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बिना OTP खाते से उड़े 50 हजार, साइबर ठगी का नया तरीका

Ranchi | न कोई फोन कॉल आया, न बैंक से जुड़ा कोई OTP शेयर किया और न ही कोई गोपनीय जानकारी दी। इसके बावजूद खाते से सीधे 50 हजार रुपये कट गए।

झारखंड की राजधानी रांची में सामने आए इस सनसनीखेज मामले ने साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों और आम खाताधारकों की नींद उड़ा दी है। पीड़ित ने जब ट्रांजैक्शन ट्रेल खंगाली तो पता चला कि यह रकम सीधे एक नामी ज्वेलरी स्टोर के खाते में ट्रांसफर हुई है।

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अब साइबर अपराध की दुनिया में शातिरों ने ठगी का ऐसा नया पैंतरा खोज निकाला है, जहां बैंक खाता खाली करने के लिए उन्हें आपके OTP की जरूरत भी नहीं पड़ रही।

रांची के कृष्ण कुमार के साथ क्या हुआ? ग्राउंड रिपोर्ट

रांची के साइबर थाने पहुंचे पीड़ित कृष्ण कुमार शुक्रवार की इस घटना से स्तब्ध हैं। उन्होंने पुलिस को बताया कि उनके मोबाइल पर पैसे कटने का अलर्ट तो आया, लेकिन उससे पहले लेनदेन की मंजूरी के लिए आने वाला कोई भी सिक्योरिटी अलर्ट या वन टाइम पासवर्ड (OTP) नहीं दिखा।

जब उन्होंने अपने बैंक शाखा से संपर्क कर स्टेटमेंट निकाला, तो होश उड़ गए। खाते से कटी 50 हजार रुपये की रकम ‘कल्याण ज्वेलर्स’ के खाते में क्रेडिट हुई थी। पीड़ित का साफ कहना है कि उन्होंने किसी भी ज्वेलरी स्टोर से न तो कोई खरीदारी की और न ही कोई गिफ्ट वाउचर जनरेट किया।

जांच में जुटी पुलिस: ज्वेलरी स्टोर तक कैसे पहुंचे पैसे?

रांची साइबर थाने की पुलिस अब इस गुत्थी को सुलझाने के लिए डिजिटल फुटप्रिंट्स खंगाल रही है। पुलिस मुख्य रूप से तीन तकनीकी बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है:

  • डिवाइस और आईपी एड्रेस: ट्रांजैक्शन किस मोबाइल, लैपटॉप या आईपी पते से इनिशिएट किया गया?
  • पेमेंट गेटवे की भूमिका: रकम ज्वेलर्स के खाते में किस गेटवे या मर्चेंट कोड के जरिए ट्रांसफर हुई?
  • बैकडोर एक्सेस: क्या फोन में किसी थर्ड-पार्टी टूल के जरिए बैकडोर एंट्री बनाई गई थी?

शातिरों का नया मोडस ऑपरेंडी: बिजली बिल और APK फाइलों का जाल

साइबर सेल के अधिकारियों के मुताबिक, ठग अब पुराने घिसे-पिटे तरीकों (जैसे फर्जी बैंक अधिकारी बनकर कॉल करना) से आगे निकल चुके हैं। अब खेल फोन का ‘रिमोट कंट्रोल’ हासिल करने का है।

1. बिजली बिल कटने का डर

उपभोक्ताओं को मैसेज भेजा जाता है कि “आज रात 9 बजे आपकी बिजली काट दी जाएगी, तुरंत इस नंबर पर संपर्क करें या बिल अपडेट करें।”

2. खतरनाक APK फाइलों की एंट्री

मैसेज के साथ एक लिंक या ऐप (APK फाइल) भेजी जाती है। जैसे ही यूजर इस फाइल को इंस्टॉल करता है, यह चुपचाप फोन के बैकग्राउंड में एक्टिव हो जाती है।

3. चुपके से डेटा और मैसेज की चोरी

यह मैलवेयर यूजर के स्क्रीन इनपुट, बैंकिंग ऐप क्रेडेंशियल्स और आने वाले SMS (OTP समेत) को हैकर्स के सर्वर पर फॉरवर्ड कर देता है। यूजर को स्क्रीन पर कुछ दिखाई भी नहीं देता और खाता खाली हो जाता है।

सिस्टम की तैयारी और आपका अगला कदम

डिजिटल बैंकिंग की सुविधा के साथ सुरक्षा की चुनौतियां भी तकनीकी रूप से जटिल हो चुकी हैं। साइबर एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब सिर्फ ‘OTP न बताना’ काफी नहीं है, बल्कि अपने स्मार्टफोन को डिजिटल रूप से हाइजीनिक रखना भी उतना ही जरूरी है।

हमेशा याद रखें ये 5 सुरक्षा नियम:

  • किसी भी अनजान स्रोत, WhatsApp या SMS से मिली .apk फाइल को कभी इंस्टॉल न करें।
  • बिजली बिल, पैन लिंकिंग या केवाईसी संबंधी किसी भी दावे की पुष्टि सिर्फ आधिकारिक वेबसाइट या दफ्तर से करें।
  • फोन में कोई भी अनजान ऐप दिखे, तो तुरंत फ्लाइट मोड ऑन करें, ऐप को अनइंस्टॉल करें और फोन रीसेट करें।
  • किसी भी संदिग्ध निकासी पर बैंक को तुरंत सूचित कर खाता और यूपीआई सेवाएं फ्रीज कराएं।
  • ठगी का शिकार होते ही बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर रिपोर्ट दर्ज करें।
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Subhash Shekhar

सुभाष शेखर पिछले दो दशकों से अधिक समय से पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं। साल 2003 में बुंडू (झारखंड) की जमीनी समस्याओं को आवाज देने से शुरू हुआ उनका सफर आज 'Local Khabar' के माध्यम से डिजिटल पत्रकारिता के नए आयाम स्थापित कर रहा है। प्रभात खबर, ताजा टीवी, नक्षत्र न्यूज और राष्ट्रीय खबर जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में संपादकीय और ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव रखने वाले सुभाष, आज के दौर के उन गिने-चुने पत्रकारों में से हैं जो खबर की बारीकियों के साथ-साथ वेब डिजाइनिंग और SEO जैसी तकनीकी विधाओं में भी महारत रखते हैं। वे वर्तमान में Local Khabar के संस्थापक और संपादक के रूप में झारखंड की जनपक्षीय खबरों का नेतृत्व कर रहे हैं।

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