Ranchi: झारखंड की सियासत में शुक्रवार की देर रात एक ऐसी हलचल हुई, जिसने कांग्रेस आलाकमान की नींद उड़ा दी है। प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के फैसलों से नाराज चल रहे कद्दावर नेता और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अशोकनगर स्थित आवास पर अचानक पूर्व सांसद धीरज साहू और मंत्री इरफान अंसारी पहुंचे। बंद कमरे में हुई इस ‘सीक्रेट मीटिंग’ के बाद जो बातें छनकर बाहर आई हैं, उसने स्पष्ट कर दिया है कि झारखंड कांग्रेस के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है।
राधाकृष्ण किशोर ने साफ शब्दों में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए 18 मई तक का ‘डेडलाइन’ तय कर दिया है। उन्होंने दो टूक कहा है कि वे फिलहाल संयम बरत रहे हैं, लेकिन उनकी चुप्पी को कमजोरी न समझा जाए। यह केवल एक पद की लड़ाई नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर दलितों, अल्पसंख्यकों और पिछड़ों के वजूद और सम्मान का सवाल बन चुका है।
इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात ने रांची से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारों में यह चर्चा तेज कर दी है कि क्या झारखंड कांग्रेस में नेतृत्व परिवर्तन की पटकथा लिखी जा रही है?
आधी रात की ‘डैमेज कंट्रोल’ बैठक: क्या पिघली बर्फ?
जब पूरी रांची सो रही थी, तब कांग्रेस के दो संकटमोचक—धीरज साहू और इरफान अंसारी—राधाकृष्ण किशोर को मनाने में जुटे थे। वित्त मंत्री किशोर पिछले कई दिनों से प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली और हालिया कमेटी विस्तार को लेकर मुखर हैं।
राधाकृष्ण किशोर का दो टूक जवाब
बैठक के दौरान वित्त मंत्री किशोर का तेवर सख्त था। उन्होंने स्पष्ट किया:
- 18 मई तक मौन: “मैं पार्टी हित में 18 मई तक कोई सार्वजनिक बयान नहीं दूंगा, लेकिन अपनी बात झारखंड प्रभारी के. राजू के सामने विस्तार से रखूंगा।”
- सामाजिक न्याय का सवाल: उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी में दलितों और कमजोर वर्गों की अनदेखी हो रही है। बिना संवाद और सम्मान के संगठन को मजबूत नहीं किया जा सकता।
- प्रदेश अध्यक्ष पर निशाना: किशोर ने साफ किया कि उनके उठाए गए मुद्दे ‘पार्टी विरोधी’ नहीं बल्कि ‘पार्टी बचाव’ के लिए हैं।
धीरज साहू और इरफान की दलील: ‘भाजपा को मिलेगा मौका’
बैठक में पूर्व सांसद धीरज साहू ने चेताया कि अगर अंदरूनी कलह सड़क पर आई, तो इसका सीधा फायदा भारतीय जनता पार्टी (BJP) उठाएगी। वहीं, मंत्री इरफान अंसारी ने आश्वासन दिया कि किशोर की मांगों को दिल्ली दरबार (आलाकमान) तक पहुंचाया जाएगा। उन्होंने फिलहाल ‘संवाद और संयम’ की नीति अपनाने का सुझाव दिया।
विवाद की जड़: प्रदेश अध्यक्ष के खिलाफ क्यों खुले मोर्चे?
राधाकृष्ण किशोर की नाराजगी अचानक नहीं है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के विस्तार के बाद से ही वे केशव महतो कमलेश के विरुद्ध मोर्चा खोले हुए हैं।
- उपेक्षा का आरोप: किशोर का मानना है कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर प्रदेश अध्यक्ष उदासीन हैं।
- हटाने की वकालत: उन्होंने प्रभारी को पत्र लिखकर न केवल निर्णयों पर सवाल उठाए हैं, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से नेतृत्व परिवर्तन (प्रदेश अध्यक्ष को हटाने) की मांग भी कर दी है।
- संगठनात्मक शून्यता: ग्राउंड रिपोर्ट बताती है कि पुराने कार्यकर्ताओं में इस बात को लेकर गुस्सा है कि नए विस्तार में ‘वफादारी’ से ज्यादा ‘पैरवी’ को तवज्जो दी गई है।
क्या 18 मई को होगा बड़ा धमाका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 18 मई की तारीख झारखंड कांग्रेस के लिए ‘टर्निंग पॉइंट’ साबित हो सकती है। राधाकृष्ण किशोर एक मंझे हुए खिलाड़ी हैं, और उनका यह ‘अल्टीमेटम’ इशारा कर रहा है कि यदि उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ, तो वे कोई बड़ा फैसला ले सकते हैं।
“अगर वित्त मंत्री जैसा बड़ा चेहरा खुलकर अध्यक्ष के खिलाफ खड़ा है, तो यह केवल व्यक्तिगत लड़ाई नहीं है। यह संकेत है कि गुटबाजी अब उस मोड़ पर है जहां से वापसी मुश्किल है।”
आगे क्या हो सकता है?
- के. राजू की एंट्री: दिल्ली से झारखंड प्रभारी को तुरंत हस्तक्षेप करना पड़ सकता है।
- संगठन में फेरबदल: नाराज गुट को शांत करने के लिए कमेटी के स्वरूप में बदलाव संभव है।
- विपक्ष की नजर: भाजपा इस अंतर्कलह को सरकार की अस्थिरता से जोड़कर पेश करने की तैयारी में है।








