रांची: कथित 54 करोड़ रुपये के GST घोटाला मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने कारोबारी ज्ञान चंद जायसवाल और उनके बेटे राज जायसवाल को गिरफ्तार किया है। दोनों पर कर्मचारियों के नाम पर सात कागजी कंपनियां बनाकर फर्जी बिलों से इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC का अनुचित लाभ लेने का आरोप है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, दोनों को 1 अक्टूबर 2026 को PMLA के विशेष न्यायाधीश की अदालत में पेश किया जाना है। अदालत की कार्यवाही के बाद हिरासत और आगे की जांच की स्थिति स्पष्ट होगी।
इस मामले का मुख्य सवाल है—जब सामान की वास्तविक आपूर्ति नहीं हुई, तो कंपनियों के बीच कारोबार दिखाकर टैक्स क्रेडिट कैसे लिया गया? जांच में कर्मचारियों के नाम पर बनी फर्मों और मूल कंपनी के बीच कथित कागजी लेनदेन सामने आया है।
GST घोटाला: कर्मचारियों के नाम पर सात कंपनियों का आरोप
आपके उपलब्ध इनपुट के अनुसार, ईडी की जांच में आरोप सामने आया कि ज्ञान चंद जायसवाल ने कर्मचारियों के नाम पर जय भोले इंटरप्राइजेज सहित सात कंपनियां बनाईं। इन फर्मों का GST पंजीकरण कराया गया और इनके जरिए मूल कंपनी के साथ कारोबार दिखाया गया।
आरोप है कि इन कंपनियों ने वास्तविक सामान भेजे बिना बिल जारी किए। इन्हीं बिलों के आधार पर मूल कंपनी ने ITC का लाभ लिया।
कर्मचारियों के नाम पर फर्में बनाने का आरोप जांच का अहम पहलू है। इससे यह सवाल उठता है कि दस्तावेजों में दर्ज संचालकों और वास्तव में कारोबार नियंत्रित करने वालों की भूमिका क्या थी। हालांकि कर्मचारियों की जानकारी या संलिप्तता के बारे में उपलब्ध इनपुट में स्पष्ट विवरण नहीं है।
मेकर कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड से क्या संबंध?
उपलब्ध विवरण में ज्ञान चंद जायसवाल की मूल कंपनी का नाम मेकर कास्टिंग प्राइवेट लिमिटेड बताया गया है। आरोप है कि इस कंपनी और कर्मचारियों के नाम पर बनी फर्मों के बीच सामान की आपूर्ति के बिना कारोबार दिखाया गया।
इस GST घोटाला मामले में जांच का केंद्र सिर्फ बिल बनाना नहीं, बल्कि उन बिलों के आधार पर लिया गया कथित टैक्स लाभ है। बिल, माल की आवाजाही और भुगतान का आपस में मिलान आरोपों की जांच में महत्वपूर्ण होगा।
छापेमारी से गिरफ्तारी तक पहुंची जांच
लगातार की 30 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी ने जमशेदपुर के तीन और कोलकाता के एक ठिकाने पर तलाशी शुरू की थी। रिपोर्ट में ज्ञान चंद जायसवाल पर अस्तित्वहीन प्रतिष्ठानों से बिना वास्तविक खरीद-बिक्री के फर्जी बिल हासिल करने का आरोप बताया गया था।
अब पिता-पुत्र की गिरफ्तारी की खबर से GST घोटाला जांच में नया घटनाक्रम जुड़ा है। हालांकि तलाशी में मिले सभी दस्तावेजों, कथित लाभ की अंतिम राशि और दोनों आरोपियों की अलग-अलग भूमिका का पूरा विवरण उपलब्ध नहीं है।
स्थानीय कारोबार के लिए क्यों अहम है मामला?
कर्मचारियों के नाम पर कंपनियां बनाकर लेनदेन दिखाने का आरोप कारोबारी दस्तावेजों की जवाबदेही से जुड़ा है। जांच को यह स्पष्ट करना होगा कि फर्मों का संचालन किसने किया और कथित लाभ किस कंपनी तक पहुंचा।
GST घोटाला मामले में वास्तविक खरीद-बिक्री और कागजी कारोबार के बीच अंतर निर्णायक रहेगा। इससे संबंधित प्रतिष्ठानों के साथ लेनदेन करने वाली दूसरी फर्मों की स्थिति भी दस्तावेजों के आधार पर स्पष्ट हो सकेगी।
अब अदालत की कार्यवाही पर नजर
अगला महत्वपूर्ण घटनाक्रम पिता-पुत्र की प्रस्तावित अदालत पेशी है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि ईडी आगे पूछताछ के लिए हिरासत मांगती है या नहीं और अदालत क्या आदेश देती है।
फिलहाल दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच के अधीन हैं। उपलब्ध इनपुट में उनका पक्ष शामिल नहीं है। इस GST घोटाला मामले में कंपनियों की वास्तविक गतिविधि, बिलों की प्रामाणिकता और कथित टैक्स लाभ का दस्तावेजी प्रमाण आगे की कार्यवाही का आधार बनेगा।













