झारखंड का नया DGP कौन? 1 जनवरी से पहले बड़ा फैसला

झारखंड का नया DGP कौन? 1 जनवरी से पहले बड़ा फैसला

Ranchi। झारखंड को नया पुलिस महानिदेशक (DGP) मिलने में अब सिर्फ पांच दिन शेष हैं, लेकिन राज्य को कौन संभालेगा पुलिस की कमान, इसे लेकर स्थिति अब भी साफ नहीं है। वर्तमान प्रभारी DGP तदाशा मिश्रा 31 दिसंबर को सेवानिवृत्त हो जाएंगी। इसके बाद राज्य सरकार को नए DGP की नियुक्ति करनी है, लेकिन नाम को लेकर सस्पेंस बना हुआ है।

झारखंड पुलिस नेतृत्व में बदलाव की घड़ी नजदीक है। एक जनवरी से राज्य को नया DGP मिलना तय है, लेकिन अभी तक सरकार की ओर से किसी नाम पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।
वरिष्ठता सूची के अनुसार फिलहाल झारखंड कैडर में डीजी रैंक के केवल तीन IPS अधिकारी ही उपलब्ध हैं।

इनमें 1990 बैच के अनिल पाल्टा, 1992 बैच के प्रशांत सिंह और 1993 बैच के एमएस भाटिया शामिल हैं।
तीनों ही अधिकारी वर्तमान में अलग-अलग महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

वरिष्ठ IPS अधिकारियों की वर्तमान जिम्मेदारियां

  • अनिल पाल्टा वर्तमान में डीजी रेल के पद पर कार्यरत हैं।
  • प्रशांत सिंह डीजी वायरलेस हैं और साथ ही डीजी मुख्यालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।
  • एमएस भाटिया गृह रक्षा वाहिनी सह अग्निशमन विभाग के डीजी और महासमादेष्टा के रूप में कार्यरत हैं।

तीनों अधिकारियों का लंबा पुलिसिंग अनुभव रहा है और प्रशासनिक हलकों में उनकी छवि स्वच्छ व बेदाग मानी जाती है।

1994–1995 बैच से विकल्प लगभग समाप्त

वर्तमान प्रभारी DGP तदाशा मिश्रा 1994 बैच की IPS अधिकारी हैं। इसी बैच की संपत मीणा केंद्र में ही डीजी रैंक में इम्पैनल हो चुकी हैं। ऐसे में उनके झारखंड लौटने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है।

यदि सरकार 1995 बैच तक जाती है, तो इस बैच में केवल डॉ. संजय आनंदराव लाटकर ही डीजी रैंक में हैं, लेकिन वे फिलहाल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।

सरकार अपनी नियमावली से कर सकती है DGP की नियुक्ति

राज्य सरकार के पास अपने स्तर पर DGP नियुक्त करने का विकल्प भी मौजूद है। इसके लिए सरकार ने पहले ही
‘महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड (पुलिस बल प्रमुख) का चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2025’ बनाई है।

इस नियमावली के नियम 10(1) के तहत राज्य सरकार DGP की नियुक्ति कर सकती है। इसी प्रक्रिया के तहत पहले भी DGP की नियुक्ति की जा चुकी है।

UPSC से टकराव की आशंका

हालांकि, पिछली बार राज्य सरकार की इस नियमावली को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने मान्यता देने से इंकार कर दिया था।
यदि सरकार एक बार फिर इसी नियमावली के तहत DGP नियुक्त करती है, तो मामला दोबारा विवादों में घिर सकता है।

यह स्थिति राज्य सरकार के लिए प्रशासनिक और कानूनी चुनौती बन सकती है।

दो साल का कार्यकाल और पात्रता शर्तें

नियमों के अनुसार DGP की नियुक्ति दो वर्षों के लिए की जानी है।
वे IPS अधिकारी, जिनकी सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय शेष है, वे इस पद के लिए पात्र माने जाते हैं।

इस मानक पर अनिल पाल्टा, प्रशांत सिंह और एमएस भाटिया तीनों अधिकारी पूरी तरह खरे उतरते हैं।

वरिष्ठ अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रही झारखंड पुलिस

झारखंड पुलिस में वरिष्ठ स्तर पर अधिकारियों की गंभीर कमी बनी हुई है। इसका असर सीधे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर दिख रहा है।

  • विशेष शाखा और CID जैसे अहम विभाग लंबे समय से IG रैंक के अधिकारियों के भरोसे चल रहे हैं।
  • रांची रेंज में DIG का पद लंबे समय से रिक्त है।
  • आधा दर्जन से अधिक IRB, SIRB और SISF बटालियन के प्रमुख अतिरिक्त प्रभार में काम कर रहे हैं।

अतिरिक्त प्रभार से चल रहे अहम विभाग

  • ACB की ADG प्रिया दुबे के पास JAP और प्रशिक्षण एवं आधुनिकीकरण का अतिरिक्त प्रभार है।
  • IG जेल सुदर्शन मंडल IG मुख्यालय का भी प्रभार संभाल रहे हैं।
  • वायरलेस, मुख्यालय और अन्य इकाइयों में भी अतिरिक्त प्रभार की स्थिति बनी हुई है।

अब सबकी निगाहें राज्य सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।
क्या सरकार अपनी नियमावली के तहत DGP नियुक्त करेगी या UPSC पैनल की प्रक्रिया अपनाएगी, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।

एक जनवरी के साथ ही झारखंड पुलिस को नया नेतृत्व मिलना तय है, लेकिन नाम पर सस्पेंस फिलहाल बरकरार है।

झारखंड में DGP की नियुक्ति सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि रणनीतिक फैसला भी है।
वरिष्ठ अधिकारियों की कमी और अतिरिक्त प्रभार के बीच सरकार के फैसले का असर राज्य की कानून-व्यवस्था पर सीधे पड़ेगा।

Subhash Shekhar

एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार, कंटेंट स्ट्रैटेजिस्ट और SEO-फोकस्ड न्यूज़ राइटर हैं। वे झारखंड और बिहार से जुड़े राजनीति, प्रशासन, सामाजिक मुद्दों, शिक्षा, स्वास्थ्य और करंट अफेयर्स पर तथ्यपरक और भरोसेमंद रिपोर्टिंग के लिए जाने जाते हैं।

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