भारतीय रेलवे का बड़ा धमाका: बिना ड्राइवर ब्रेक लगाए खुद रुक गई इंटरसिटी, धनबाद-गया रूट पर ‘कवच’ का सफल ट्रायल देख उड़े होश!

भारतीय रेलवे का बड़ा धमाका: बिना ड्राइवर ब्रेक लगाए खुद रुक गई इंटरसिटी, धनबाद-गया रूट पर 'कवच' का सफल ट्रायल देख उड़े होश!

Dhanbad: भारतीय रेलवे के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। धनबाद-गया रेल मार्ग पर पहली बार यात्रियों से भरी एक ऐसी ट्रेन दौड़ी, जो किसी भी खतरे को भांपते ही खुद-ब-खुद रुकने की ताकत रखती है। धनबाद-सासाराम इंटरसिटी एक्सप्रेस देश की वह पहली यात्री ट्रेन बन गई है, जिसे अत्याधुनिक ‘कवच’ सेफ्टी सिस्टम से लैस कर इस व्यस्त रूट पर उतारा गया है।

शनिवार सुबह जब यह ट्रेन सरमाटांड से मानपुर के लिए रवाना हुई, तो यात्रियों को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि वे रेल सुरक्षा की एक नई क्रांति का हिस्सा बन रहे हैं। सुबह 07:42 बजे सरमाटांड से खुली यह ट्रेन 09:35 बजे मानपुर पहुंची और इसी के साथ 93.3 किमी लंबे रेलखंड पर सुरक्षा का अभेद्य किला यानी ‘कवच’ पूरी तरह सक्रिय हो गया।

इस परीक्षण की सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब ‘हेड ऑन कोलिजन’ (आमने-सामने की टक्कर) का टेस्ट किया गया। जैसे ही सिस्टम को खतरे का आभास हुआ, ट्रेन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के 4259 मीटर की सुरक्षित दूरी पर अपने आप खड़ी हो गई। यह दृश्य देख मौके पर मौजूद रेल अधिकारियों के भी होश उड़ गए।

क्या है ये ‘कवच’ और कैसे बचाएगा आपकी जान?

‘कवच’ भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) सिस्टम है। यह रेल पटरियों पर बिछाया गया एक ऐसा डिजिटल जाल है जो सिग्नलिंग सिस्टम के साथ लगातार संपर्क में रहता है।

  • टक्कर का अंत: अगर एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आमने-सामने आ जाएं या पीछे से कोई ट्रेन टकराने वाली हो, तो कवच तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगा देता है।
  • स्वचालित सीटी (Auto Whistle): रेल फाटकों के पास आते ही ट्रेन खुद-ब-खुद सीटी बजाने लगती है, जिससे हादसों की गुंजाइश खत्म हो जाती है।
  • ओवरस्पीड पर लगाम: अगर लोको पायलट गलती से ट्रेन की रफ्तार तय सीमा से ज्यादा करता है, तो सिस्टम गति को नियंत्रित कर लेता है।

4259 मीटर पहले ही थम गए पहिए: ग्राउंड जीरो की रिपोर्ट

सरमाटांड़ और मानपुर के बीच जब इस तकनीक का कड़ा इम्तिहान लिया गया, तो नतीजे हैरान करने वाले थे। टेस्ट के दौरान जैसे ही विपरीत दिशा से खतरे का सिग्नल मिला, सिस्टम ने लोको पायलट को अलर्ट किया। जब कोई रिस्पॉन्स नहीं मिला, तो कवच ने खुद कमान संभाली और ट्रेन को सवा चार किलोमीटर पहले ही रोक दिया।

विशेषज्ञों का कहना है: “यह केवल एक ट्रायल नहीं, बल्कि रेल यात्रियों के भरोसे की जीत है। अब घने कोहरे या मानवीय चूक की वजह से होने वाले बड़े रेल हादसे इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।”

हावड़ा-दिल्ली रूट पर अब नहीं होगा डर, 417 किमी का सुरक्षा घेरा

धनबाद से डीडीयू (पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन) तक का यह मार्ग देश के सबसे व्यस्ततम रेल रूटों में से एक है। पूर्व मध्य रेल के तहत 417 रूट किलोमीटर (प्रधानखंत-मानपुर-डीडीयू) को पूरी तरह कवच से कवर करने की योजना है।

कुल मिलाकर, रेलवे 4238 रूट किमी पर इस सुरक्षा चक्र को लगाने की तैयारी में है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ेगा। अब आप सुपरफास्ट ट्रेनों में सोते समय यह निश्चिंत रह सकेंगे कि ‘कवच’ आपकी सुरक्षा के लिए 24 घंटे जाग रहा है।

अगली तैयारी

इस सफल ट्रायल के बाद अब इस रूट पर चलने वाली अन्य एक्सप्रेस और मालगाड़ियों में भी कवच यूनिट लगाने का काम तेज कर दिया जाएगा। रेलवे बोर्ड का अगला लक्ष्य इस तकनीक को पूरे दिल्ली-हावड़ा मेन लाइन पर लागू करना है, ताकि भविष्य में ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को हासिल किया जा सके।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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