झारखंड में JPSC-JSSC भर्ती घोटाला और सीटों की खरीद-बिक्री के आरोपों को लेकर दिल्ली के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। हजारीबाग से भाजपा सांसद मनीष जायसवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस पूरे मामले की CBI जांच कराने की पुरजोर मांग की है।
इस मुलाकात के दौरान सांसद ने साफ किया कि राज्य पुलिस की CID जांच पर अभ्यर्थियों को बिल्कुल भरोसा नहीं है। 5 लाख से अधिक युवाओं के भविष्य से जुड़ा यह मुद्दा अब सीधे केंद्र सरकार की चौखट पर पहुंच चुका है।
गृह मंत्री के समक्ष हजारीबाग, रामगढ़ समेत पूरे झारखंड में पैर पसारते अवैध नशा कारोबार, संगठित अपराध और खनिज संपदा की कथित लूट का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया।
5 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर, CID जांच पर उठे सवाल
झारखंड के रांची, हजारीबाग और धनबाद के कोचिंग हब में इस समय भारी आक्रोश का माहौल है। JPSC-JSSC भर्ती घोटाला के आरोपों के बाद सड़कों पर उतरे अभ्यर्थियों का कहना है कि पारदर्शी परीक्षा के बिना राज्य के युवाओं का भविष्य सुरक्षित नहीं है।
ग्राउंड पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों से बातचीत में साफ झलकता है कि राज्य सरकार द्वारा गठित CID जांच टीम से युवाओं का भरोसा उठ चुका है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सीटों की सौदेबाजी के पीछे बड़े नेक्सस का हाथ है, जिसकी परतें केवल एक केंद्रीय एजेंसी ही खोल सकती है।
अमित शाह के सामने सांसद ने रखे ये 3 सबसे बड़े मुद्दे
- JPSC-JSSC घोटाला व CBI जांच: सांसद मनीष जायसवाल ने कहा, “यह सिर्फ एक परीक्षा में अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि झारखंड के 5 लाख से अधिक युवाओं के विश्वास पर सीधा प्रहार है। जब तक पूरे मामले की CBI जांच नहीं होगी, तब तक दोषियों की सही जवाबदेही तय नहीं हो सकती।”
- संगठित अपराध और खनिज लूट: राज्य में बेलगाम होते संगठित आपराधिक गिरोहों और कोयला-बालू जैसे प्राकृतिक संसाधनों की कथित लूट पर केंद्रीय गृह मंत्रालय के हस्तक्षेप की मांग की गई।
- अवैध नशे का नेटवर्क: हजारीबाग और रामगढ़ जिले सहित आसपास के इलाकों में फैलते ड्रग्स और अवैध नशे के कारोबार पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय एजेंसियों की मदद का प्रस्ताव रखा गया।
क्या होगा अगला कदम? (What Next)
दिल्ली में हुई इस उच्चस्तरीय बैठक के बाद अब गेंद केंद्र सरकार के पाले में है। यदि केंद्रीय गृह मंत्रालय झारखंड में भर्ती धांधली या संगठित अपराध के मामलों का संज्ञान लेकर किसी केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपता है, तो राज्य की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में बड़ा भूचाल आना तय है। फिलहाल, झारखंड के लाखों युवाओं की नजरें दिल्ली से आने वाले किसी बड़े फैसले पर टिकी हैं।











