Ranchi | झारखंड के युवाओं की तकदीर और राज्य की तस्वीर बदलने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सात समंदर पार एक ऐसा रोडमैप तैयार किया है, जो आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा। झारखंड सरकार और जिंदल फाउंडेशन के बीच ‘एजुकेशन और स्किल बिल्डिंग’ को लेकर एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब झारखंड के हाशिए पर रहने वाले गरीब और मेधावी छात्र भी वैश्विक मंच पर अपनी पहचान बना सकेंगे।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य झारखंड को सिर्फ एक ‘खनिज प्रधान’ राज्य तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि यहां के मानव संसाधन को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार करना है। इस साझेदारी के तहत झारखंड में वर्ल्ड क्लास रिसर्च सेंटर (Center of Excellence) बनेगा और गरीब छात्रों को मैनेजमेंट-लॉ की पढ़ाई के लिए भारी-भरकम स्कॉलरशिप दी जाएगी।
झारखंड के मेधावी छात्रों को मिलेगी 50% स्कॉलरशिप, खुलेंगे भविष्य के द्वार
इस साझेदारी का सबसे भावुक और प्रभावी पहलू वह ‘जॉइंट स्कॉलरशिप’ प्रोग्राम है, जिसमें झारखंड सरकार और जिंदल फाउंडेशन 50:50 के अनुपात में लागत साझा करेंगे। यह उन मेधावी छात्रों के लिए वरदान साबित होगा जो आर्थिक तंगी के कारण कानून (Law), पब्लिक पॉलिसी और मैनेजमेंट जैसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षा नहीं ले पाते।
विशेष रूप से, इसमें राज्य के खिलाड़ियों के लिए भी प्रावधान है। यह छात्रवृत्ति न केवल खेल के मैदान पर प्रदर्शन के लिए है, बल्कि यह सुनिश्चित करेगी कि हमारे एथलीट उच्च शिक्षा प्राप्त कर एक सम्मानजनक करियर भी बना सकें।
IIT-ISM धनबाद और BIT सिंदरी में बनेगा ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’
राज्य को औद्योगिक शक्ति बनाने के लिए तकनीकी शिक्षा पर ज़ोर दिया जा रहा है। प्रस्तावित समझौते के तहत IIT-ISM धनबाद और BIT सिंदरी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एक आधुनिक रिसर्च सेंटर बनाया जाएगा।
- प्रमुख फोकस: स्टील सेक्टर, खनिज प्रसंस्करण (Mineral Processing) और क्रिटिकल मिनरल्स।
- फायदा: रामगढ़ और पतरातू जैसे उभरते ‘स्टील हब’ के लिए झारखंड में ही स्किल्ड इंजीनियर और विशेषज्ञ तैयार होंगे।
प्रशासनिक अधिकारियों की होगी ‘स्पेशल ट्रेनिंग’, JPSC अफसरों को मिलेगी नई धार
शासन व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के मिड-करियर अधिकारियों (प्रशासनिक और पुलिस सेवा) को वैश्विक स्तर की ट्रेनिंग दी जाएगी। हर साल 30 अधिकारियों के लिए साल में दो बार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे, ताकि वे जनता की समस्याओं का समाधान वैश्विक मानकों के आधार पर कर सकें।
जलवायु परिवर्तन और पब्लिक पॉलिसी पर होगा शोध
पूर्वी भारत वर्तमान में जलवायु परिवर्तन के बड़े खतरों का सामना कर रहा है। जिंदल फाउंडेशन और राज्य सरकार मिलकर इस विषय पर गंभीर शोध (Research) करेंगे। इसका उद्देश्य न केवल पर्यावरण को बचाना है, बल्कि विकास की ऐसी नीतियां बनाना है जो समावेशी हों और राज्य के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचें।
“झारखंड की प्रतिभा अब संसाधनों के अभाव में नहीं दबेगी। जिंदल फाउंडेशन के साथ यह साझेदारी हमारे युवाओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी।” – हेमंत सोरेन, मुख्यमंत्री
क्या झारखंड बनेगा ‘एजुकेशन हब’?
मुख्यमंत्री का यह कदम झारखंड के ‘मानव विकास सूचकांक’ (HDI) को सुधारने की दिशा में एक साहसिक प्रयास है। अगर यह योजना धरातल पर समयबद्ध तरीके से उतरती है, तो वह दिन दूर नहीं जब झारखंड के ग्रामीण इलाकों से निकले युवा अंतरराष्ट्रीय मंचों पर नीति-निर्धारक की भूमिका में होंगे। अब सवाल यह है कि प्रशासनिक स्तर पर इसे कितनी तेज़ी से लागू किया जाता है।









