London | झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने यूनाइटेड किंगडम में आयोजित एक उच्चस्तरीय वैश्विक संवाद में हिस्सा लेकर राज्य की आर्थिक, औद्योगिक और मानव संसाधन क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय नीति-निर्माताओं के सामने मजबूती से रखा। यह कार्यक्रम भारत के उच्चायुक्त विक्रम दोराईस्वामी द्वारा लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग में आयोजित आधिकारिक स्वागत समारोह के दौरान हुआ।
पहले ही क्षणों में स्पष्ट संदेश गया—झारखंड सिर्फ खनिजों का राज्य नहीं, बल्कि निवेश, शिक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स का अगला ग्लोबल हब बनने की तैयारी में है। चर्चा का फोकस रहा: झारखंड का भारत के समग्र विकास में योगदान, युवाओं के लिए वैश्विक अवसर और यूके–भारत रणनीतिक साझेदारी के तहत संभावित सहयोग।
वैश्विक संवाद का एजेंडा: झारखंड की ताक़तें
कार्यक्रम में कई देशों के नीति-निर्माताओं, विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों से संवाद हुआ। मुख्यमंत्री ने तीन प्रमुख स्तंभों पर जोर दिया:
🔹 खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स
झारखंड की खनिज संपदा और क्रिटिकल मिनरल्स पर केंद्रित रणनीति ने निवेशकों का ध्यान खींचा। हरित ऊर्जा, ई-मोबिलिटी और टेक इंडस्ट्री के लिए इन संसाधनों की बढ़ती वैश्विक मांग को देखते हुए सहयोग की संभावनाएं रेखांकित की गईं।
🔹 युवा शक्ति और कौशल विकास
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य की युवा आबादी को उच्च शिक्षा, स्किलिंग और स्पोर्ट्स के जरिए वैश्विक अवसरों से जोड़ने पर सरकार फोकस कर रही है—ताकि रोजगार सृजन के साथ इनोवेशन को गति मिले।
🔹 संस्कृति और विरासत संरक्षण
यूके के साथ विरासत संरक्षण और सांस्कृतिक साझेदारी पर विशेष चर्चा हुई। इससे पर्यटन, क्रिएटिव इकॉनमी और सॉफ्ट पावर को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
यूके–भारत साझेदारी में झारखंड की भूमिका
यह संवाद यूके–भारत रणनीतिक साझेदारी के व्यापक ढांचे के अनुरूप रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षा, तकनीक, खेल और क्रिटिकल मिनरल्स में सहयोग से झारखंड को अंतरराष्ट्रीय निवेश और तकनीकी ट्रांसफर का सीधा लाभ मिल सकता है।
ग्राउंड इनसाइट: लंदन में मौजूद नीति-निर्माताओं के बीच झारखंड को “नेक्स्ट ग्रोथ फ्रंटियर” के तौर पर देखने की उत्सुकता दिखी—खासकर माइनिंग वैल्यू-एडिशन, ग्रीन टेक और स्किल इकोसिस्टम में।









