धनबाद–रांची–गया–सासाराम ट्रेनों में एसी चेयर कार टिकट पर एसी इकोनॉमी कोच का सफर, यात्रियों को मिल रही 60 से 200 रुपये तक की छूट

धनबाद–रांची–गया–सासाराम ट्रेनों में एसी चेयर कार टिकट पर एसी इकोनॉमी कोच का सफर, यात्रियों को मिल रही 60 से 200 रुपये तक की छूट

Dhanbad | धनबाद से रांची, गया और सासाराम जाने वाली इंटरसिटी ट्रेनों में इन दिनों यात्रियों को एक अलग ही अनुभव मिल रहा है। एसी चेयर कार का टिकट लेकर यात्री एसी इकोनॉमी कोच में सफर कर रहे हैं, वह भी 60 से 200 रुपये तक की छूट के साथ। यह व्यवस्था एसी चेयर कार कोच की कमी के कारण लागू की गई है, हालांकि टिकट बुकिंग प्रणाली में अब तक कोई बदलाव नहीं किया गया है।

पूरी खबर विस्तार से

धनबाद से चलने वाली धनबाद–रांची इंटरसिटी, धनबाद–गया–सासाराम इंटरसिटी ट्रेनों में पिछले कई महीनों से एसी चेयर कार की जगह एसी इकोनॉमी कोच जोड़े जा रहे हैं। इसके बावजूद रेलवे के पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) में टिकट बुकिंग अब भी एसी चेयर कार के नाम से ही हो रही है।

एसी चेयर कार में जहां कुल 78 सीटें होती हैं, वहीं एसी इकोनॉमी कोच में 83 सीटों की सुविधा उपलब्ध रहती है। बावजूद इसके, सिस्टम में केवल 78 सीटों की ही बुकिंग हो पा रही है, जिससे अतिरिक्त सीटों का लाभ यात्रियों को नहीं मिल पा रहा है।

कोच बदलने की जानकारी न होने से बढ़ी यात्रियों की परेशानी

कई ऐसे यात्री, जिन्हें एसी चेयर कार के बदले इकोनॉमी कोच जोड़े जाने की जानकारी नहीं होती, वे प्लेटफॉर्म पर कोच तलाशते हुए परेशान नजर आते हैं। टिकट पर एसी चेयर कार लिखा होने के कारण यात्री उसी कोच को खोजते रहते हैं।

लंबी भागदौड़ के बाद उन्हें यह जानकारी मिलती है कि उन्हें एसी इकोनॉमी कोच में यात्रा करनी है। इस असमंजस के कारण कई बार यात्रियों का समय भी नष्ट होता है और ट्रेन छूटने का खतरा बना रहता है।

एसी चेयर कार के साथ चल रही रांची–दुमका इंटरसिटी

रांची से धनबाद होते हुए दुमका जाने वाली रांची–दुमका इंटरसिटी एक्सप्रेस अभी भी एसी चेयर कार सुविधा के साथ संचालित हो रही है। यह ट्रेन दोनों दिशाओं में एसी चेयर कार के साथ चल रही है।

ध्यान देने वाली बात यह है कि धनबाद–रांची इंटरसिटी और रांची–दुमका इंटरसिटी एक ही रैक शेयरिंग व्यवस्था के तहत चलती हैं। इसके बावजूद धनबाद–रांची इंटरसिटी में एसी चेयर कार की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा सकी है।

धनबाद–सासाराम इंटरसिटी में अतिरिक्त कोच की योजना अधूरी

धनबाद–सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस में यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए एक अतिरिक्त एसी चेयर कार कोच जोड़ने की योजना बनाई गई थी। हालांकि, कोच की अनुपलब्धता के कारण अब तक एक भी अतिरिक्त कोच नहीं जोड़ा जा सका है।

इससे इस रूट पर नियमित यात्रा करने वाले यात्रियों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है।

ऐसे समझें रेलवे का किराया गणित

रेलवे की इस अस्थायी व्यवस्था में यात्रियों को किराए में सीधा फायदा मिल रहा है—

धनबाद से रांची

  • एसी चेयर कार किराया: ₹315
  • एसी इकोनॉमी किराया: ₹515
  • अंतर: ₹200

धनबाद से गया

  • एसी चेयर कार किराया: ₹350
  • एसी इकोनॉमी किराया: ₹515
  • अंतर: ₹165

धनबाद से सासाराम

  • एसी चेयर कार किराया: ₹460
  • एसी इकोनॉमी किराया: ₹520
  • अंतर: ₹60

कम किराए में बेहतर सुविधा मिलने से कई यात्रियों ने इसे फायदे का सौदा बताया है।

रेलवे प्रशासन की प्रतिक्रिया

इस पूरे मामले पर धनबाद मंडल के सीनियर डीसीएम मोहम्मद इकबाल ने स्पष्ट किया कि कोच की उपलब्धता फिलहाल एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। उन्होंने कहा—

“कोच उपलब्ध नहीं होने से समस्या हो रही है। कोच की उपलब्धता को लेकर रेलवे मुख्यालय को पत्र लिखा गया है।”

रेलवे का कहना है कि जैसे ही पर्याप्त कोच उपलब्ध होंगे, व्यवस्था को सामान्य किया जाएगा।

यात्रियों पर असर

यात्रियों को जहां एक ओर कम किराए में एसी इकोनॉमी कोच की सुविधा मिल रही है, वहीं दूसरी ओर जानकारी के अभाव में प्लेटफॉर्म पर भ्रम की स्थिति भी बन रही है। नियमित यात्रियों का मानना है कि अगर टिकट और कोच की जानकारी पहले से स्पष्ट कर दी जाए, तो परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।

आगे क्या? (Next Update)

रेलवे मुख्यालय से कोच की उपलब्धता को लेकर निर्णय आने के बाद ही स्थिति साफ हो पाएगी। उम्मीद है कि आने वाले समय में या तो पर्याप्त एसी चेयर कार कोच जोड़े जाएंगे या फिर टिकट बुकिंग सिस्टम में बदलाव कर एसी इकोनॉमी कोच का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा।

निष्कर्ष

धनबाद से रांची, गया और सासाराम जाने वाले यात्रियों के लिए यह व्यवस्था फिलहाल राहत और परेशानी—दोनों लेकर आई है। कम किराए में बेहतर कोच का लाभ जरूर मिल रहा है, लेकिन सूचना और व्यवस्था में सुधार की जरूरत साफ तौर पर महसूस की जा रही है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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