतिम समय समिति की घोषणा के अनुसार बताया गया है। यह भी स्पष्ट करता है कि एक स्थानीय पंचांग का समय सभी समितियों के कार्यक्रम पर समान रूप से लागू नहीं किया जा सकता।
रांची के पंडालों में मंदिरों की वास्तुकला की झलक
इस वर्ष रांची के कई प्रमुख पंडाल अलग-अलग मंदिरों और धार्मिक प्रसंगों पर आधारित हैं। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बकरी बाजार में बृहदेश्वर मंदिर, जिला स्कूल में बनारस के सर्वेश मंदिर और बंगला स्कूल लेन स्थित ओसीसी क्लब में शिला कैलाश की थीम प्रस्तुत की गई है। मेन रोड स्थित चंद्रशेखर आजाद दुर्गा पूजा समिति का पंडाल द्वारिकाधीश मंदिर की तर्ज पर तैयार किया गया है।
अलग स्रोतों में समय का अंतर
द्रिक पंचांग के हवाले से प्रकाशित अन्य रिपोर्टों में 19 अक्टूबर को संधि पूजा सुबह 10:27 से 11:15 बजे बताई गई है। यह पंडित रामदेव पांडेय के बताए समय से अलग है। इसलिए यहां सुबह 6:53 बजे का समय उनके बयान के अनुसार दिया गया है; श्रद्धालु जिस पंडाल में पूजा करेंगे, वहां के पुरोहित और समिति की घोषित समय-सारणी को प्राथमिकता दें।












