ताज़ा खबरें
लोड हो रहा है... ताज़ा खबरों के लिए बने रहें...
विज्ञापन
LIVE

LIVE UPDATES लाइव कवरेज

1 सक्रिय
Ranchi
यह खबर कहाँ की हैरांची, झारखंड

झारखंड SIR: दस्तावेज नहीं हैं तो वोटर कैसे बनेंगे? क्‍या है ट्रांसजेंजर्स और सेक्‍स वर्करों के लिए व्‍यवस्‍था?

अनाथालयों, वृद्धाश्रमों और आश्रय गृहों में रहने वाले पात्र नागरिकों को मतदाता सूची से जोड़ने के लिए विशेष सहायता देने के निर्देश जारी हुए हैं। 10 अक्टूबर को सभी मतदान केंद्रों पर मेगा हेल्प डेस्क कैंप लगेंगे। जानिए किसके लिए क्या व्यवस्था है और सत्यापन कैसे होगा।

रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR-2026 के दौरान उन नागरिकों के लिए विशेष व्यवस्था की जा रही है, जिन्हें पहचान, जन्मतिथि या निवास के दस्तावेज जुटाने में परेशानी होती है। इनमें अनाथ व्यक्ति, वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग, ट्रांसजेंडर नागरिक, सेक्स वर्कर्स और आश्रय गृहों में रहने वाली निराश्रित महिलाएं शामिल हैं।

Advertisement

उपलब्ध समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने जिला निर्वाचन पदाधिकारियों को ऐसे पात्र नागरिकों की पहचान और सत्यापन में सहायता करने के निर्देश दिए हैं। उद्देश्य है कि दस्तावेजों की कठिनाई के कारण कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रह जाए।

हालांकि, वैकल्पिक दस्तावेज स्वीकार करने का अर्थ अपने आप नाम जुड़ जाना नहीं है। संबंधित व्यक्ति की पात्रता और उपलब्ध प्रमाणों की निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जांच होगी।

क्या है यह व्यवस्था और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

मतदाता सूची में नाम जुड़वाने या सत्यापन कराने के दौरान दस्तावेजों की जरूरत पड़ती है। लेकिन संस्थानों में रहने वाले या सामाजिक रूप से वंचित कुछ नागरिकों के पास सामान्य पहचान और निवास संबंधी कागजात उपलब्ध नहीं होते।

मसलन, अनाथालय में पले व्यक्ति के माता-पिता का विवरण उपलब्ध नहीं हो सकता। वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग के पास वर्तमान पते का प्रमाण नहीं हो सकता। ऐसी परिस्थितियों के लिए संस्थागत प्रमाणपत्र, निर्धारित घोषणा पत्र और संबंधित अधिकारियों के सत्यापन की व्यवस्था बताई गई है।

हिन्‍दुस्‍तान के रिपोर्ट के अनुसार निर्देशों से संबंधित अन्य प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सुनवाई में भारतीय नागरिकता, एक अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष की आयु पूरी होना और संबंधित मतदान केंद्र क्षेत्र में सामान्य निवास की जांच की जाएगी।

इसे भी पढ़ें: JMM ‘Mission SIR’: ‘एक भी वोट कटना नहीं चाहिए’, SIR को लेकर कल्पना सोरेन का हुंकार

Advertisement

अनाथालय में रहने वालों के लिए क्या प्रावधान है?

संलग्न समाचार के अनुसार, अनाथालय में पले-बढ़े व्यक्तियों के मामले में माता-पिता के विवरण वाले कॉलम में अनाथालय का नाम दर्ज करने की व्यवस्था बताई गई है।

जन्म या निवास प्रमाण उपलब्ध नहीं होने पर एनजीओ अथवा अनाथालय का प्रमाणपत्र स्वीकार करने का प्रावधान बताया गया है। इस पर सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा का प्रतिहस्ताक्षर होगा और उसके आधार पर निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी यानी ERO निर्णय लेंगे।

कानूनी रूप से गोद लिए गए व्यक्ति के मामले में गोद लेने वाले माता-पिता का नाम दर्ज होगा। रिपोर्ट में कुछ अन्य परिस्थितियों के लिए माता-पिता के नाम की जगह ‘अज्ञात’ और संबंध में ‘अदर्स’ दर्ज करने का भी उल्लेख है।

वृद्धाश्रम के बुजुर्ग किस पते पर मतदाता बनेंगे?

वृद्धाश्रम में रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों के लिए भी प्रक्रिया आसान करने की बात कही गई है।

संलग्न रिपोर्ट के मुताबिक, पहचान या निवास संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर वृद्धाश्रम का प्रमाणपत्र इस्तेमाल किया जा सकेगा। इस पर जिला समाज कल्याण अधिकारी का प्रतिहस्ताक्षर आवश्यक बताया गया है।

फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र लेने और वृद्धाश्रम के पते को वर्तमान निवास के रूप में दर्ज करने की व्यवस्था का उल्लेख है। यानी पात्र बुजुर्ग जिस वृद्धाश्रम में सामान्य रूप से रह रहे हैं, उसी क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किए जा सकते हैं।

निराश्रित महिलाओं को कैसे मिलेगी सहायता?

आश्रय गृहों में रहने वाली निराश्रित और असहाय महिलाओं को भी मतदाता सूची से जोड़ने के निर्देश बताए गए हैं।

सामान्य दस्तावेज नहीं होने पर आश्रय गृह के संचालक का प्रमाणपत्र, एनजीओ का प्रमाणपत्र और जिला समाज कल्याण अधिकारी का सत्यापन इस्तेमाल करने की व्यवस्था है।

महिलाओं से स्वघोषणा पत्र भी लिया जाएगा। इसमें भारतीय नागरिकता और आश्रय गृह में रहने की जानकारी दर्ज होगी। इसके बाद संबंधित अधिकारी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करेंगे।

सेक्स वर्कर्स की पहचान क्या सार्वजनिक होगी?

संलग्न समाचार के अनुसार, पात्र सेक्स वर्कर्स के पंजीकरण और सत्यापन में गोपनीयता बनाए रखने पर जोर दिया गया है।

निवास या जन्मतिथि के सामान्य दस्तावेज नहीं होने की स्थिति में मान्यता प्राप्त एनजीओ की सूची और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर ERO कार्रवाई करेंगे। जिला समाज कल्याण अधिकारी तथा झारखंड स्टेट एड्स कंट्रोल सोसाइटी भी सहायता करेंगे।

एक अन्य प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, सामान्य निवास का दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO संबंधित पते पर जाकर निवास का भौतिक सत्यापन कर सकते हैं।

ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए क्या व्यवस्था है?

अखबार की रिपोर्ट में ट्रांसजेंडर नागरिकों के लिए विशेष प्रक्रिया का उल्लेख है, लेकिन उसका विस्तृत हिस्सा अगले पृष्ठ पर है, जो उपलब्ध नहीं है।

अन्य प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सामान्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने पर ट्रांसजेंडर पर्सन्स नियम, 2020 के तहत जारी प्रमाणपत्र या पहचानपत्र और निर्धारित घोषणा पत्र के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। जिला समाज कल्याण अधिकारी दस्तावेज जुटाने में सहायता करेंगे।

10 अक्टूबर के कैंप में किसे मदद मिलेगी?

10 अक्टूबर 2026 को राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर मेगा हेल्प डेस्क कैंप आयोजित करने के निर्देश हैं।

इन कैंपों में विशेष रूप से उन नागरिकों को दस्तावेज और सत्यापन संबंधी मार्गदर्शन दिया जाएगा, जिन्हें ‘नो मैपिंग’ या विवरण में विसंगतियों के कारण नोटिस मिला है और जिन्होंने अभी तक जरूरी दस्तावेज जमा नहीं किए हैं। लंबित कार्यों को पूरा कराने में भी सहायता दी जाएगी।

संलग्न रिपोर्ट में नए नामांकन के लिए फॉर्म-6 और मतदाता विवरण में सुधार के लिए फॉर्म-8 का उल्लेख है।

ध्यान रहे: 10 अक्टूबर कैंप की तारीख है। इसे आवेदन की नई अंतिम तारीख या समयसीमा में विस्तार मानने की जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं है।

नागरिकों को अभी क्या करना चाहिए?

जिन लोगों को SIR का नोटिस मिला है या दस्तावेजों के कारण सत्यापन अटका है, वे अपने मतदान केंद्र के BLO से संपर्क कर सकते हैं। कैंप में जाते समय उपलब्ध पहचान, निवास संबंधी कागजात और मिला हुआ नोटिस साथ रखें।

अनाथालय, वृद्धाश्रम या आश्रय गृह में रहने वाले व्यक्ति संबंधित संस्था से प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूछ सकते हैं। जिस दस्तावेज का अभाव है, उसके लिए स्वीकार्य विकल्प संबंधित निर्वाचन अधिकारी से स्पष्ट कराना जरूरी है।

इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य दस्तावेज जुटाने में सहायता देना है। मतदाता सूची में नाम शामिल करने का निर्णय पात्रता और सत्यापन के आधार पर संबंधित अधिकारी करेंगे।

Related Stories & Ads

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now