रांची: भारतीय डाक विभाग के झारखंड परिमंडल ने ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग, बचत और बीमा योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए 13 अक्टूबर 2026 को रांची के सिदरोल पंचायत अंतर्गत रामपुर बाजार में डाक चौपाल का आयोजन किया। इस दौरान मुख्य डाक महाध्यक्ष संजीव रंजन और निदेशक डाक सेवाएं रामबिलास चौधरी ने डाक विभाग की सेवाओं के प्रचार-प्रसार के लिए डिस्प्ले वैन का शुभारंभ किया।
डाक विभाग के मुताबिक, इस अभियान का उद्देश्य ग्रामीणों को डाकघर की विभिन्न योजनाओं से जोड़ना और वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच आसान बनाना है। कार्यक्रम में ग्रामीण डाक सेवकों के साथ स्थानीय लोगों ने भी भाग लिया।
हर घर तक बचत और बीमा योजनाएं पहुंचाने का लक्ष्य
डाक चौपाल में मुख्य डाक महाध्यक्ष संजीव रंजन ने ग्रामीण डाक सेवकों को प्रत्येक घर तक पहुंचकर लोगों को वित्तीय योजनाओं की जानकारी देने पर जोर दिया।
उन्होंने बताया कि डाकघर के माध्यम से बचत खाता, आवर्ती जमा यानी आरडी, सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF), सुकन्या समृद्धि योजना और ग्रामीण डाक जीवन बीमा जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
इन योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण परिवारों में बचत की आदत को प्रोत्साहित करने और आर्थिक सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
डाक विभाग ने ग्रामीण डाक सेवकों को नियमित डाक वितरण और मोबाइल ऐप आधारित सेवाओं के इस्तेमाल पर भी ध्यान देने को कहा है।

15 साल से डाकघर की योजनाओं से जुड़े हैं दीपक तिगा
कार्यक्रम में पहुंचे ग्रामीण दीपक तिगा ने Local Khabar से बातचीत में बताया कि वे करीब 15 वर्षों से डाकघर की योजनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
उनके मुताबिक, परिवार के सदस्यों के नाम आरडी खाते हैं। उन्होंने डाक जीवन बीमा भी कराया है और बच्ची के लिए सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता खुलवाया है।
दीपक तिगा का अनुभव बताता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघर की बचत योजनाओं का इस्तेमाल लंबे समय से किया जा रहा है।
महिला समितियों और आंगनबाड़ी के जरिए ग्रामीणों तक पहुंच
उलातू की ब्रांच पोस्ट मास्टर मीरा शर्मा ने बताया कि ग्रामीण डाक सेवक घर-घर जाकर लोगों को डाक विभाग की योजनाओं की जानकारी देते हैं।
इसके लिए महिला समितियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और पंचायत प्रतिनिधियों से भी संपर्क किया जाता है।
मीरा शर्मा के मुताबिक, डाकघर के कई काम पहले मैनुअल तरीके से किए जाते थे, लेकिन अब कंप्यूटर आधारित व्यवस्था के माध्यम से काम हो रहा है।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण डाक सेवक लोगों को योजनाओं से जोड़ने के लिए नियमित रूप से जागरूकता गतिविधियां आयोजित करते हैं।
बिना स्मार्टफोन और इंटरनेट ग्रामीणों को कैसे मिलेगी डिजिटल बैंकिंग?
डाक चौपाल के दौरान Local Khabar ने मुख्य डाक महाध्यक्ष संजीव रंजन से ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल बैंकिंग की व्यावहारिक चुनौतियों पर सवाल किया।
सवाल था कि जिन सुदूरवर्ती गांवों में इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर है और कई लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, वहां डिजिटल सेवाओं का लाभ कैसे पहुंचेगा?
इसके जवाब में संजीव रंजन ने बताया कि डाक विभाग की नई APT 2.0 तकनीक में किसी एक नेटवर्क पर निर्भरता समाप्त करने की व्यवस्था की गई है।
उनके मुताबिक, अब संबंधित क्षेत्र में उपलब्ध नेटवर्क सेवा प्रदाता के नेटवर्क का उपयोग करके डाक सेवाएं संचालित की जा सकती हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि ग्रामीण डाक सेवकों को लोगों की डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल में मदद करने के लिए प्रशिक्षण दिया गया है।
इसके अलावा आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AEPS) के माध्यम से घर बैठे बैंकिंग लेनदेन की सुविधा उपलब्ध कराने की भी जानकारी दी गई।
हालांकि, कमजोर या अनुपलब्ध इंटरनेट नेटवर्क वाले इलाकों में इन सेवाओं का संचालन कितना प्रभावी होगा, यह स्थानीय कनेक्टिविटी और व्यवस्था पर निर्भर करेगा।
झारखंड के चुनिंदा मार्गों पर जाएगी डिस्प्ले वैन
डाक विभाग ने कार्यक्रम के दौरान एक डिस्प्ले वैन को रवाना किया।
मुख्य डाक महाध्यक्ष के अनुसार, यह वैन झारखंड के चुनिंदा मार्गों पर जाकर लोगों को डाक विभाग की सेवाओं, बचत योजनाओं और बीमा सुविधाओं के बारे में जागरूक करेगी।
निदेशक डाक सेवाएं रामबिलास चौधरी ने कहा कि यह पहल डाक विभाग की योजनाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने में मददगार होगी।
डाक विभाग की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कार्यक्रम का संचालन डाक निरीक्षक चंदन कुमार ने किया। इस दौरान वरिष्ठ डाकघर अधीक्षक बिनोद कुमार पंडित सहित विभाग के अन्य अधिकारी और ग्रामीण डाक सेवक उपस्थित रहे।
ग्रामीण क्षेत्रों में डाकघर की सेवाओं का विस्तार वित्तीय समावेशन की दिशा में एक पहल है। हालांकि, इसका वास्तविक लाभ इस बात से तय होगा कि योजनाओं की जानकारी के साथ-साथ बैंकिंग और अन्य सेवाएं जरूरतमंद लोगों तक कितनी आसानी से पहुंचती हैं।












