रांची: नौकरी, रहने और खाने की सुविधा का भरोसा लेकर विदेश गईं मोनिका कच्छप को कथित तौर पर बंधक बनाने का मामला सामने आया है। छोटा घाघरा निवासी महिला के परिवार का आरोप है कि उनका पासपोर्ट ले लिया गया और अलग-अलग घरों में काम कराया गया।
परिवार के अनुसार, मोनिका ने भारत लौटने की इच्छा जताई तो उनसे रकम मांगी गई और धमकियां दी गईं। बेटी की सुरक्षित वापसी के लिए परिजनों ने पुलिस, राज्य सरकार और विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, रांची के एयरपोर्ट थाने में 29 सितंबर 2026 को प्राथमिकी दर्ज हुई है। थाना प्रभारी पंकज ने बताया कि विदेश मंत्रालय को पत्र भेजकर मामले की जानकारी दी गई है और मदद मांगी गई है।
बेहतर नौकरी का भरोसा, फिर विदेश का सफर
शिकायत के अनुसार, करीब 37 वर्षीय मोनिका कच्छप विदेश में नौकरी तलाश रही थीं। इसी दौरान ऑनलाइन माध्यम से उनका संपर्क AMD Trend Solution LLC नामक एजेंसी और उसकी कथित एजेंट प्रियंका से हुआ।
परिवार का कहना है कि एजेंट ने नौकरी के साथ भोजन और आवास उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। शिकायत में 22 अप्रैल 2026 को फोनपे से भुगतान करने का भी उल्लेख है। आगे की यात्रा और टिकट की व्यवस्था एजेंसी के स्तर से कराने की बात कही गई थी।
मई के पहले सप्ताह में मोनिका दिल्ली के रास्ते संयुक्त अरब अमीरात पहुंचीं। शिकायत के मुताबिक, 6 मई को शारजाह पहुंचने पर एजेंसी की ओर से आए वाहन चालक ने उनका मूल पासपोर्ट ले लिया।
परिवार का आरोप है कि इसके बाद मोनिका के लिए अपनी इच्छा से घर लौटना मुश्किल हो गया।
अरबी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और कर्ज का दावा
भाषा नहीं जानती थीं, फिर भी हस्ताक्षर कराने का आरोप
शिकायत में कहा गया है कि 7 मई को मोनिका कच्छप को अजमान स्थित एजेंसी कार्यालय ले जाया गया। वहां रितेश और मोहम्मद मेराज अंसारी नामक व्यक्तियों ने कथित तौर पर दबाव डालकर अरबी भाषा के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान लिए।
परिवार के अनुसार, मोनिका अरबी नहीं जानती थीं। ऐसे में दस्तावेजों की शर्तें समझे बिना उनसे हस्ताक्षर कराए जाने का आरोप जांच का अहम हिस्सा है।
व्हाट्सएप बातचीत मिटाने और जेल की धमकी का आरोप
परिजनों ने शिकायत में आरोप लगाया है कि मोनिका का मोबाइल लेकर प्रियंका के साथ हुई व्हाट्सएप बातचीत मिटा दी गई।
इसके बाद वीडियो कॉल पर उन्हें बताया गया कि उन्होंने 2,600 दिरहम का कर्ज लिया है। शिकायत के अनुसार, 25 मई तक रकम नहीं चुकाने पर जेल भेजने की धमकी दी गई। इस कथित कर्ज के आधार और दस्तावेजों की वास्तविकता की पुष्टि जांच में होनी बाकी है।
अलग-अलग घरों में घरेलू काम कराने की शिकायत
परिवार का आरोप है कि मोनिका कच्छप को मोहम्मद मेराज अंसारी के घर करीब एक महीने तक बंधक जैसी स्थिति में रखा गया। इस दौरान उनसे झाड़ू-पोछा, बर्तन और बाथरूम साफ करने का काम कराया गया।
शिकायत के मुताबिक, 22 जून को उन्हें बिना वैध वर्क परमिट के एक अन्य घर में देखभाल के काम के लिए भेजा गया। भाषा समझने में परेशानी के कारण अगले दिन उन्हें कार्यालय वापस छोड़ दिया गया।
जुलाई में भी अलग-अलग घरों में काम के लिए भेजे जाने का आरोप है। परिवार का कहना है कि भाषा की दिक्कत के बीच मोनिका को मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
ये परिवार की शिकायत में लगाए गए आरोप हैं। उपलब्ध सामग्री में संबंधित एजेंसी और नामजद व्यक्तियों की प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।
घर लौटने की इच्छा पर रकम मांगने का आरोप
शिकायत के अनुसार, मोनिका कच्छप ने अपनी मां की बीमारी का हवाला देकर भारत लौटने की इच्छा जताई थी।
परिवार का आरोप है कि इस पर मोहम्मद मेराज अंसारी ने गाली-गलौज की और कंपनी के खाते में बड़ी रकम जमा किए बिना वापस नहीं जाने देने की बात कही। परिजनों के मुताबिक, उन्हें वहां फंसे रहने और काम नहीं मिलने की धमकी भी दी गई।
छोटा घाघरा के इस परिवार के लिए अब सबसे बड़ा सवाल नौकरी या कमाई का नहीं, बल्कि बेटी की सुरक्षा और घर वापसी का है।
विदेश मंत्रालय को पत्र, अब आगे क्या?
एयरपोर्ट थाना प्रभारी पंकज के अनुसार, पुलिस ने पत्र के माध्यम से विदेश मंत्रालय को अवगत कराया है और दिल्ली से मदद मांगी है।
शिकायत में प्रियंका, रितेश, मोहम्मद मेराज अंसारी और एजेंसी के अन्य प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। कथित धोखाधड़ी, बंधक बनाने, जबरन श्रम कराने और रकम मांगने जैसे आरोपों की पुलिस जांच कर रही है।
अब अहम सवाल यह है कि मोनिका कच्छप कहां और किन परिस्थितियों में हैं, उनसे सुरक्षित संपर्क कैसे होगा और भारत लौटने की व्यवस्था कब बनेगी। उपलब्ध जानकारी में उनकी सुरक्षित वापसी की तारीख स्पष्ट नहीं है। परिवार की अपील पर अगली ठोस कार्रवाई और विदेश मंत्रालय से मिलने वाली सहायता पर नजर रहेगी।













