रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा में सफल अभ्यर्थियों को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। जस्टिस दीपक रौशन की अदालत ने JSSC CGL परीक्षा और इसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार के फैसले को निरस्त कर दिया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अदालत ने माना कि पूरी परीक्षा रद्द करने के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त और स्पष्ट आधार प्रस्तुत नहीं किया गया था। जांच पूरी होने से पहले पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द करना भी उचित नहीं था।
इस फैसले से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी नियुक्तियां अगस्त 2026 में राज्य सरकार द्वारा जारी रद्दीकरण आदेश से प्रभावित हुई थीं। हालांकि, परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच जारी रहेगी और जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकेगी।
पूरी परीक्षा रद्द करने के बजाय दोषियों की पहचान संभव
मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि कथित गड़बड़ियों में शामिल अभ्यर्थियों की पहचान करना असंभव नहीं है। ऐसे में सभी सफल अभ्यर्थियों को प्रभावित करने के बजाय जांच के जरिए संबंधित लोगों को चिह्नित किया जा सकता है।
उपलब्ध विवरण के मुताबिक, अदालत ने सरकार की ओर से दाखिल काउंटर एफिडेविट यानी जवाबी हलफनामे में दिए गए आधारों को परीक्षा रद्द करने के फैसले के समर्थन में पर्याप्त नहीं माना।
कोर्ट के फैसले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि कथित अनियमितताओं की जांच और पूरी परीक्षा को रद्द करने का निर्णय दो अलग-अलग विषय हैं। जांच के दौरान दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।
जांच पूरी होने से पहले सरकार ने लिया था फैसला
याचिकाकर्ताओं की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने फैसले के बाद बताया कि हाईकोर्ट ने JSSC CGL विज्ञापन संख्या 10/2023 को रद्द करने संबंधी राज्य सरकार की अधिसूचना निरस्त कर दी है।
अधिवक्ता के मुताबिक, अदालत ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भी संदर्भ दिया। उन्होंने बताया कि जांच प्रक्रिया आगे जारी रहेगी और गड़बड़ी में दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया एवं नियुक्तियों से बाहर किया जा सकेगा।
अमृतांश वत्स के अनुसार, सरकार ने जांच रिपोर्ट पूरी होने से पहले ही परीक्षा रद्द करने का निर्णय ले लिया था। हाईकोर्ट ने इसी निर्णय को अनुचित माना।
JSSC CGL में सफल अभ्यर्थियों को क्या राहत मिली?
हाईकोर्ट के फैसले का सीधा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ेगा, जो JSSC CGL परीक्षा में सफल हुए थे और जिनकी नियुक्तियां सरकार के आदेश से प्रभावित हुई थीं।
राज्य सरकार का रद्दीकरण आदेश निरस्त होने से सफल अभ्यर्थियों के सामने उत्पन्न कानूनी बाधा दूर हुई है। हालांकि, इस फैसले को सभी नियुक्तियों की अंतिम और बिना शर्त वैधता के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
कथित गड़बड़ियों की जांच जारी रहने और दोषी पाए जाने वाले अभ्यर्थियों के खिलाफ कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। नियुक्तियों को लेकर आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया अदालत के लिखित आदेश के अनुरूप तय होगी।
इंटरवेनर पक्ष डिवीजन बेंच में जाने पर कर सकता है विचार
इस मामले में इंटरवेनर यानी हस्तक्षेपकर्ता की ओर से उपस्थित अधिवक्ता कुमार हर्ष ने राज्य सरकार के फैसले और अदालत में प्रस्तुत जवाब पर सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने अदालत में अपना पक्ष कमजोर तरीके से रखा। कुमार हर्ष के अनुसार, हाईकोर्ट के आदेश का विस्तृत अध्ययन करने के बाद इसे डिवीजन बेंच में चुनौती देने पर विचार किया जाएगा।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी में डिवीजन बेंच के समक्ष अपील दाखिल किए जाने की पुष्टि नहीं है।
कई अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले को दी थी चुनौती
JSSC CGL विज्ञापन संख्या 10/2023 को रद्द करने के राज्य सरकार के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई थीं।
इनमें रमेश उरांव एवं अन्य, आकाश गौरव एवं अन्य तथा निरोज खेस एवं अन्य की याचिकाएं शामिल थीं।
याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता और पूर्व महाधिवक्ता राजीव रंजन तथा अधिवक्ता अमृतांश वत्स ने दलीलें रखीं। वहीं, राज्य सरकार की ओर से वरीय अधिवक्ता मीनाक्षी अरोड़ा ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपना पक्ष प्रस्तुत किया था।
पिछली सुनवाई में कोर्ट ने उठाए थे कई सवाल
इससे पहले सुनवाई के दौरान अदालत ने राज्य सरकार से परीक्षा रद्द करने के आधारों पर सवाल किए थे।
उपलब्ध विवरण के अनुसार, अदालत ने मौखिक टिप्पणियों में कहा था कि उस समय तक की जांच में प्रश्नपत्र लीक होने के पुख्ता और आधिकारिक साक्ष्य रिकॉर्ड पर नहीं आए थे।
अदालत ने यह भी सवाल उठाया था कि जांच पूरी होने से पहले पूरी चयन प्रक्रिया रद्द करने का निर्णय कैसे लिया जा सकता है, जबकि इससे बड़ी संख्या में सफल अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
इससे पहले अदालत सरकार के रद्दीकरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा चुकी थी। 8 अक्टूबर 2026 को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
अगस्त 2026 में सरकार ने रद्द की थी परीक्षा
JSSC CGL विवाद में बड़ा घटनाक्रम 18 अगस्त 2026 को सामने आया था। राज्य सरकार ने सीआईडी जांच और अभ्यर्थियों के आंदोलन का हवाला देते हुए CGL परीक्षा प्रक्रिया तथा इसके आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था।
उसी दिन हेमंत सोरेन कैबिनेट ने कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने और छह परीक्षाओं को स्थगित करने का निर्णय लिया था। प्रभावित परीक्षाओं में 11वीं से 13वीं JPSC, CDPO और JSSC CGL जैसी परीक्षाएं शामिल थीं।
राज्य सरकार ने संबंधित परीक्षाओं की जांच सीआईडी को सौंपी थी। इसके अलावा 17 अन्य परीक्षाओं की भी सीआईडी जांच कराने का फैसला लिया गया था।
अब हाईकोर्ट के फैसले से JSSC CGL मामले में कानूनी स्थिति बदल गई है। हालांकि, अन्य परीक्षाओं पर इस निर्णय का क्या असर होगा, यह उनके संबंधित आदेशों और कानूनी कार्यवाहियों पर निर्भर करेगा।
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