रांची: झारखंड की राजधानी रांची में सोमवार शाम JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन अचानक उग्र हो गया। अपनी मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने पहुंचे छात्रों पर पुलिस ने खदेड़-खदेड़कर लाठियां भाजीं। इस घटना के बाद पूरे शहर में अफरा-तफरी मच गई और आंदोलनकारी छात्र वापस जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम लौटने लगे हैं।
इस लाठीचार्ज में छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो सहित कई अभ्यर्थी गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। देवेंद्र महतो की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें तुरंत रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वे इस समय ऑक्सीजन सपोर्ट पर हैं। 9 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे युवाओं पर हुए इस एक्शन के बाद छात्रों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा देने वाली इस घटना ने अब एक बड़े जनांदोलन का रूप ले लिया है। पुलिस प्रशासन द्वारा विधानसभा के गेट नंबर-1 को जबरन खाली कराने के बाद, दूर-दराज के जिलों से आए अभ्यर्थियों का जमावड़ा अब रांची रेलवे स्टेशन और स्टेडियम परिसर में लग रहा है।
बिना चेतावनी बर्बरता का आरोप, बेसुध हुई छात्रा
ग्राउंड पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों और घायल छात्रों के मुताबिक, पुलिस ने बिना किसी पूर्व सूचना या बातचीत के अचानक बल प्रयोग शुरू कर दिया। विधानसभा के बाहर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का दावा कर रहे युवाओं को पुलिसकर्मियों ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा। इस दौरान नारे लगा रही एक प्रदर्शनकारी छात्रा पुलिस की धक्का-मुक्की के बीच सड़क पर ही बेहोश हो गई।
घायल अभ्यर्थी शिवम ने ग्राउंड पर अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा, “हम विधानसभा के बाहर बैठकर सरकार के नुमाइंदों का इंतज़ार कर रहे थे, लेकिन कोई संवाद करने नहीं आया। अचानक पुलिस आई और बिना चेतावनी लाठीचार्ज कर दिया। मेरी पीठ पर और भाई के हाथ पर लाठियां मारी गईं। कम से कम 100 युवा घायल हुए हैं, जो पिछले 9 दिनों से अनशन पर थे।”

पुलिस की सफाई: पथराव के बाद किया गया ‘हल्का बल प्रयोग’
दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने लाठीचार्ज के आरोपों पर अपनी सफाई पेश की है। रांची के सिटी एसपी पारस राणा ने बताया कि उग्र भीड़ सुरक्षा घेरा तोड़कर विधानसभा के अति-संवेदनशील क्षेत्र के बिल्कुल नजदीक पहुंच गई थी। आयोजकों की अपील के बावजूद भीड़ में शामिल कुछ असामाजिक तत्वों ने पथराव शुरू कर दिया, जिसमें पुलिस के जवान भी चोटिल हुए हैं।
सिटी एसपी के मुताबिक, स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस को ‘हल्का बल प्रयोग’ करना पड़ा। हालांकि, पुलिस ने किसी भी छात्र को हिरासत में लेने से इनकार किया है और दावा किया है कि अधिकतर छात्रों को सुरक्षित वापस उनके गंतव्य की ओर भेजा जा रहा है।
‘तानाशाही नहीं चलेगी’, अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान
पुलिस के इस एक्शन के बाद छात्र नेताओं के तेवर और कड़े हो गए हैं। छात्र नेता रविंद्र पासवान ने लाठीचार्ज की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सरकार में अब कोई नैतिकता नहीं बची है।
“यह आंदोलन अब सिर्फ अभ्यर्थियों का नहीं, बल्कि जन-आंदोलन बन चुका है। हम अभिभावकों से अपील करते हैं कि वे अपने बच्चों के भविष्य की इस लड़ाई में सड़कों पर उतरें। सरकार के प्रतिनिधियों के पास कोई तर्क नहीं है, अब बातचीत सीधे मुख्यमंत्री से होगी।” — रविंद्र पासवान, छात्र नेता
विधानसभा के बाहर से भले ही पुलिस ने रास्ता खाली करा लिया हो, लेकिन तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम और रांची रेलवे स्टेशन पर हजारों अभ्यर्थियों की मौजूदगी से प्रशासन की नींद उड़ी हुई है। मुख्य सड़कों पर सुरक्षाबल तैनात कर दिए गए हैं। अगर सरकार और छात्रों के बीच जल्द ही सीधे संवाद की पहल नहीं हुई, तो मंगलवार को यह गतिरोध पूरे राज्य में बड़े सड़क जाम या बंद का रूप ले सकता है।











