स्टारलिंक ने भारत में हाई-स्पीड सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए तैयार होने की बात कही है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, कंपनी ने एक्स पर रिलायंस इंडस्ट्रीज़ के बयान का जवाब देते हुए यह दावा किया। हालांकि, सेवा शुरू होने की तारीख, शुल्क और बुकिंग प्रक्रिया की जानकारी सामने नहीं आई है।
रिलायंस ने 16 अक्टूबर 2026 को जारी अपने बयान में सैटेलाइट इंटरनेट क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और स्टारलिंक का स्वागत किया था। साथ ही कहा था कि जियो सहित सभी कंपनियों को भारतीय कानूनों और नियामकीय शर्तों का पालन करना होगा।
स्टारलिंक ने देश में बुनियादी ढांचा तैयार करने का दावा किया
स्टारलिंक के मुताबिक, वह पांच साल से अधिक समय से भारत के नियामकों, उद्योग और ऑपरेटरों के साथ काम कर रही है। कंपनी ने दावा किया कि उसने भारतीय इंटरनेट ट्रैफिक को सुरक्षित तरीके से संभालने के लिए देश में सिस्टम, गेटवे और अन्य जरूरी ढांचा तैयार किया है।
कंपनी का यह भी कहना है कि यह काम सरकार की आवश्यक मंजूरियों के साथ हुआ है। हालांकि, उपलब्ध सामग्री में इन मंजूरियों का विवरण या संबंधित दस्तावेज शामिल नहीं हैं।
मस्क की टिप्पणियों के बाद रिलायंस का बयान
यह संवाद भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के नियमों और मंजूरियों को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, एलन मस्क ने आरोप लगाया था कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी भारतीय ग्राहकों पर अपनी एकाधिकार वाली पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। उन्होंने मुकेश अंबानी पर भी टिप्पणी की थी।
स्रोत-सामग्री के मुताबिक, संचार मंत्रालय ने मस्क के आरोपों को गलत और निराधार बताते हुए कहा कि भारत में काम करने वाली प्रत्येक कंपनी को देश के कानूनों का पालन करना होगा।
रिलायंस ने अपने जवाब में कहा कि उसे प्रतिस्पर्धा से डर नहीं लगता। कंपनी ने जियो का उदाहरण देते हुए भारतीय दूरसंचार बाजार में अपनी शुरुआत और विस्तार का उल्लेख किया। उसने यह भी कहा कि उसकी अपनी सैटेलाइट सेवा भी मंजूरी का इंतजार कर रही है।
रिलायंस के इस बयान पर मस्क ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया में लिखा, “Much appreciated”।
लाइसेंस मिलने और सेवा शुरू होने में क्या अंतर है?
उपलब्ध सामग्री में संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के हवाले से बताया गया है कि स्टारलिंक, जियो सैटकॉम और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब को सैटेलाइट संचार का लाइसेंस मिल चुका है। हालांकि, केवल लाइसेंस मिलने से व्यावसायिक सेवा शुरू नहीं होती।
कंपनियों को सुरक्षा संबंधी शर्तें पूरी करने के साथ स्पेक्ट्रम भी प्राप्त करना होगा। स्पेक्ट्रम वे रेडियो आवृत्तियां हैं, जिनका इस्तेमाल संचार सेवाएं उपलब्ध कराने में होता है।
सिंधिया के हवाले से दिए गए विवरण के अनुसार, स्पेक्ट्रम आवंटन से पहले सरकार को राजस्व आधारित ढांचा तय करना है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी TRAI और दूरसंचार विभाग इसकी कीमत तय करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
इसलिए स्टारलिंक का तैयार होने का दावा और ग्राहकों के लिए सेवा उपलब्ध होना अलग-अलग चरण हैं।
झारखंड के पाठकों के लिए क्या जानकारी जरूरी है?
झारखंड में इस सेवा का इंतजार कर रहे पाठकों के लिए फिलहाल उपलब्धता और खर्च से जुड़े सवाल अनुत्तरित हैं। उपलब्ध सामग्री में राज्य के किसी जिले में सेवा शुरू करने की तारीख, उपकरण की कीमत, मासिक प्लान या आवेदन प्रक्रिया नहीं बताई गई है।
सैटेलाइट इंटरनेट को लेकर कंपनियों के बयानों के बावजूद, ग्राहकों के लिए वास्तविक उपलब्धता सुरक्षा शर्तें पूरी होने, स्पेक्ट्रम मिलने और व्यावसायिक शुरुआत की घोषणा पर निर्भर करेगी।












