झारखंड प्रशासनिक गलियारे से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते (L. Khiangte) को अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने गिरफ्तार कर लिया है।
इस हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारी के बाद से ही राज्य के प्रशासनिक और राजनीतिक महकमे में अफरा-तफरी का माहौल है। जेपीएससी परीक्षाओं में हुई कथित धांधली और भ्रष्टाचार के मामले में सीआईडी की इस कार्रवाई को अब तक का सबसे बड़ा क्रैकडाउन माना जा रहा है।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, खियांग्ते के कार्यकाल के दौरान हुई नियुक्तियों और ओएमआर शीट में गड़बड़ी से जुड़े कई पुख्ता सबूत मिलने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है।
जानिए क्या है पूरा मामला: CID की रडार पर कैसे आए पूर्व आईएएस?
[JPSC कार्यालय और CID मुख्यालय के बाहर की एक्सक्लूसिव तस्वीर यहाँ लगाएं]
ग्राउंड से मिली जानकारी के अनुसार, JPSC की पिछली सिविल सेवा परीक्षाओं में धांधली और ग्रेस मार्क्स आवंटन को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे। अभ्यर्थियों और छात्र संगठनों ने सड़क से लेकर कोर्ट तक इस प्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोल रखा था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच की जिम्मेदारी सीआईडी (CID) को सौंपी थी। CID की विशेष जांच टीम (SIT) ने जब आयोग के पुराने दस्तावेजों, डिजिटल साक्ष्यों और गोपनीय फाइलों को खंगाला, तो वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं की परतें खुलती चली गईं।
“आयोग में पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं हो सकता। जांच में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उनके आधार पर कानून सम्मत कार्रवाई की जा रही है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।”
— जांच से जुड़े वरिष्ठ सीआईडी अधिकारी का बयान
छात्रों का आंदोलन और सिस्टम पर उठते सवाल
[सड़क पर प्रदर्शन करते JPSC अभ्यर्थियों और पुलिस बल की फोटो यहाँ जोड़ें]
झारखंड में JPSC की परीक्षाएं हमेशा से ही विवादों के साये में रही हैं। सालों से ईमानदारी से तैयारी कर रहे युवाओं के लिए यह मामला केवल एक प्रशासनिक जांच नहीं, बल्कि उनके भविष्य से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
रांची के ओल्ड कमिश्नर ऑफिस और JPSC दफ्तर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। स्थानीय ग्राउंड रिपोर्टर के मुताबिक, गिरफ्तारी की खबर फैलते ही प्रतियोगी छात्रों के बीच संतोष का माहौल है, लेकिन साथ ही वे पूरे सिस्टम की सफाई की मांग कर रहे हैं।
जांच के दायरे में आने वाले मुख्य बिंदु:
- ओएमआर शीट (OMR Sheets) में संभावित हेरफेर: कट-ऑफ मार्क्स और मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठे सवाल।
- बैकडेटेड नियुक्तियां: बिना पर्याप्त सत्यापन के कई उम्मीदवारों के चयन का आरोप।
- अधिकारों का दुरुपयोग: अध्यक्ष पद पर रहते हुए नियमों को ताक पर रखकर लिए गए फैसले।
क्या और भी बड़े चेहरों पर गिरेगी गाज? (What Next)
एल. खियांग्ते की गिरफ्तारी सिर्फ एक शुरुआत मानी जा रही है। सूत्रों की मानें तो CID की टीम अब उन बिचौलियों और वरिष्ठ अधिकारियों का नेटवर्क खंगाल रही है, जो इस पूरे सिंडिकेट का हिस्सा थे। पूछताछ के दौरान कई और रसूखदार नामों का खुलासा हो सकता है।
अब देखना यह होगा कि इस बड़ी कार्रवाई के बाद JPSC अपनी खोई हुई साख को वापस पाने के लिए क्या सुधार करती है और प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय कब तक मिलता है।











