Ranchi | झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ कर अभ्यर्थियों को सफल कराने के आरोप सामने आए हैं। उपलब्ध विवरण में सीआईडी जांच के हवाले से दावा किया गया है कि कुछ अभ्यर्थियों की परीक्षा कक्ष में दर्ज गतिविधियां और उनकी मूल ओएमआर शीट में भरे उत्तर आपस में मेल नहीं खाते।
एक मामले में परीक्षा के दौरान ओएमआर खाली छोड़ने वाले अभ्यर्थी को 292 अंक मिलने का आरोप है। दूसरे मामले में कार्बन कॉपी पर दर्ज 31 उत्तरों के मुकाबले मूल ओएमआर में 147 उत्तर भरे मिलने का दावा किया गया है।
इन दावों से संबंधित मूल सीआईडी दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया उपलब्ध सामग्री में शामिल नहीं हैं। नीचे दिए गए विवरण उसी सामग्री में बताए गए जांच निष्कर्षों पर आधारित हैं।
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चार मामले: परीक्षा कक्ष की गतिविधियों और ओएमआर में क्या अंतर बताया गया?
1. अरविंद कुमार: खाली ओएमआर के बावजूद 292 अंक मिलने का आरोप
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, 14वीं जेपीएससी पीटी में सफल घोषित अरविंद कुमार परीक्षा के दौरान सीसीटीवी फुटेज में सोते और जम्हाई लेते दिखाई दिए। जांच के हवाले से दावा किया गया है कि उन्होंने ओएमआर शीट में कोई गोला नहीं भरा, फिर भी उन्हें 292 अंक मिले।
सामग्री में यह भी बताया गया है कि पूछताछ के दौरान अरविंद ने ओएमआर खाली छोड़ने और बाद में पकड़े जाने के डर से उसकी कार्बन कॉपी जला देने की बात स्वीकार की। इस कथित स्वीकारोक्ति का मूल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
2. ओम प्रकाश राणा: दोनों पेपरों में 91 और 92 सही उत्तर मिलने का दावा
ओम प्रकाश राणा के मामले में भी परीक्षा अवधि के दौरान सोते और जम्हाई लेते दिखाई देने का उल्लेख है। इसके विपरीत, उपलब्ध विवरण के अनुसार, उनकी दोनों प्रश्न-पत्रों की ओएमआर शीट में क्रमशः 91 और 92 उत्तर सही पाए गए।
यह अंतर जांच में संदिग्ध गतिविधि के तौर पर बताए जाने का दावा है। संबंधित फुटेज और ओएमआर की मूल जांच रिपोर्ट से इसकी पुष्टि बाकी है।
3. वंदना कुमारी: हल किए सवालों से अधिक उत्तर मूल ओएमआर में मिलने का आरोप
वंदना कुमारी के बारे में उपलब्ध सामग्री में बताया गया है कि सीसीटीवी विश्लेषण के अनुसार उन्होंने दोनों प्रश्न-पत्रों में क्रमशः 49 और 30 सवाल हल किए थे। हालांकि, मूल ओएमआर शीट में क्रमशः 98 और 92 सवालों के उत्तर भरे मिलने का दावा किया गया है।
यहां मूल ओएमआर में दर्ज सवालों की संख्या बताई गई है; उपलब्ध विवरण इन्हें सभी सही उत्तर नहीं बताता।
4. रक्षक सिंह: कार्बन कॉपी में 31, मूल ओएमआर में 147 उत्तर
एफआरओ परीक्षा में सफल बताए गए रक्षक सिंह की कार्बन कॉपी में 31 उत्तर दर्ज होने, जबकि मूल ओएमआर शीट में 147 उत्तर भरे होने का आरोप है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, उनके मोबाइल से मिले एक वीडियो में परीक्षा की मूल ओएमआर शीट स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर निजी एजेंसी टीडीपीएल के कर्मचारियों के पास दिखाई दी। वीडियो की तारीख, परिस्थितियों और उसकी प्रामाणिकता से जुड़े मूल रिकॉर्ड सामग्री में नहीं दिए गए हैं।
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अभय तिवारी और परिवार के सदस्यों को लेकर भी आरोप
जांच के हवाले से उपलब्ध सामग्री में अभय तिवारी के एसीएफ, एफआरओ और खाद्य सुरक्षा अधिकारी—तीनों परीक्षाओं में सफल घोषित होने का उल्लेख है। आरोप है कि उसने अपनी पत्नी, भाई और साले को भी 14वीं जेपीएससी पीटी में सफल कराने के लिए कथित सेटिंग की।
सामग्री में एजेंट बताए गए बुद्धेश्वर भगत के जरिए सेटिंग कराने वाले 11 अभ्यर्थियों के 14वीं पीटी में सफल होने का भी दावा है।
इसके अतिरिक्त, बुद्धेश्वर भगत के लैपटॉप से परिणाम घोषित होने से दो महीने पहले की 24 अभ्यर्थियों की सूची मिलने का उल्लेख है। विवरण के अनुसार, उस समय ओएमआर शीट एजेंसी टीडीपीएल के पास थीं। हालांकि, सूची में दर्ज नामों और अंतिम परिणाम के मिलान का विस्तृत रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया है।
स्कैनिंग केंद्रों पर सीसीटीवी निष्क्रिय रखने का आरोप
उपलब्ध सामग्री में सीआईडी के हवाले से आरोप लगाया गया है कि ओएमआर शीट और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे जानबूझकर निष्क्रिय रखे गए थे। जांच से जुड़े विवरण में इसे कथित छेड़छाड़ के डिजिटल साक्ष्य बनने से रोकने की कोशिश बताया गया है।
इस आरोप का संबंध परीक्षा केंद्रों के कैमरों से अलग, स्कैनिंग वाले स्थानों की निगरानी व्यवस्था से है। परीक्षा केंद्रों के फुटेज के आधार पर ही अभ्यर्थियों की गतिविधियों और मूल ओएमआर के बीच अंतर बताए गए हैं।
उपलब्ध सामग्री इन घटनाओं को सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताती है। हालांकि, संबंधित अभ्यर्थियों, आयोग और निजी एजेंसी का पक्ष तथा मामले की अदालती स्थिति इसमें उपलब्ध नहीं है।














