रांची। बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर मंगलवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई नहीं हो सकी। अदालत ने समय की कमी के कारण सुनवाई बुधवार, 30 सितंबर को दोपहर 2:15 बजे तय की है।
हेमंत सोरेन ने विशेष ईडी अदालत में आरोप गठन की कार्रवाई रोकने और उसके आदेश को चुनौती देने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया है। इसी मामले में ईडी अदालत में भी 30 सितंबर को आरोप गठन की प्रक्रिया पर सुनवाई निर्धारित है।
इसलिए बुधवार को दोनों अदालतों की कार्यवाही अहम होगी। फिलहाल हाईकोर्ट ने सोरेन की याचिका पर कोई फैसला नहीं दिया है।
सुबह सुनवाई का आग्रह, दोपहर का समय तय
चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ के समक्ष मंगलवार को मामला आया, लेकिन समय की कमी के चलते विस्तृत सुनवाई नहीं हो सकी। सोरेन की ओर से आग्रह किया गया कि ईडी अदालत में आरोप गठन की कार्यवाही को देखते हुए हाईकोर्ट सुबह ही याचिका सुने।
सुनवाई में ऑनलाइन जुड़े अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में एक अन्य महत्वपूर्ण मामले के कारण वह दूसरी पाली में उपलब्ध होंगे। इसके बाद हाईकोर्ट ने बुधवार दोपहर 2:15 बजे सुनवाई तय की। ईडी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अमित कुमार दास और अधिवक्ता सौरभ कुमार ने भी पक्ष रखा।
सोरेन की याचिका में क्या दलील है?
सोरेन की ओर से दाखिल याचिका में पीएमएलए की धारा 44(1)(डी) का हवाला दिया गया है। उनका पक्ष है कि मामले में जांच अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए उनके खिलाफ आरोप गठन की कार्रवाई फिलहाल नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विशेष ईडी अदालत की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की है।
यह याचिकाकर्ता की कानूनी दलील है। हाईकोर्ट को इस पर सुनवाई के बाद फैसला करना है; मंगलवार को आरोप गठन पर रोक का कोई नया आदेश नहीं आया।
दो अदालतों में 30 सितंबर को क्या तय है?
विशेष ईडी अदालत ने आरोप गठन से जुड़ी अगली सुनवाई बुधवार सुबह 11:15 बजे तय की थी। हाईकोर्ट में सोरेन की याचिका पर सुनवाई दोपहर 2:15 बजे होगी। पहले प्रकाशित अदालती रिपोर्टों के मुताबिक, विशेष अदालत ने सोरेन को दस्तावेज देखने के लिए समय दिया था और उसके बाद 30 सितंबर की तारीख तय की थी।
अब नजर इस बात पर रहेगी कि ईडी अदालत में सुबह क्या कार्यवाही होती है और दोपहर में हाईकोर्ट सोरेन की याचिका तथा रोक की मांग पर क्या निर्देश देता है। अदालत का आदेश आने तक मामले के नतीजे को लेकर कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।












