रांची। झारखंड फसल बीमा के तहत रबी 2026-27 की फसलों का बीमा कराने की अवधि गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हो गई है। किसान बिरसा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत 31 दिसंबर 2026 तक अपनी अधिसूचित फसलों का बीमा करा सकेंगे।
इस बार विभाग ने जिलों में बीमा के दायरे में आने वाले किसानों की संख्या में कम-से-कम 10 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पंचायत और गांव स्तर तक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
अभियान में खास ध्यान उन किसानों पर रहेगा, जिन्होंने कृषि ऋण नहीं लिया है। विभाग ऐसे गैर-ऋणी किसानों तक योजना की जानकारी पहुंचाने और आवेदन की प्रक्रिया पूरी कराने पर जोर दे रहा है।
झारखंड फसल बीमा में कौन-कौन सी फसलें शामिल?
रबी सीजन के लिए राज्य में गेहूं, चना, राई-सरसों और आलू को अधिसूचित किया गया है। इन फसलों की खेती करने वाले पात्र किसानों को योजना से जोड़ने के लिए अभियान चलाया जाएगा।
किसानों के लिए सबसे जरूरी तारीख 31 दिसंबर 2026 है। बीमा कराने की निर्धारित अवधि इसी दिन समाप्त होगी। इसलिए आवेदन की जानकारी और आवश्यक प्रक्रिया समय रहते समझना उपयोगी होगा।

शशि रंजन ने जिलों को दिए निर्देश
निबंधक, सहयोग समितियां शशि रंजन ने सभी जिला सहकारिता पदाधिकारियों और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
निर्देशों के अनुसार, जिलों को अधिक पात्र किसानों तक पहुंच बनानी होगी और फसल बीमा के आच्छादन में कम-से-कम 10 प्रतिशत वृद्धि सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए प्रचार-प्रसार के साथ किसानों को प्रक्रिया पूरी कराने में सहयोग देने पर भी जोर है।
स्थानीय स्तर पर इस लक्ष्य को हासिल करने में सहकारी संस्थाओं, बैंक शाखाओं और किसान संगठनों की भूमिका अहम होगी। इन्हीं माध्यमों से किसान योजना की जानकारी हासिल कर सकेंगे और आवेदन से जुड़ी अपनी शंकाएं दूर कर पाएंगे।
गैर-ऋणी किसानों तक पहुंच क्यों अहम?
विभाग ने गैर-ऋणी किसानों को अभियान की प्राथमिकता में रखा है। उद्देश्य यह है कि कृषि ऋण नहीं लेने वाले पात्र किसान भी बीमा व्यवस्था से जुड़ सकें।
इस निर्देश का व्यावहारिक अर्थ है कि अभियान को बैंक शाखाओं से आगे गांवों तक पहुंचाना होगा। किसान संगठनों, सहकारी संस्थाओं और स्थानीय सेवा केंद्रों का समन्वय इस पहुंच को मजबूत कर सकता है।
पंचायत से गांव तक कैसे चलेगा अभियान?
झारखंड फसल बीमा की जानकारी पहुंचाने के लिए किसानों से सीधे जुड़े संस्थानों का सहयोग लिया जाएगा। इनमें शामिल हैं:
- लैम्प्स और पैक्स।
- बैंक शाखाएं और कॉमन सेवा केंद्र।
- किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ।
- किसान संगठन।
- उर्वरक और बीज विक्रेता।
इन माध्यमों से किसानों को योजना की जानकारी देने के साथ आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कराने में सहयोग किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य अधिकाधिक पात्र किसानों की अधिसूचित रबी फसलों का बीमा सुनिश्चित करना है।
किसानों को अभी क्या करना चाहिए?
गेहूं, चना, राई-सरसों या आलू की खेती करने वाले किसान नजदीकी लैम्प्स-पैक्स, बैंक शाखा, कॉमन सेवा केंद्र अथवा जिला सहकारिता कार्यालय से योजना की जानकारी ले सकते हैं।
आवेदन से पहले अपने क्षेत्र में पात्रता, संबंधित फसल की अधिसूचना और आवश्यक दस्तावेजों की पुष्टि कर लें। प्रक्रिया पूरी होने पर आवेदन या बीमा पंजीकरण की रसीद सुरक्षित रखना भी उपयोगी होगा।
अब जिलों में प्रचार-प्रसार, संस्थानों के बीच समन्वय और किसानों को आवेदन प्रक्रिया से जोड़ने का काम अहम होगा। विभाग का उद्देश्य किसानों को संभावित फसल जोखिमों से आर्थिक सुरक्षा देने वाली बीमा व्यवस्था का दायरा बढ़ाना है।
झारखंड फसल बीमा अभियान की सफलता इस बात से तय होगी कि जानकारी कितने गांवों तक पहुंचती है और कितने पात्र किसान समय पर पंजीकरण करा पाते हैं। विशेष नजर गैर-ऋणी किसानों की भागीदारी और जिलों के 10 प्रतिशत वृद्धि लक्ष्य पर रहेगी।













