Advertisement
Jharkhand News

झारखंड हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: 2021 का बिजली शुल्क नियम असंवैधानिक घोषित, उद्योगों को मिली बड़ी राहत

Ranchi। झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य के औद्योगिक विकास और बिजली उपभोक्ताओं के पक्ष में एक युगांतरकारी निर्णय सुनाया है। अदालत ने झारखंड विद्युत शुल्क (प्रथम संशोधन) अधिनियम, 2021 और उससे संबंधित नियमावली को ‘मनमाना और असंवैधानिक’ बताते हुए पूरी तरह निरस्त कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना मूल कानून की धाराओं में बदलाव किए टैक्स वसूलने की पद्धति को बदलना कानूनी रूप से गलत है।

हाई कोर्ट ने क्यों सुनाया यह फैसला?

झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने मेसर्स पाली हिल ब्रुअरीज प्राइवेट लिमिटेड सहित 30 से अधिक याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। अदालत ने पाया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2021 में जो संशोधन पेश किए थे, वे न केवल तकनीकी रूप से दोषपूर्ण थे, बल्कि संवैधानिक मर्यादाओं का भी उल्लंघन कर रहे थे।

Advertisement

इन याचिकाओं में राज्य के बड़े औद्योगिक घरानों, स्टील प्लांट, खनन कंपनियों और कैप्टिव पावर उत्पादकों ने सरकार के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें बिजली शुल्क (Electricity Duty) की गणना के तरीके को पूरी तरह बदल दिया गया था। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा कि सरकार ने मूल बिहार विद्युत शुल्क अधिनियम, 1948 की बुनियादी संरचना में बदलाव किए बिना ही शुल्क वसूलने की नई प्रणाली लागू कर दी थी, जो विधायी प्रक्रिया का उल्लंघन है।

क्यों उपजा था विवाद?

विवाद की मुख्य जड़ ‘नेट चार्जेज’ (Net Charges) के आधार पर बिजली शुल्क की गणना करना था। इससे पहले झारखंड में बिजली शुल्क केवल खपत की गई यूनिट के आधार पर लिया जाता था। 2021 के संशोधन के बाद, सरकार ने इसे बिजली के कुल मूल्य यानी टैरिफ से जोड़ दिया था।

अदालत में दलील दी गई कि ‘नेट चार्जेज’ शब्द को कानून में कहीं भी स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया था। परिभाषा के अभाव में, यह व्यवस्था पूरी तरह से अस्पष्ट और अधिकारियों की मनमर्जी पर आधारित हो गई थी। कोर्ट ने यह भी गौर किया कि इस नई व्यवस्था के कारण कुछ उद्योगों के बिजली बिल में 1000 प्रतिशत तक की अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई थी, जो किसी भी व्यापारिक दृष्टिकोण से तर्कसंगत नहीं थी।

प्रशासन और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला राज्य सरकार के लिए एक बड़ा झटका है, लेकिन उद्योगों के लिए संजीवनी जैसा है। सुनवाई के दौरान प्रार्थियों के वकीलों ने तर्क दिया कि विद्युत नियामक आयोग (JERC) द्वारा तय टैरिफ के आधार पर टैक्स वसूलना अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।

कोर्ट ने विशेषज्ञों की इस बात से सहमति जताई कि एक ही श्रेणी के उपभोक्ताओं के बीच अलग-अलग टैरिफ के आधार पर अलग-अलग टैक्स वसूलना भेदभावपूर्ण है। अदालत ने राज्य सरकार की उस शक्ति को भी खारिज कर दिया जिसमें वह केवल अधिसूचना जारी कर टैक्स की दरें बदल देती थी। कोर्ट ने इसे ‘विधायी शक्तियों का अत्यधिक हस्तांतरण’ करार दिया।

जनता और औद्योगिक क्षेत्र पर असर (Impact)

इस फैसले का सीधा असर झारखंड के औद्योगिक परिदृश्य पर पड़ेगा। पिछले दो वर्षों से जो कंपनियां भारी-भरकम बिजली शुल्क के बोझ तले दबी थीं, उन्हें अब राहत मिलेगी।

  • आर्थिक राहत: उद्योगों की परिचालन लागत (Operating Cost) में कमी आएगी।
  • निवेश को बढ़ावा: बिजली शुल्क में स्पष्टता आने से नए निवेशक राज्य की ओर आकर्षित होंगे।
  • कानूनी स्पष्टता: अब सरकार को टैक्स लगाने के लिए पारदर्शी और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन करना होगा।

हालांकि, कोर्ट ने झारखंड विद्युत शुल्क (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2021 को वैध माना है। इसके तहत कैप्टिव पावर प्लांट्स पर 17 फरवरी 2022 से प्रभावी 50 पैसे प्रति यूनिट की दर से लगने वाला शुल्क जारी रहेगा।

हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद अब गेंद राज्य सरकार के पाले में है। सरकार के पास दो विकल्प हैं: या तो वह इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे, या फिर हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार एक नया और संवैधानिक रूप से वैध कानून तैयार करे।

औद्योगिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जो अतिरिक्त शुल्क अब तक वसूला गया है, उसे भविष्य के बिलों में समायोजित (Adjust) किया जाए। राज्य के ऊर्जा विभाग द्वारा जल्द ही इस संबंध में आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाने की संभावना है।

झारखंड हाई कोर्ट का यह निर्णय संवैधानिक मूल्यों की जीत और विधायी शक्तियों के दुरुपयोग पर एक कड़ा प्रहार है। टैक्स वसूलने की प्रक्रिया पारदर्शी और कानून सम्मत होनी चाहिए, न कि किसी विभाग की मनमर्जी पर आधारित। इस फैसले ने राज्य के उद्योगों को एक बड़ी अनिश्चितता से बाहर निकाल दिया है।

Related Stories & Ads

Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Leave a Comment