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बंगाल चुनाव: BJP का वादा, पत्रकारों को मिलेगा ₹5000 भत्ता

Kolkata: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के अंतिम चरणों की वोटिंग से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी ने एक ऐसी चाल चली है, जिसने राज्य के सियासी गलियारों के साथ-साथ मीडिया जगत में भी हलचल मचा दी है। भाजपा ने वादा किया है कि अगर बंगाल में कमल खिलता है, तो राज्य के पत्रकारों को हर महीने ₹5,000 का सम्मान भत्ता दिया जाएगा। मतदान से महज कुछ दिन पहले आए इस ऐलान को ‘लोकतंत्र के चौथे स्तंभ’ को साधने की बड़ी कवायद माना जा रहा है।

कोलकाता प्रेस क्लब में आयोजित ‘मीट द प्रेस’ कार्यक्रम के दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने यह घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह भत्ता केवल एक आर्थिक मदद नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में काम करने वाले पत्रकारों के प्रति सम्मान का प्रतीक है।

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‘चाहे पक्ष में लिखें या विपक्ष में, पैसा सबको मिलेगा’

अक्सर देखा जाता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ राजनीतिक विचारधारा के आधार पर तय होता है, लेकिन शमिक भट्टाचार्य ने यहाँ एक अलग लकीर खींचने की कोशिश की है। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “चाहे आप हमारे पक्ष में लिखें या हमारे खिलाफ, आप सभी हमारे मित्र हैं। भाजपा मीडिया की स्वतंत्रता का सम्मान करती है।”

योजना की बड़ी बातें:

  • निश्चित राशि: हर पात्र पत्रकार को ₹5,000 प्रति माह।
  • बिना भेदभाव: विचारधारा से ऊपर उठकर सभी मीडियाकर्मियों को लाभ।
  • पात्रता: सरकार द्वारा तय मानदंडों को पूरा करने वाले सभी पत्रकार शामिल होंगे।
  • लक्ष्य: पत्रकारों को बुनियादी वित्तीय सुरक्षा प्रदान करना।

आखिर क्यों जरूरी है यह भत्ता?

बंगाल की ग्राउंड रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए स्थितियां हमेशा चुनौतीपूर्ण रही हैं। विशेष रूप से जिला स्तर और ग्रामीण क्षेत्रों में काम करने वाले स्ट्रिंगर्स की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय है। भाजपा का यह दांव सीधे तौर पर उस बड़े वर्ग को प्रभावित कर सकता है जो खबरों के लिए दिन-रात मैदान में रहता है, लेकिन खुद आर्थिक तंगी से जूझता है।

भाजपा नेता ने स्वीकार किया कि ₹5,000 की राशि बहुत बड़ी नहीं है, लेकिन यह एक शुरुआत है। पार्टी का मानना है कि इससे पत्रकारों में सुरक्षा की भावना आएगी और वे बिना किसी दबाव के अपना काम कर सकेंगे।

चुनाव पर असर: 23 और 29 अप्रैल की वोटिंग से कनेक्शन

बंगाल चुनाव अब अपने निर्णायक मोड़ पर है। 23 और 29 अप्रैल को होने वाली वोटिंग से पहले इस तरह का ‘सेक्टर-स्पेसिफिक’ वादा गेम चेंजर साबित हो सकता है। जहाँ अन्य दल मुफ्त राशन और लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं पर दांव लगा रहे हैं, वहीं भाजपा ने पत्रकारों को केंद्र में रखकर एक नया नैरेटिव सेट कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि:

  1. यह घोषणा मध्यम वर्ग और बुद्धिजीवी वर्ग में भाजपा की छवि को ‘प्रेस-फ्रेंडली’ बनाएगी।
  2. स्थानीय स्तर पर काम करने वाले पत्रकारों का झुकाव नीतिगत स्तर पर भाजपा की ओर बढ़ सकता है।
  3. विरोधी दलों (TMC और वामपंथ) के पास फिलहाल पत्रकारों के लिए ऐसी कोई ठोस योजना नहीं है, जिससे भाजपा को ‘फर्स्ट मूवर एडवांटेज’ मिल गया है।

4 मई का इंतज़ार

इस योजना के तकनीकी पहलुओं और पात्रता की विस्तृत जानकारी पार्टी जल्द ही साझा करेगी। फिलहाल, कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी तक के प्रेस क्लबों में इसी बात की चर्चा है। अब सबकी निगाहें 4 मई के नतीजों पर टिकी हैं। अगर भाजपा सत्ता में आती है, तो यह बंगाल के इतिहास में पत्रकारों के लिए अपनी तरह की पहली और सबसे बड़ी वित्तीय योजना होगी।

क्या यह ₹5000 का वादा पत्रकारों की कलम की दिशा बदलेगा या यह सिर्फ एक चुनावी जुमला बनकर रह जाएगा? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन भाजपा ने फिलहाल एजेंडा सेट कर दिया है।

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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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