90 Senior Citizens ने की दोबारा शादी, अकेलेपन को कहा गुडबाय

90 Senior Citizens ने की दोबारा शादी, अकेलेपन को कहा गुडबाय

‘Happy Senior’ संगठन बना जीवनसाथी खोजने का माध्यम

बढ़ती उम्र के साथ Senior Citizens के लिए अकेलापन एक गंभीर समस्या बन जाता है। जीवनसाथी को खोने के बाद कई बुजुर्ग सामाजिक दबाव और पारिवारिक दिक्कतों के कारण दोबारा शादी करने से हिचकिचाते हैं। इस सोच को बदलने के लिए पुणे के माधव दामले ने ‘Happy Senior’ संगठन की शुरुआत की, जिससे अब तक 90 Senior Citizens Remarried हो चुके हैं।

अकेलेपन से जूझते Senior Citizens को मिला नया जीवनसाथी

आजकल युवा अपने करियर और शिक्षा के कारण बड़े शहरों या विदेशों में बस जाते हैं, जिससे उनके माता-पिता अकेले रह जाते हैं। कई बुजुर्गों को यह अकेलापन मानसिक और भावनात्मक रूप से कमजोर बना देता है। इसी समस्या को समझते हुए माधव दामले ने वरिष्ठ नागरिकों को नया जीवनसाथी दिलाने की पहल की।

शुरुआत में, उन्होंने Senior Citizens के लिए एक आश्रम स्थापित किया था, लेकिन जल्द ही उन्हें एहसास हुआ कि सिर्फ साथ रहने से समस्या हल नहीं होगी। उन्हें जीवनसाथी की आवश्यकता थी, जिससे वे अपना जीवन फिर से खुशी से बिता सकें।

अकेलेपन से जूझते senior citizens को मिला नया जीवनसाथी
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‘Live-in Relationship’ भी बना पसंदीदा विकल्प

जब Senior Citizens Remarried होने लगे तो कई परिवारों और समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध किया। पारिवारिक दबाव के कारण कई बुजुर्गों ने शादी के बजाय ‘Live-in Relationship’ को चुना।

अब तक कई Senior Citizens इस पहल से लाभान्वित हो चुके हैं और वे अपने नए जीवनसाथी के साथ एक-दूसरे की देखभाल कर रहे हैं। इससे उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति भी बेहतर हुई है।

समाज में बदलाव की जरूरत

इस पहल को समाज के कुछ वर्गों का समर्थन मिला, लेकिन कई लोग अब भी इसे स्वीकारने के लिए तैयार नहीं हैं। कुछ मामलों में Senior Citizens के परिवारों ने दोबारा शादी या ‘Live-in Relationship’ पर आपत्ति जताई।

हालांकि, ‘Happy Senior’ संगठन अपने प्रयासों में जुटा हुआ है। माधव दामले का मानना है कि Senior Citizens को अपनी जिंदगी अपने तरीके से जीने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।

यह पहल दिखाती है कि प्यार और साथ की जरूरत किसी उम्र की मोहताज नहीं होती। Senior Citizens Remarried होने से यह साबित हुआ है कि उम्र के हर पड़ाव पर खुशहाल जीवन संभव है।

समाज में बदलाव की जरूरत
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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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