Chaibasa Jail में गर्भवती आदिवासी महिला के साथ क्या हुआ? मिसकैरेज के आरोपों पर उठे गंभीर सवाल

Chaibasa Jail में गर्भवती आदिवासी महिला के साथ क्या हुआ? मिसकैरेज के आरोपों पर उठे गंभीर सवाल

Chaibasa में पिछले महीने हुए एक प्रदर्शन के दौरान हिरासत में ली गई एक आदिवासी महिला के कथित गर्भपात को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। स्थानीय आदिवासी संगठनों ने आरोप लगाया है कि महिला को जेल में रहने के दौरान गर्भपात हुआ, जबकि जेल प्रशासन इस बात से सिरे से इनकार कर रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार Tulsi Purty नाम की यह महिला 27 अक्टूबर को हुए उस विरोध प्रदर्शन के दौरान गिरफ्तार हुई थीं, जिसमें गांव में खनन और भारी वाहनों के प्रवेश पर “नो-एंट्री” नियम लागू करने की मांग की जा रही थी। कुल 16 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया, जिनमें छह महिलाएँ और 10 पुरुष शामिल थे।

अंगनवाड़ी रजिस्टर में दर्ज थी गर्भावस्था, लेकिन जेल प्रशासन का दावा—“सभी रिपोर्ट्स नेगेटिव”

रिपोर्ट में बताया गया है कि गांव के स्थानीय अंगनवाड़ी केंद्र के रजिस्टर में Tulsi Purty का नाम गर्भवती महिलाओं की सूची में दर्ज मिला। अंगनवाड़ी सेविका ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर पुष्टि की कि वह महिला वास्तव में गर्भवती थी। उन्होंने बताया कि वे सभी नई गर्भवती महिलाओं का रिकॉर्ड नियमित रूप से रखती हैं।

इस बीच, जेल अधीक्षक सुनील कुमार ने दावा किया कि जेल में भर्ती किए जाने के दिन सभी छह महिलाओं की प्रेगनेंसी टेस्टिंग की गई थी और सभी रिपोर्टें नेगेटिव आई थीं। उनका कहना है कि जेल में किसी भी महिला कैदी के गर्भवती होने या गर्भपात होने की कोई जानकारी नहीं है।

आदिवासी संगठनों का आरोप है कि Tulsi के गर्भपात का कारण गिरफ्तारी के दौरान हुई पुलिस हिंसा हो सकती है। उनका कहना है कि पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच सामने आ सके।

स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद अस्पताल ले जाया गया, फिर हुई ‘इंड्यूस्ड डिलीवरी’

स्रोतों के मुताबिक, जेल में Tulsi की तबीयत खराब हुई, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने भ्रूण को बाहर निकालने के लिए ‘इंड्यूस्ड डिलीवरी’ की। इसके बाद उन्हें दोबारा जेल भेज दिया गया। इस जानकारी ने सवालों को और गहरा कर दिया है कि यदि महिला गर्भवती नहीं थी, तो फिर अस्पताल में ऐसी प्रक्रिया क्यों की गई?

जिला परिषद सदस्य मधव चंद्र कुंकल, जो इस प्रदर्शन में गिरफ्तार हुए थे और अब जमानत पर बाहर हैं, ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जेल में मानसिक दबाव भी ऐसे मामलों का कारण बन सकता है, इसलिए जिला प्रशासन को पूरी पारदर्शिता के साथ जांच करनी चाहिए।

जांच की मांग तेज, पुलिस और जेल प्रशासन के बयान टकराए

जिला प्रशासन के एक अधिकारी का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान Transport Minister दीपक बिरुआ के आवास को घेरने की कोशिश की गई थी, जिसके कारण स्थिति बिगड़ी और पथराव हुआ। इसके बाद 74 नामजद और करीब 500 अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज की गई।

अब जबकि अंगनवाड़ी रिकॉर्ड और जेल प्रशासन की रिपोर्ट एक-दूसरे से मेल नहीं खा रही, मामला और उलझ गया है। आदिवासी संगठन जिला प्रशासन से तुरंत न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं।

Tulsi Purty के कथित गर्भपात का मामला कई सवालों को जन्म दे रहा है। क्या गिरफ्तारी के दौरान महिला के साथ दुर्व्यवहार हुआ? क्या जेल प्रशासन ने जानकारी छुपाई? या मेडिकल रिपोर्ट और सरकारी रेकॉर्ड्स में कहीं कोई चूक हुई?

इन सभी सवालों के जवाब केवल निष्पक्ष जांच से ही मिल पाएंगे। अभी पूरा मामला संदेह और आरोपों के बीच उलझा हुआ है, और एक आदिवासी महिला के साथ हुए इस कथित अमानवीय व्यवहार को लेकर पूरे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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